Tuesday , 21 September 2021
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उन्मादी हाथों में अचानक इतने पत्थर कहाँ से आये ?

उन्मादी हाथों में अचानक इतने पत्थर कहाँ से आये ?

IMG_7821abu obaida 98380 33331 कानपुर/ स्वतंत्रता आन्दोलन हो या फिर आज़ादी के बाद का कानपुर,इस शहर की पहचान हमेशा यहाँ की धुवां उगलती चिमनियों से की जाती रही है ,हादसे यहाँ के लिए कोई नई बात नहीं और अगर यह कहा जाये कि यह शहर सिर्फ हादसों का ही शहर है भले  ही होने वाला हादसा पलक झपकते सांप्रदायिक स्वरुप क्यूँ न धारण कर ले लेकिन जब उसकी प्रष्ठभूमि खंगाली जाती रही तब तब सिर्फ  एक ही बात उभर कर सामने आई की सांप्रदायिक सौहार्द में खलल  डालना कभी शहर के  हिन्दू और मुसलमानों के मिज़ाज में पाया ही नहीं गया / तीन दिन पूर्व शहर के फज़ल गंज थाना क्षेत्र स्थित झगडेश्वर मन्दिर से शुरू हुए दो शरारती तत्वों के बीच  झगडे ने एकबार फिर से शहर की फिजा को खराब करने का प्रयास किया लेकिन एक बार फिर मौलाना हसरत मोहानी और गणेश शंकर विद्यार्थी की नगरी कानपुर के प्रबुद्धजनों की पहल ने उन लोगों के मंसूबों में पानी फेरने का काम किया जिन्हों ने शहर के अमन चैन को आग में झोंकने में कोई कसार नहीं उठा रखी थी/ हालांकि इस बार भी प्रशासनिक चूक ही सामने नज़र आई जैसा की पहले के मामलों में पाया जा चुका है /IMG_7884इसे चुनाव व त्योहार ड्यूटी से हलकान हो चुकी पुलिस की शिथिलता कहें या अधिकारियों की चूक जिसमे  एक क्षेत्र से निकली चिंगारी ने पूरे शहर के लोगों का दिल दहला दिया/ शहर के इतिहास में यह  पहला हादसा है जब माहौल इस हद तक बिगड़ जाने के बाद भी प्रशासन को कर्फियू का सहारा नहीं लेना पड़ा और जिले के आला अधिकारियों ने जब कमान अपने हाथ में संभाली तो वह खुद की जान को जोखिम में डाल कर बवालियों को न सिर्फ खदेड़ने में कामयाब रहे बल्कि बिना कर्फियू लगाए जिस तरह से शहर की जनता पर प्रशासनिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई शयेद उसी का परिणाम है की ४८ घंटे में ही नगर के लोग एक दुसरे से गले मिलते नज़र आये और उन लोगों को कोसते भी दिखाई पड़े जिन्हों ने इस मामूली व गैर जिम्मेदाराना  हरकत के बाद जनता को भड़काने का काम किया/ धार्मिक उन्माद के चलते पहले तो कुछ नवयुवक पुलिस से मोर्चा लेने को आगे बढे लेकिन जैसे ही पुलिस ने अपनी ताक़त जनता के बेच आकर प्रदर्शित की वैसे ही उपद्रवियों के हौसले पस्त  हो गए और वह दुम दबा कर अपने बिलों  में घुस गए /पुलिस का मानना है की यह घटना सांप्रदायिक नहीं बल्कि एक साज़िश का हिस्सा है और ऐसे लोगों को चिन्हित भी कर लिया गया है और जल्द ही यह जेल की सलाखों के पीछे नज़र आयें गे/इस दौरान जो हुआ वह सब कुछ शहर की जनता व प्रशासन के सामने दूध का दूध और पानी का पानी की तरह दिखाई दिया लेकिन जो सब से चौकाने वाली बात रही वह ये की आखिर पलक झपकते ११० वार्डों वाले इस शहर के मात्र एक वार्ड के एक तिहाई हिस्से में इतनी बड़ी संख्या में ईंट और पत्थर कहाँ से आ गए ,पुलिस और जनता के बीच पथराव कोई नई बात नहीं है यह तो शहर के विभिन्न हिस्सों में आये दिन होने वाली घटनाओं का हिस्सा बन चुकी है लेकिन अब प्रशासन को इस बारे में भी सतर्कता बरतनी चाहिए की वह नगर निगम को इस बात की जवाब देहि के लिए बाध्य करे की शहर के सफाई कर्मी सड़कों पर बिखरे पड़े रहने वाले ईंट पत्थरों को कहीं एकत्रित न होने दें ताकि भविष्य में इन मंदांध नौजवानों को पुलिस से मोर्चा लेने  के लिए यह सुलभ हथियार उपलब्ध ही न होने पायें/IMG_7953aaa

 

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