Tuesday , 21 September 2021
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कानपुर. मेरा क़त्ल मै ही मुजरिम ?

कानपुर. मेरा क़त्ल मै ही मुजरिम ?


IMG_5081abu obaida 98380 33331 .chief editor/owner  snn यूं तो मेरा रंग काला है मगर कानपुर में मेरे काले रंग को भूरा कर दिया गया है .इस भूरे रंग की वजह है भ्रष्टाचार की काली स्याही जो सीधे मेरे मुंह पर उंडेली गयी है .अब हालत ये है की लोग इस वजह से मुझे खुनी दरिंदा और न जाने क्या क्या कहने लगे हैं .सच बताऊँ तो इसमें मेरा कुसूर नहीं .लोग मिझे अगर कातिल कहते हैं डायन कहते हैं तो गलत नहीं कहते .हकीकत में मै रोज़ क़त्ल करती हूँ लोगों की जाने लेती हूँ मगर क्या वाकई इलज़ाम मुझ पर लगना चाहिए ?सवाल आप जनता से इस लिए किया की आप मेरे मालिक हो जवाब मांगने का हक सिर्फ आप का है.मुझे ये अच्छी तरह पता है की आप सवाल नहीं करें गे किसी से जवाब नहीं मांगे गे क्यूंकि आप डरपोक हैं सच कहूं तो नपुंसक हैं .अगर नहीं तो आँख में आँख डाल कर लोक निर्माण विभाग  और नगर निगम से पूछिए की क्यूँ मुझे क़त्ल करने के लिए मजबूर किया जाता है ?ओह्ह अच्छा आप को मै ने अपना परिचय नहीं कराया DSCN5306……अरे मै हूँ आप की सड़क जिस के …..महात्मा गांधी सड़क.जवाहर लाल नेहरु मार्ग,इंदिरा मार्ग ,जाने क्या क्या नाम हैं यूं समझ लीजिये की हर देश भक्त और सच्चे महिला पुरुष भारतीय के नामों से मुझे जाना जाता है हर धर्म के मसीहाओं के नाम से मेरी पहचान है ,मगर क्या मै इस लायेक हूँ की इन नामों की रक्षा कर सकूं ?शायद नहीं क्यूंकि जितने नाम मुझे दिए गए उनमे से किसी महापुरुष ने कभी किसी का बुरा नहीं किया .मगर अफ़सोस रिश्वत नाम की लालच ने मुझे बनाने वाले सरकारी तन्त्र को अंधा कर दिया है .मुझे बनाने कंपनी को जो ठेका मिलता है उसकी साठ प्रतिशत राशि तो सरकारी नेताओं और अधिकारीयों की तिजोरी में चली जाती है अब बचता है चालीस प्रतिशत तो उसमे निर्माण कंपनी या ठेकेदार को भी मुनाफ़ा चाहिए बीस परसेंट ,सो वो लेता है अब बचा बेचारा बीस परसेंट तो उसमे मेरी शक्ल को जबरन काला करके आप के हवाला कर दिया जाता है .आप तो जानती ही हैं की हाल ही में मुझे विकास के नाम पर खोदा गया हज़ारों करोड़ के टेंडर से मेरे सीने को चीर कर सीवर और पानी की लाइनें  डाली गईं .बहुत अच्छा लगा हो गा आप को सुन कर की अब कानपुर से सीवर और पानी की समस्या खत्म हो जाये गी मगर क्या ऐसा हिया?नहीं हुआ कमबख्तों ने टूटे हुए पाइप डाल कर काम चलाऊ भराव किया जिसके बाद उन गड्ढों पर मुझे बनाया गया बड़े प्यार से मेरा लोकार्पण मुख्यमंत्री और विधायकों तक से कराया गया ……लेकिन हुआ क्या ज़रा सी बरसात ने मझे कातिल बना दिया मैं जगह जगह से कमज़ोर हो गयी छोटा सा वाहन मुझ पर टिक नहीं सकता मै बोझ बर्दाश्त नहीं कर सकती और वाहन मेरे सीने में धंस जाता है .वाहन सवार मेरे सीने के गड्ढों में फँस कर तर्क के नीचे आता है मर जाता है ,क्या होता है घर वाले रोने से लेकर अंतिम संस्कार करते हैं ये सोच कर की भगवान् को यही मंज़ूर था.लेकिन हकीकत में मुजरिम वो सरकारी तन्त्र है जिस ने आप के लाडले को अपनी भ्रष्टाचारी नीति से सुनियोजित तरीके से मारा .मुझे अपनी सफाई में कहना तो बहुत कुछ है मगर पहले इतने आरोपों पर कुछ कर के दिखाओ.भरष्ट तन्त्र के खिलाफ आवाज़ तो उठाओ .पूछो सरकारों से की मेरे ऊपर चलने वालों की मौतों का असली ज़िम्मेदार कौन ?जब आँख खुले पूछ लेना फिलहाल तो अपने बारे में इतना ही बताना है की कल रात से हुई बारिश में मै कई जगह खतरनाक हो गई हूँ आज  कई जगह मै धंसी हूँ कई ट्रक और ट्रेक्टर्स मेरे सीने में फंसे हैं उन्हें निकालने के लिए मशक्क़त हो रही है.अब ज़रा ध्यान से सुनो …..ज़रा सरकार से पूछो की पचास रूपये के सामन की वारंटी होती है तो करोड़ों की सड़कों की वारंटी क्यूँ नहीं ?हो सकता है आप की आवाज़ में लोग आवाज़ मिलाएं और एक दहाड़ बम बन जाए जिस के फूटने से मेरी इज्ज़त बच जाये और आप की जान ……..

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