Tuesday , 19 June 2018
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पुलिस को पैसा देकर दुकाने लगने वालों को ट्रैफिक पुलिस ने खदेड़ा – वसूला जुर्माना

पुलिस को पैसा देकर दुकाने लगने वालों को ट्रैफिक पुलिस ने खदेड़ा – वसूला जुर्माना

abu obaida कानपुर। एसएसपी शलभ माथुर के निर्देश पर आज दिनभर यातायात पुलिस ने टीआई दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में घंटाघर बड़ा चौराहा नरोन्हा चौराहा फूल बाग़ चौराहा टाटमिल चौराहा आदि से सड़क घेरे ठेले वालों व तिरपाल व पन्नी  डाल  कर चाय गन्ने का रस नीबू पानी बेच रहे लोगों को खदेड़ दिया। टीआई ने अपने सामने ही सैकड़ों दुकानों को हटवाया और चालान काटे। इस कार्रवाई को देख फुटपाथ पर दुकाने व सड़क किनारे ठेले लगाए लोगों में भगदड़ मच गयी और दुकानदार अपना माल समेट  कर भागते दिखे। इतना ही नहीं दिनेश कुमार ने इन सभी प्रमुख स्थानों पर आड़ी तिरछी खड़ी करों को करें की मदद से उठवाकर पुलिस लाइन भेज दिया और सभी का चालान काट रसीदें थमा दीं। बतादें कि बड़ा चौराहा नरोन्हा चौराहा घंटाघर और टाट मिल आदि चौराहे भीड़भाड़ वाले इलाके हैं जहाँ सैकड़ो की संख्या में अवैध वेंडर्स अपना ठेला आदि लगा कर अतिक्रमण कर लेते हैं जिस से ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होजाती है और लोग जाम में फंस कर ट्रैफिक सिपाहियों को कोसते दिखते  हैं।
क्षेत्रीय पुलिस की शह पर ही लगते हैं ठेले और दुकाने -दुकानदारों ने कहा पुलिस को पैसा देकर ही लग पाती हैं दुकाने। …….
एसएसपी के निर्देश पर अस्थाई दुकानों और ठेलों को हटा कर ट्रैफिक विभाग ने भले ही अपनी पीठ थपथपा ली हो लेकिन सच तो यह है कि दुकाने क्षेत्रीय पुलिस की मिली भगत से ही लगती हैं जिनकी वसूली शाम को पुलिस कर्मी खुलेआम करते हैं। बड़े चौराहे पर दिन भर ठेला लगाने का सुविधा शुल्क २०० रूपये तक होता है। वहीँ टाटमिल व घंटा घर आदि इलाकों में लगने वाले फल सब्ज़ी व अन्य ठेलों से पुलिस की ज़बरदस्त कमाई होती है। पिछले वर्ष जिलाधिकारी ने घंटा घर चौराहे को नो वेंडिंग ज़ोन घोषित कर वहां खड़े होने वाले चार पहिया ठेलों व गुमटियों को पुलिस की मदद से हटवा दिया था और दोबारा अतिक्रमण किये जाने पर संबंधित थाने को ज़िमेदार मान कर कार्रवाही के आदेश दिए थे। जिलाधिकारी के इस आदेश का विरोध भी हुआ था और सैकड़ों की संख्या में दुकानदारों ने घंटाघर चौराहे को जाम कर प्रदर्शन किया था लेकिन भारी पुलिस बल के  चलते उन्हें हटना पड़ा। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों  ने खुले तौर पर आरोप लगाया था जिसमे रोज़ शाम को पुलिस द्वारा वसूली किये जाने की बात कही गयी थी।  डीएम के आदेश पर दुकाने तो हट  गईं थी लेकिन इसका असर कुछ ही दिनों में हवा होगया और धीरे धीरे फिर पुरानी स्थिति आगयी। घंटाघर चौराहे की बात करें तो यहाँ कलकटर गंज हरबंस मोहाल सहित तीन थानों का बॉर्डर है और सभी थानों को यहाँ से रोज़ हज़ारों की कमाई होती है। क्षेत्रीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है की जिलाधिकारी क्या प्रधानमंत्री का भी आदेश होजाये तब भी यहाँ की स्थिति बदलने वाली नहीं।भीडभाड वाले इलाकों में रहने वालों का कहना है कि अतिक्रमण एक नासूर की तरह है जो शहर की तरक्की में बाधक है

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