Thursday , 22 August 2019
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मंडलायुक्त का आदेश बेअसर -आवारा जानवर सड़कों पर

मंडलायुक्त का आदेश बेअसर -आवारा जानवर सड़कों पर

abu obaida  कानपुर। तीन  रोज़ पहले हुई एक बैठक में मंडलायुक्त इफ्तेखारुद्दीन ने शहर में घूमते आवारा पशुओं पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए नगर निगम अधिकारीयों से कहा था कि  क्या तुम्हे आवारा पशु नज़र नहीं आते -उन्हें पकड़ कर तुरंत कांजी  हाउस में बंद करो बावजूद इस आदेश के कानपुर नगर निगम नींद से नहीं जागा और १० लाख आवारा पशु सड़कों पर खुले आम घूम घूम कर लोगों की जान के दुश्मन बने बैठे हैं। बड़ी बड़ी सींग वाले सांड खूंखार दांत वाले आवारा कुत्ते व घरों की छतों पर धमाल मचाते कटखने बंदर हर तरफ दिखा जाते हैं। सब से खराब स्थिति गंदे सुवरों की वजह से है जो ख़ास कर पाश इलाकों में झुण्ड बनाकर घुमते हैं और गंदगी को बढावा देकर सांक्रमक बीमारियां फैला रहे हैं। इतना ही नहीं हर इलाके में घोड़े और टट्टू भी घुमते मिलें गे जो सब्ज़ी मार्केट के पास अपना भोजन तलाश करने में अक्सर आपस में दंगल करते हैं और राहगीर उनकी लड़ाई में फंस कर या तो अस्पताल पहुंचता है या फिर सीधे शमशान।दो दिन पूर्व हुई ज़बरदस्त बरसात ने कानपुर की गन्दगी को कीचड में तब्दील क्या किया सुवरों और कुत्तों को पिकनिक मानाने का खुला अवसर मिल गया। किदवई नगर जैसे पाश व व्यस्त बाजार में कई जगह जल भराव के बाद कीचड जमा होगया है जहां आवारा सुवर दिन भर धींगा मस्ती कर जनता के लिए सर दर्द बने हैं और उसका समाधान करने वाला नगर निगम कोई क़दम नहीं उठा रहा। रविवार को किदवई नगर की मुख्य सड़क के किनारे कूड़े और कच्ची मिटटी के ढेर में सुवरों और आवारा सांडों व कुत्तों ने धमाचौकड़ी मचाए रखी जिस में कई दो पहिया वाहन चुटहिल होगये।बतादें कि इन आवारा जानवरों की वजह से शहर में हर साल कई मासूम राहगीर मौत के मुंह में समा जाते हैं लेकिन नगर निगम का कैटिल कैचिंग दस्ता मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी कोई अभियान नहीं चलाता। शहर के नवाब गंज घंटाघर होला गंज खपरा मोहाल अदि इलाकों में बंदरों का इतना आतंक है कि महिलाओं ने छत पर कपडे सुखाना बंद कर दिया है। कई घटनाओं में बंदरों के झुण्ड ने महिलाओं पर हमला किया जिस से महिलाऐं चार चार माले की बिल्डिंग से डर  के कारण कूद गईं और अपनी जाने गवां बैठीं।इन इलाकों के निवासियों का कहना है कि सालों हो गये वह लोग अपनी छतों पर नहीं जापाते दिन भर दरवाज़े बंद रखने पड़ते हैं अगर दरवाज़ा खुला रह जाये तो बंदरों की फ़ौज सीधे रसोई पर धावा बोलती है और खाने का सामन हमारी नज़रों के सामने उठा लेजाती है।डंडा लेकर भागने पर यह बंदर अक्सर लोगों को काट लेते हैं।क्षेत्र के कई लोगों ने नगर निगम को लिखित शिकायतें की लेकिन लापरवाह नगर निगम के अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ता।इन्ही परेशानियों को देखते हुए मंडलायुक्त ने नगर निगन को फटकार लगाते हुए आवारा पशुओं को पकड़ कर कांजी हाउस में बंद करने का आदेश दिया था लेकिन उसपर कोई अमल नहीं किया जारहा और चलती फिरती मौत के फ़रिश्ते  सांड सुवर गाय घोड़ा बन्दर व सुवर की शक्ल में घूम रहे हैं।अस्पतालों में बंदरों और कुत्तों द्वारा इंसानो को काटे जाने के मामले रोज़ आने पर भी जिलाप्रशासन कोई प्रभावी कदम  नहीं उठाता।रैबीज के इंजेक्शन आसानी से नहीं मिलते और घायलों को परेशानी उठानी पड़ती है। बरसात के दिनों में स्थिति उस समय बिगड़ती है जब दो पहिया वाहन सवारों को कुत्ते दौड़ाते हैं और चालक गाडी  सहित गिर कर घायल होता है या फिर मर जाता है।

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