Monday , 22 July 2019
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आसमानी किताबों में सब से बेहतर है कुरआन

आसमानी किताबों में सब से बेहतर है कुरआन

कानपुर।  कुरआन समस्त आसमानी किताबों से बेहतर है बल्कि हम कह सकते हैं कि प्रकृति ने इंसान के लिए जो किताबें तैयार की हैं उनमें सबसे अच्छी किताब कुरआन है। उक्त विचार मदरसा जामिया रहमत बकरमण्डी ढाल के जलसा ए दस्तारबन्दी के अवसर पर मदरसा शाही मुरादाबाद के उस्ताद ए हदीस मौलाना मुफ्ती सैय्यद मुहम्मद सलमान मंसूरपुरी ने लोगों को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। उन्होंने कुरान की अज़मत को बयान करते हुए कहा कि अल्लाह की महिमा से कुरआन करीम का एक एक अक्षर लबरेज़ है कुरआन ही वह किताब है जो साफ शब्दों में दावा करती है कि मैं परमेश्वर(खुदा) की ओर से हूं और परमेश्वर(खुदा) का वचन हूँ कुरआन वह किताब है जिस को उसने पेश किया है जिसका पवित्र जीवन हर तरह के दाग-धब्बे से शुद्ध है। मौलाना ने आगे कहा कि आज हमारे दिलों से अल्लाह का डर निकलता जा रहा है क्योंकि हमने हलाल को छोड़कर हराम को स्वीकार कर लिया है। मौलाना ने आगे बताया कि हलाल वह है जिसके लिए मना नहीं किया गया हो, आप स0अ0व0 ने फरमाया कि हलाल रोज़ी कमाना एक कर्तव्य के बाद दूसरा कर्तव्य है ,जिस तरह नमाज़, रोज़ा, हज, ज़कात फर्ज किए हैं उसी तरह अल्लाह ने हलाल आजीविका कमाने को भी जरूरी बताया है। इसके बाद जामिया रहमत के संरक्षक मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी कार्यवाहक क़ाज़ी ए शहर कानपुर ने कहा कि हमें अपने जीवन और स्वास्थ्य का भरोसा नहीं करना चाहिए, आज के दौर में हमारे साथ अनहोनी होने के सिवा कुछ और हो भी नहीं रहा है। आज हम अखबारों और टीवी को देखते तो हैं लेकिन इन पर दुर्घटनाओं की खबर पर हम ध्यान नहीं देते हैं। हमारे युवाओं को क्रिकेट की खबर खूब पसंद है लेकिन अगर किसी की मौत हो जाए तो हमारे अन्दर थोड़ी सी भी हमदर्दी पैदा नहीं होती । हमारे अंदर संवेदनशीलता और आखिरत की चिंता पूरी तरह निकल गई है। हम बेहिस होते चले जा रहे हैं, मानवता समाप्त होती जा रही है। हुजूर स0अ0व0 ने जो कुरआनी की शिक्षाएं हमारे सामने रखी है इसमें जहां नमाज़, रोज़ा, तिलावत, हज और जकात अदा करने के लिए कहा वहीं पर आप मानवता का भी आदेश दिया है। इस्लाम की शिक्षाएं मानवता की है। स्वार्थ, मतलबी स्वभाव इस्लामी शिक्षाओं के विरूद्ध हैं। हम अपनी समीक्षा करें कि कहीं हम स्वार्थी और मतलबी तो नहीं हो गए? हर जगह अपना व्यक्तिगत लाभ तो नहीं ढूंढने लगे? हज़रत मुहम्मद ने हमें जहां हमारे पड़ोसी, दोस्त, मिलने जुलने वालों तक के हुकूक बताया है वहीं हमें दुनिया वालों के काम आने वाला भी बनाया लेकिन आज हम दुनिया से काम लेने और मतलब निकालने वाले बन गए, फिर उसके बाद हम रोना रोते हैं और बहुत अत्यधिक तनाव और उलझनों में रहकर कहते हैं कि दुनिया हमारे विरूद्ध है। मौलाना ने कहा कि दुनिया हमारी विरोधी क्यों न हो जब हमारे अंदर स्वार्थ आ गया। मौलाना ने उपस्थित लोगों से सवाल करते हुए पूछा कि क्या हमने वास्तव में किसी गरीब, बेसहारा विधवा को ढूंढ कर मानवता के नाते उसकी सहायता की। घर, परिवार, मित्रता के सम्बन्ध से ऊपर उठकर आम आदमी से मानवता के नाते सहानुभूति की भावना पैदा करना ही इस्लामी शरीयत की शिक्षा है। हमनें अल्लाह की सामथ्र्य और शक्ति को पहचाना नहीं है। बड़े बड़े पहाड़ जिसको देख कर इंसान दहशत में आ जाए , इसे बनाने वाले अल्लाह कुरान में कह रहे हैं कि अगर हमने कुरआन को इस पर्वत पर उतारा होता तो पहाड़ टुकड़े-टुकड़े हो जाता। लेकिन अल्लाह ने अपने अंतिम और प्रिय पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्ल0 के दिल को इतना शक्तिशाली बनाया कि पैगम्बर ने न केवल यह कुरआन याद किया बल्कि पैगम्बर के सदके में आज आम आदमी भी कुरआन के हाफिज बन रहे हैं, अन्यथा छोटे से आदमी में इतनी शक्ति नहीं थी कि कुरआन की एक सूरत भी पढ़ लेते। अब कयामत तक कोई नया नबी और नई किताब नहीं आने वाली है। अल्लाह ने स्वंय कुरआन की रक्षा की जिम्मेदारी ली है, इस कुरआन को पढ़ने, सुनने, छूने और प्रेम की निगाह से देखने तक में भी सवाब है। इसलिए हमें चाहिए कि हम कुरआन की तिलावत थोड़ा ही सही मगर पाबन्दी से पढ़ें, पढ़ना नहीं जानते तो अपने मोहल्ले, क्षेत्र के एक आलिम के पास जाकर सीखें, समझें और इसके आदेशों का पालन करके अपने आखिरत की तैयारी करें। मौलाना इनामुल्लाह क़ासमी ने मदरसा जामिया रहमत की स्थापना के उद्देश्य और सेवाओं से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। जामिया रहमत से हाफिज कुरान की सआदत हासिल करने वाले 8 हाफिज़ों के सिरों पर उलमा के कर कमलों द्वारा दस्तार बांधने की प्रक्रिया अमल में आई। जलसे की सरपरस्ती मौलाना अनवार अहमद जामई अध्यक्ष जमियत उलमा कानपुर नगर ने फरमाई। कुरान की तिलावत से जलसे का शुभारम्भ हुआ, वहीं कलीम नईमी ने नात और मनकबत भेंट पेश किया। संचालन के कर्तव्यों को क़ारी मुहम्मद आसिफ साकिबी ने बखूबी अंजाम दिए। कार्यवाहक क़ाजी ए शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी की दुआ पर जलसा समाप्त हुआ, मौलाना इनामुल्लाह आए तमा म मेहमानों का तहेदिल से शुक्रिया अदा।

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