Friday , 17 September 2021
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राष्ट्रप्रेम की परिभाषा संघ नहीं तय कर सकता -सुन्नी उलमा कौंसिल

राष्ट्रप्रेम की परिभाषा संघ नहीं तय कर सकता -सुन्नी उलमा कौंसिल

कानपुर। आल इंडिया सुन्नी उलमा कौंसिल की एक बैठक तलाक़ महल स्थित कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक में केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों पर चर्चा की गयी खासकर देश में बढ़ रहे साम्प्रदायिक माहौल को विषय बनाते हुए कहा गया कि मोदी के नेतृत्व के में भाजपा व अन्य सहयोगी दल अपने आप को ही देश भक्त कहते हैं। इस अवसर पर हाजी सलीस ने कहा कि आरएसएस व अन्य हिंदूवादी संगठन अपने मन से भारतीयता और राष्ट्रीयता की व्याख्या कर रहे हैं। उन्हों ने मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असादुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान पर बोलते हुए कहा कि उन्हों ने कोई गलत बात नहीं की। कहा कि भारत माता की जय  बोले बगैर भी देश भक्ति की जासकती है क्यूंकि भारत का संविधान हमें  इस बात की इजाज़त देता है कि  हम अपने धर्म पर चलते हुए देश की  एकता और अखंडता को बनाये रखने का काम करें। इस्लाम में सिर्फ एक अल्लाह को मानने का हुक्म है और मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी की परस्तिश नहीं कर सकता। मुसलमान हिन्दुस्तां ज़िंदाबाद कहता है और यह भी सही है। सलीस ने कहा कि राष्ट्रवाद निभाने के लिए कोई अपनी मानसिकता किसी पर नहीं थोप सकता। ग़ुलाम नबी आज़ाद द्वारा आरएसएस की तुलना आईएसआईएस से करने पर हुए बवाल पर कहा कि अमेरिका द्वारा आतंकवाद के खिलाफ स्थापित टेररिज़्म रिसर्च सेंटर में भारत के ४८ संगठनों को आतंकी घोषित किया गया  जिसमे आरएसएस भी शामिल है और मोदी जी अमेरिकी राष्ट्रपति से कैसे मिलते हैं यह पूरी दुनिया जानती है और देख चुकी है। सलीस ने  आतंकवाद का जनक कौन नामक  किताब का हवाला देते हुए कहा कि उसमे बेस्ट बेकरी काण्ड पर उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का ज़िक्र है जिसमे  आरएसएस को जुनूनी धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वाला बताया था।सवालिया अंदाज़ में सलीस ने कहा कि यदि आरएसएस को आतंकी संगठन से जोड़ने वाले कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद गलत हैं तो कथित देश भक्त उच्च न्यायालय के उस फैसले पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे।

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