Tuesday , 21 September 2021
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कानपुर. नहीं सुनाई दी मौत की आसमानी चिंघाड़ .

कानपुर. नहीं सुनाई दी मौत की आसमानी चिंघाड़ .

DSCF1008abu obaida .snn. ३ जुलाई २०१५  रमजान शुरू होने से कुछ रोज़ पहले अफवाह उड़ने वालों ने एक पर्चा जारी किया था जिसमे १५ रमजान यानी ३ जुलाई की सुबह एक आसमानी चिंघाड़ से लोगो को डराने की कोशिश की थी पर्चे में लिखा था की १५ रमजान की सुबह फजिर की नमाज़ के बाद लोग अपने घरों में चले जाएँ सब खिड़की दरवाज़े बंद कर  लें और जब आसमान से तेज़ चिंघाड़ सुनाई दे तो सजदे में गिर कर या कुद्दुसो पढे ,अपने कानो में रुई ठूंस लें .जो ऐसा नहीं करेगा हलाक  (मर )हो जाये गा .ये  साज़िश भरी कोशिश  इतनी कामयाब हुई की मुस्लिम क्षेत्रों में एक बड़ा तबका इसे सच मान बैठा और एक दुसरे से पूछने लगा की क्या एसा होगा ?जवाब किसी के पास नहीं था .चूंकि जारी किये गए पर्चे में हदीस (मोहम्मद साहब के कथन )का हवाला दिया गया था लिहाज़ा कम पढे लिखे या पूरी तरह से अनपढ़ लोग इस झांसे में आकर डर के साये में १५ रमजान का इंतज़ार करने लगे .हालात और डर के बन गए जब कल रात कानपुर की कई मस्जिदों से ये कहा गया की आज की रात लोग नफिल नमाज़ें (विशेष नमाज़) पढे औए कुरान का पाठ करें .किसी तरह १४ रोज़ा बीता और १५ रमजान की शुरुआत हुई तो मुस्लिम इलाकों के मेडिकल स्टोरों पर रुई के बंडल खरीदने वालों की लाइन लग गयी कई स्टोरों पर रुई का स्टाक खत्म हो गया तो लोग दुसरे इलाकों से रुई खरीद कर ले गए .कोई ये नहीं बता रहा था की रुई की ज़रूरत क्या है बस सब रुई के बंडल खरीद रहे थे .कुछ समझदार लोगों ने स्थिति को समझ कर समझाने की कोशिश भी की मगर डरे लोग मानने को तयार नहीं हुए और रुई खरीद कर ही माने .बता दें की इस पर्चे के बंटने  के बाद शुरू हुए अफवाहों के दौर को देखते हुए कानपुर के उलेमाओं ने संयुक्त रूप से अखबारों और पर्चों पोस्टरों के माध्यम से इसे साज़िश बताया था और साफ़ तौर पर कहा था की एसा नहीं होने वाला और पर्चे में लिखी हदीस कहीं से साबित नहीं होती इस हदीस पर यकीन न करें ये किसी की साज़िश है जिसका थोड़ा बहुत असर हुआ और कुछ लोगों में डर कम हुआ फिर भी एक बड़े तबके ने धर्म गुरुओं  की बात को नहीं माना और डर के साए में १५ रमजान तक जीते रहे ,आज सुबह फजिर की नमाज़ के बाद जब लोगों को कोई आवाज़ सुनाई नहीं दी तो चैन की नींद सोये .दोपहर जब लोग सो कर उठे तो आपस में पूछते दिखे के क्या कोई आवाज़ सुनाई दी थी?क्या पर्चे में दी गयी तारीख ग़लत तो नहीं थी ?इसका भी जवाब किसी के पास नहीं.सब ने शुक्र अदा किया की आसमानी चिंघाड़ से महफूज़ रहे .

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One comment

  1. Ye sab sirf afwa ti
    Jis ne bhi ye sfwa udai hai usko allah ki mar pade gi

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