Monday , 20 May 2019
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क्या इतिहास के पन्नो में दर्ज होंगे प्रदेश के सिनेमा घर .

क्या इतिहास के पन्नो में दर्ज होंगे प्रदेश के सिनेमा घर .

7686303_origabu obaida (up)सरकार की उपेक्षा कहें या तकनीकी विकास में आई गतिशील्ता जिसके चलते आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिकांश  सिनेमा घरों पर ताले पड़ चुके हैं या फिर उनकी शक्ल बदल कर व्यावसायिक काम्प्लेक्स में तब्दील हो चुकी है / सिनेमा जगत पर संकट के बादल रातों रात नहीं मंडराने लगे बल्कि अस्सी के दशक से टीवी के माध्यम से आई तकनीकी क्रांति ने इनके वजूद को चुनौती देने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है अगर आगे भी सरकार  की उपेक्षा जारी रही तो वह दिन दूर नहीं की सिनेमा घरों की चर्चाएँ सिर्फ इतिहास के पन्नों का हिस्सा बन कर रह जाएँ गी/ सिनेमा घरों की खस्ता हाल होती स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की प्रदेश में ८५० सिंगल स्क्रीन सिनेमा हालों में से ५६० पर ताले लग चुके हैं /पांच जिले तो ऐसे हैं जहाँ लोगों के मनोरंजन का एक मात्र साधन रहे सिंगल स्क्रीन सिनेमा घर थे वहाँ एक भी  हल नहीं बचा है कई जिलों में जहाँ इका दुक्का सिनेमा घर चल भी रहे है उनकी स्थिति भी यहाँ तक पहुच चुकी है की कभी भी ये बंदी की कगार पर आसकते हैं /
प्रदेश सरकार राज्य में फिल्म उद्योग के विकास को प्रोत्साहन देने का वादा तो करती है लेकिन शायद प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सिनेमा घरों की बंदी की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश नहीं की /इसी का परिणाम  है की एक के बाद एक  सिनेमा घर बंद तो होते चले गए मगर  पिछले पच्चीस वर्षों में किसी ने नया सिनेमा हाल बनाने का सहस तक नहीं किया /जबकि  सिनेमा घरों की जगह लोगों का रुझान मल्टी प्लेक्स की ओर बढ़ा है लेकिन वहां प्रवेश करना सामन्य वर्ग के लोगों के बस की बात नहीं और यह वर्ग मनोरंजन का लुत्फ़ उठाने से वंचित होता चला जा रहा है जिसके चलते अपना फ़िल्मी मनोरंजन पूरा करने के लिए वह टीवी और मल्टी मीडिया मोबाइल का सहारा लेने को मजबूर है  /बड़े शहरों में कुछentertainment-2 सिंगल स्क्रीन सिनेमा फिलहाल चल तो रहे है लेकिन कब  इनपर भी ताला लटक जाए इसकी कोई  गारंटी नहीं है /डिजिटल युग को देखते हुए अब ऐसा नहीं लगता की सिनेमा घरों के पुराने दिन कभी वापस लौटेंगे/ऐसे में सरकार की फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन  देने की निति कितनी कारगर साबित होगी इस पर सवालिया निशान लगना स्वाभाविक है  /देश में आज सिर्फ आंध्र प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जहाँ पर सिनेमा घरों की भरमार है ऐसा नहीं है की तकनिकी विकास की किरण उस राज्य में न पहुची हो लेकिन इसके पीछे वहाँ की सरकार का रवैया राजस्व के प्रति थोड़ा नहीं काफी नर्म रहा है जिस के चलते वहां का सिनेमा जगत आज भी फल फूल रहा है /क्या आन्ध्र की तर्ज़ पर उत्तर प्रदेश सरकार भी मनोरंजन के नाम पर लिए जाने वाले राजस्व के मामले में नरमी बरते गी/

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