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फ़िज़ूल खर्ची छोड़ें और गुनाहों से बचें मुसलमान -मौलाना अशरफी

फ़िज़ूल खर्ची छोड़ें और गुनाहों से बचें मुसलमान -मौलाना अशरफी

abu obaida 98380 33331 आल इंडिया गरीब नवाज कौंसिल के तत्वावधान में श्याम नगर में आयोजित गरीब नवाज कांफ्रेंस से मौलाना हाशिम अशरफी का खिताब
कानपुर । बाद नमाज इशा नूरी मस्जिद श्याम नगर के पास में आल इंडिया गरीब नवाज कौंसिल के तत्वावधान में एक विशाल कांफ्रेंस बनाम जश्न ख्वाजा गरीब नवाज निहायत ही एहतराम  के साथ मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता व सरपरस्ती मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी आल इंडिया गरीब नवाज कौंसिल ने की। जिसमें शहर व पास-पड़ोस के मस्जिदों के इमाम और ओलमाए किराम व दानिशवराने कौम व मिल्लत और शहर के सरकर्दा लीडरान ने शिरकत की। जिसमें संयुक्त तौर से ये पैगमा दिया गया कि समाज में शराबखोरी, जुआखोरी, सूदखोरी, जिनाकारी, बदकारी, मोबाईल का गलत इस्तेमाल, शादी ब्याह में फिजूल खर्ची और खिलाफ शरह रस्मों को जड़ से उखाड़ फेकने के लिये जद्दोजहद करना होगा तभी एक खुशहाल समाज और अच्छा माहौल बन सकता है और खल्के खुदा को अमन व शुकून हासिल हो सकता है। मौलाना अशरफी ने अपने खुसूसी बयान में कहा कि रब तआला ने कुरान करीम में इनसान की कामयाबी के लिये तमाम मसाइल का हल बयान फरमाया है और रसूल अल्लाह सल्ल. की बताई हुई बातों पर अमल करके दुनिया से बुराइयों को मिटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि शादी की तकरीब में आतिशबाजी, पटाखाबाजी, डीजे, नाच गाना, दहेज की मांग जैसे खिलाफ शरह रस्मों से सख्ती से बचने की जरूरत है। मोमिनों की कामयाबी का राज अपने रसूल की सुन्नत पर अमल करना ही है। आज बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो घरों के अन्दर चडढ़ी पहन कर रहते हैं याद रखो घुटने खोलकर रहना चाहे वह घर के अन्दर हो या बाहर इस्लामी तालीम और हया के सरासर खिलाफ है। इस पुरकैफ मौके पर उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज अलैहिरहमा की तालीमात से लोगों से वाकिफ कराते हुये कहा कि वालिदैन की ताजीम व तकरीन फरमा बरदारी और खिदमत हर इन्सान का फरीजा है। ख्वाजा गरीब नवाज की शख्सीयत को तारीखसाज बनाने और उनकी जिन्दगी में चार चांद लगाने में उनकी वालदा का अहम रोल व किरदार है। वालदैन की खिदमत इतनी बड़ी नेकी है कि दोनों जहां में उसका असर जाहिर होता है। हत्ता के अल्लाह तआला ने उनको उफ तक कहने को हराम करार दिया है। आज पूरी दुनिया में मां को खिराजे अकीदत पेश करने के लिये ‘‘मदर्स डे’’ मनाया जाता है। ये लाइके मुबारकबाद कदम हैं इस्लाम ने 1400 साल पहले ही उनके हुकूक की अदाएगी, खिदमत और उनके साथ रहम व करम कर बरताव करने का हुक्म दिया। अल्लाह के नबी फरमाते हैं कि मां के कदमों के  नीचे जन्नत है। उन्हें मोहब्बत से देखने से हज का सवाब मिलता है। औलाद चाहे जितनी खिदमत कर ले उनके हुकूक से छुटकारा नहीं पा सकता है। वालदैन की रजा रब की रजा है। लेहाजा हमें उनसे मोहब्बत करने का सलूक करना और उन्हें खुश रखने की जरूरत है। ताकि रब की रज़ा और खुशनूदी हासिल हो सके।
मौलाना फतेह मोहम्मद कादरी साहब ने दौरान खिताब में फरमाया कि गुनाहों की ज्यादती के सबब तबाही और जलजले आते है। इन्सान मुसीबतों और आफतों का शिकार होता है। लेहाजा गुनाहों से तौबा की जरूरत है। मौलाना परवेज अख्तर अलीमी ने कहा मुसलमान पूरे यकीन के साथ अल्लाह और उसके रसूल के फरमान पर अमलपैरा हो जाये तो कामयाबी उनके कदम चूमेगी। मौलाना मोईनुद्दीन अशरफी ने सीरते रसूल सल्ल. पर रोशनी डालते हुये कहा कि सरकार के अस्वा हसना पर अमल करके ही हम कामयाबी हासिल कर सकते हैं।
मौलाना शाहनवाज साहब मिसबाही ने कहा कि समाज की बुराइयों का खात्मा उसी वक्त हो सकता है जब हम सब कुरान व हदीस के बताये हुये रास्ते पर अमल पैरा हो जायें।
जलसे का आगाज हाफिज़ नियाज़ अशरफी ने किया। शोरा ने नात पेश की।

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