Saturday , 25 September 2021
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राजबी ग्राउंड में सीरते सहाबा का जलसा

राजबी ग्राउंड में सीरते सहाबा का जलसा

03abu obaida 98380 33331 कानपुर, हज़रत मुहम्मद स0 की सीरत-ए-तैयबा और आपके द्वारा प्रशिक्षित सहाबा रजि0 के पवित्र कारनामों को बताने के लिए अंजुमन फ़रोग़ सुन्नत कानपुर द्वारा आयोजित रजबी ग्राउंड परेड में काजी शहर व मुफ्ती आज़म कानपुर मौलाना मुफ्ती मंजूर अहमद मज़ाहिरी साहब की अध्यक्षता में दो दिवसीय मर्कज़ी इज्लास सीरत-ए-सहाबा के पहले जलसे को हजरत मौलाना सैयद मुहम्मद तलहा साहब क़ासमी और हजरत मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा साहब क़ासमी और हजरत मौलाना अब्दुल बारी साहब फारूकी ने संबोधित किया।
भिवंडी महाराष्ट्र से आए मौलाना मुहम्मद तलहा नक्शबंदी ने सहाबा रजि0 की महानता और उनकी प्रतिष्ठा को कुरान और हदीस की रोशनी में बताते हुए कहा कि अल्लाह तआला ने अपने पिछली आसमानी किताबों में जहां रसूल अल्लाह (स.अ.व.) का उल्लेख किया वहीं सहाबा का भी उल्लेख किया है। सहाबा हुजूर अकरम स0 का परिचय हैं। हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही से जुड़ना है तो उसका रास्ता केवल सहाबा हैं दूसरा कोई रास्ता नहीं।
अंजुमन फरोग़ सुन्नत के उपाध्यक्ष कार्यवाहक काजी-ए-शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक उसामा कासमी ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा दौर में नए नए फित्ने अस्तित्व में आ रहे हैं। उनसे सुरक्षित रहने के लिए सबसे अच्छा नुस्खा है कि हम यह देखें कि जो लोग इस्लाम धर्म की व्याख्या कर रहे हैं वह सहाबा रजि0 की बातों से मेल खाती हैं या नहीं। अगर वे मेल खायें तो ठीक है वरना उनसे दूर रहें। कुछ लोग कुरान का हवाला देकर पांच नमाजों का इनकार करके कहते हैं कि केवल तीन नमाजों के बारे में कुरान में है कुछ ने कहा कि केवल दो है तो कुछ ने कुरान ही के हवाले से कहा कि एक है और बाद में एक का भी इनकार कर दिया है। कहा कि अरबी शब्द सलात का अर्थ दुआ के हैं। यह नया अर्थ सहाबा किराम रजि0 के फहम के खिलाफ है। मौलाना ने कहा कि नबियों, रसूलों और पैगम्बरों के बाद पूरे ब्रह्मांड में सहाबा  की जमात सबसे पवित्र जमाअत है। अल्लाह ने सहाबा को कुरान का विषय बनाया है। नबी का आशिक़ बनने के लिए सहाबा रजि का आशिक़ बनना पड़ेगा। सहाबा को छोड़ कर कोई अल्लाह वाला नहीं बन सकता। सहाबा की महानता को दिलों में बसाएँ। कुरान और हदीस के मामले में सहाबा ए किराम पर हम भरोसा करें तभी हम अपने धर्म और ईमान की रक्षा कर सकते हैं।
लखनऊ से आए दारूलमुबल्लिग़ीन के शिक्षक मौलाना अब्दुल बारी फारूकी ने संबोधित करते हुए कहा कि ईमान और सहाबा अविभाज्य हैं। उन्हें एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। जिस तरीके से आग से गर्मी, बर्फ से ठंडक को अलग नहीं किया जा सकता। इसी तरीके से सहाबा को ईमान से अलग नहीं किया जा सकता। जलसे का शुभारम्भ क़ारी अब्दुल माबूद फुरक़ानी की तिलावत-ए-कुरान से हआ। कन्नौज से आये मुफ्ती तारिक़ जमील क़ासमी ने नात व मन्क़बत पेश किया। संचालन के कर्तव्यों को क़ारी मुहम्मद आसिफ साकि़बी साहब ने अंजाम दिया । जलसे के अध्यक्ष क़ाजी शहर व मुफ्ती आज़म कानपुर मौलाना मुफ्ती मंजूर अहमद मज़ाहिरी साहब ने लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि बहुत खुशी की बात है कि अंत तक लोगों ने पूरे मन से आलिमों के बयानों को सुना। हजरत मौलाना तलहा साहब नक्शबंदी की दुआ पर पहले दिन के समारोह का समापन हुआ। जलसे में बड़ी संख्या में उलमा व हजारों लोगों ने भाग लिया। मंच पर मौलाना अनवार अहमद , हाफिज मामूर अहमद जामेई , मौलाना फरीद अहमद  ,मौलाना मुहम्मद शफी मज़ाहिरी ,मौलाना मुहम्मद अनीस खां क़ासमी,मौलाना मुहम्मद अकरम जामेई ,  बाबू अनीस खां , मुफ्ती अब्दुर्रशीद साहब कासमी समेत कई उलमा रौनक अफरोज थे।

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