Thursday , 17 October 2019
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सीरते सहाबा का दो दिवसीय इजलास खत्म

सीरते सहाबा का दो दिवसीय इजलास खत्म

20160313_223120abu obaida  98380 33331 कानपुर:- अन्जुमन फरोग़ सुन्नत कानपुर द्वारा काजी शहर व मुफ्ती आज़म कानपुर हजरत मौलाना मुफ्ती मंजूर अहमद साहब मज़ाहिरी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाले दो दिवसीय केंद्रीय इज्लास सीरत सहाबा के आखिरी जलसे में लखनऊ से आए मौलाना सलमान नदवी ने कहा कि मुसलमानों ने दीन-ए-इस्लाम को अपने वर्ग, समुदाय और परिवार के साथ व्यक्तिगत धर्म बना लिया है। जबकि मुहम्मद स0अ0व0 सभी के हैं इस्लाम सारी दुनिया का धर्म है। हमें हज़रत ईसा अलै0 के अनुयायी ईसाइयों को बताना होगा कि तुम्हारे नबी हज़रत ईसा अलै0 ने भविष्यवाणी की थी कि एक अंतिम नबी आयेगा, इसी तरह हजरत मूसा अलै0 को मानने वाले यहूदियों और महात्मा बुद्ध के अनुयायियों को भी बताना होगा कि तुम्हारे नबी और महात्मा ने हजारों साल पहले भविष्यवाणी की थी कि एक अंतिम नबी दुनिया में आएगा। दुनिया के सभी धर्मों की किताबें इस बात का अस्तित्व प्रदान करती हैं कि अंतिम नबी आएगा। मौलाना ने कुरान के हवाले से कहा कि जिस तरह रसूल अल्लाह स0अ0व0 हमारे नबी हैं इसी तरह हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथी यानी सहाबा रजि0 भी सभी के हैं। हजरत अबुबक्र व उमर, उस्मान व अली रजि0 और सारे सहाबा बिना भेदभाव धर्म हम सभी के हैं। उनके लिए किसी की मतभेद और संघर्ष के कोई मायने नहीं, लेकिन यह तभी होगा जब इन सहाबा किराम की सीरत को, मिशन और उनके काम को दुनिया के मतभेद से ऊपर उठकर दृढ़ता और इल्मी दलीलों के साथ उनके स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अकादमियों में सब के सामने पेश किया जाएगा। अगर इन बातों का विवरण दुनिया के सामने नहीं होगा तो फिर लोग एक पहलू को देखकर यही कहेंगे ये बातें तो हमें नहीं मालूम । आज दुनिया के लोग कुरान को एक धर्म और मुसलमानों के लिए उतारी गई अल्लाह की किताब मानते हैं जबकि यह गलत है क्योंकि कुरान सारी मानवता के लिए उतारी गयी किताब है। आज सारी दुनिया में मुसलमान परेशान हैं क्योंकि हमारे व्यापारी कुरान देख कर व्यापार नहीं करते, इसी तरह डॉक्टर, अधिवक्ता, अभियन्ता और प्रशासन कुरान की शिक्षा की रोशनी में अपने काम को अंजाम नहीं दे रहे। जलसे में कास गंज से आए मौलाना इनाम अहमद साहब ने उपस्थित जनों विशेषकर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज युवाओं के मोबाईलों में गलत तरीके से दुआएं वाट्स , फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर दुआओं में थोड़ा परिवर्तन करके डाल दिया जाता है और हमारे युवा इस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, बिना मालूम किये कोई भी इस्लामी लेख या दुआ फारवर्ड या शेयर न करें, मौलाना कहा कि संगत का असर हर चीज पर पड़ता है जैसे कोयले या लोहे को जब आग की संगति प्राप्त होती है तो वे लाल हो जाते हैं, लेकिन सहाबा के बारे में संगति का असर न हो ऐसा हो ही नहीं सकता, अल्लाह के नबी की संगति ने सारे सहाबा रजि0 को कुंदन बना दिया, सहाबा किराम रजि0 पर उंगली उठाने का हक़ हम में से किसी को नहीं है। अल्लाह और रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से उनको सच्चे, आदिल व राशिद होने का प्रमाण मिल गया है। इस अवसर पर भिवंडी से आए मौलाना सैयद मुहम्मद तलहा साहब ने कहा कि रसूल अल्लाह स0अ0व0 की 23 वर्षीय नबवी जीवन वास्तव में इस में अल्लाह तआला ने लगभग कयामत तक आने वाले स्थितियों को समेट दिया है, यह कोई फर्जी या काल्पनिक बात नहीं कि हजरत मुहम्मद स0अ0व0 आखरी नबी हैं, अब आप के बाद कोई नबी आने वाला नहीं है। खत्मे नबुव्वत का अपना इल्मी और व्यावहारिक तक़ाज़ा हैं, अल्लाह तआला ने इन सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करने की व्यवस्था करके फिर रसूलुल्लाह स0अ0व0 के खत्मे नबुव्वत की घोषणा किया है। खत्मे नबुव्वत का इल्मी तक़ाज़ा तो यह था कि अब दीन-ए-इस्लाम की हर हर बात कयामत तक के लिए सुरक्षित रहेगी, इसके लिए अल्लाह ने धर्म के मूल आधार ‘‘कुरान’’ की सुरक्षा का असाधारण और ऐतिहासिक प्रबंध किया है कि पूरे मानव इतिहास में उसकी दूसरी कोई मिसाल नहीं। हजरत मुहम्मद स0अ0व0 मासूम नबी थे उन्होंने अपने जीवन में व्यावहारिक नमूना सहाबा किराम रजि0 के सामने पेश किया। लेकिन कुछ काम ऐसे थे जो अल्लाह के रसूल स0अ0व0 से नहीं लिये जा सकते थे, उदाहरणतः अगर कोई चोरी करे या फिर दुराचार और बलात्कार जैसे संगीन अपराध करे तो उसे कैसे दंडित किया जाये और यह नमूना तो पैगम्बर द्वारा तो नहीं आ सकता क्योंकि अगर इन कार्यों के व्यावहारिक नमूना उनसे लिया जाता तो उनका व्यक्तित्व आहत हो जाती। अल्लाह चाहते थे कि अगर किसी से कोई बड़ा पाप, गलती और गुनाह हो जाये तो उसे कैसे दंडित किया जाये ,यह नमूना भी सामने आ जाए तो इसके लिए अल्लाह ने सहाबा का उपयोग किया और इसके लिए सहाबा का ही साहस था कि वह दुनिया की भलाई के लिए इन कार्यों के लिए भी खुद को पेश कर दिया। कुछ लोग अज्ञानता और कम ज्ञान के कारण कहते हैं कि अगर सहाबा आदर्श हैं तो क्या यह घोर पाप भी आदर्श है, उन्हें बतलाया जाये कि यह पाप और गुनाह नहीं बल्कि पाप के बाद उनकी चिंता ,पश्चात्ताप और पछतावा हमारे लिए हिदायत हैं, गुनाह होने के बाद क्या करना चाहिए यह नमूना है। क़ारी अब्दुल बारी साहब ने तिलावत फरमाई और कन्नौज से आये मुफ्ती तारिक जमील साहब ने नात पेश किया। क़ाजी-ए-शहर मुफ्ती मंजूर अहमद साहब ने रात के समय भयंकर आंधी और बारिश के बावजूद लोगों को जमकर आलिमों की बातें सुनने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि सहाबा से प्रेम का हमारे भीतर इसी तरह का जज्बा होना चाहिए, दीन को अपने घरों में लाना चाहिए ,नमाज़ों की पाबन्दी करना चाहिए। मुफ्ती साहब ने नसीहत करते हुए लोगों से कहा कि वर्तमान में बहुत से लोग अखबारों और मैग़जीन को तो पाबन्दी से पढ़ते हैं कि उनके बिना लोगों को चैन नहीं आता। लेकिन क्या इसी तरह कुरान पढ़ने की भावना भी कभी हमारे मन में आयी, नमाजें छूटने पर अफसोस हुआ ? अगर नहीं हुआ तो इस बात पर विचार करें और स्वंय का अवलोकन करें कि हम किस दिशा में जा रहे हैं? क़ाजी-ए-शहर मुफ्ती मंजूर अहमद साहब की दुआ पर इस दो दिवसीय मर्कज़ी इज्लास का समापन हुआ। संचालन के कर्तव्यों को क़ारी मुहम्मद आसिफ साहब साकि़बी ने अंजाम दिए। इस अवसर पर जमियत उलेमा कानपुर के अध्यक्ष मौलाना अनवार अहमद जामेई, कार्यवाहक काजी-ए-शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा कासमी, मुफ्ती इकबाल अहमद कासमी, मुफ्ती अब्दुर्रशीद कासमी, मौलाना इनामुल्लाह कासमी, मौलाना अनीस खां, क़ारी मुहम्मद अनीस, क़ारी अब्दुल मुईद चैधरी, क़ारी मुजीबुल्लाह इरफानी, हाफिज मामूर अहमद जामेई, मौलाना मुहम्मद अकरम जामेई, मुफ्ती असदउद्दीन क़ासमी, मौलाना नूरूद्दीन अहमद क़ासमी, मुफ्ती इज़हार मुकर्रम क़ासमी, मौलाना अंसार जामेई, मौलाना अनीसुर्रहमान क़ासमी के साथ हजारों लोग अंत तक जलसे में मौजूद रहे।

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