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कानपुर.घोटाला .. हैप्पी होम्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने डकारे करोड़ों

कानपुर.घोटाला .. हैप्पी होम्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने डकारे करोड़ों

20150721_211330 copyabu obaida 98380 33331 (editor snn.)कुछ शातिर दिमाग़ लोगों ने कानपुर में रियल स्टेट कम्पनी का आफिस खोल कर लखनऊ में उस ज़मीन पर फ्लैट बना कर देने का सब्ज़ बाग  दिखा कर करोड़ों वसूल लिए जो उसकी थी ही नहीं।शानदार आफिस और लम्बे चौड़े स्टाफ की चका  चौंध में फंसे लोगों ने अपने खून पसीने की कमाई के पैसे चेकों और नक़द के माध्यम से कम्पनी में जमा करा दिए जिन्हे दो साल में फ्लैट बना कर देने के सपने दिखाए गए थे। बाक़ायदा ग्राहकों को लखनऊ के शहीद पथ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी की ज़मीन दिखाई गयी जिसमे हैप्पी स्कवायर नाम से बिल्डिंग बन्नी थी शुरू में तो लोग मुतमईन हो गए मगर कई महीने बीतने के बाद जब लोकेशन पर एक भी फावड़ा नहीं चला तो लोगों को शंका हुई ,दफ्तर में पूछ ताछ शुरू हुई जिस पर आफिस में बैठे लोगों ने कुछ महीने बाद काम शुरू होने का आश्वासन दिया।इसी बीच कम्पनी में वरिष्ठ मैनेजर रफत जमाल को शक हुआ तो उन्हों ने अंसल ए पी एल अमर शहीद पथ लखनऊ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी के दफ्तर में जानकारी की तो उनके होश उड़ गए वहाँ से बताया गया की ये तो अंसल की जगह है और यहां किसी और को बिल्डिंग बनाने के लिए कोई भी ज़मीन न तो आवंटित की गयी है न ही बेचीं गयी है इतना सुनते ही कम्पनी के परेशान मैनेजर रफत  जमाल ने अपने साथियों को कानपुर में पूरा मामला बताया तो थोड़ी देर में पूरे स्टाफ में बात फैल गयी।इस बीच रफत और उनके द्वारा गठित टीम कई महीनों में अलग अलग लोगों से फ्लैट के नाम पर करोड़ों रूपये एडवांस  के नाम पर वसूल चुके थे। किसी अनहोनी के डर से रफत व् कई कर्मचारियों ने कंपनी के निदेशकों से जानकारी मांगी तो गोलमोल जवाब मिला इस पर सभी स्टाफ मेंबर्स ने अपने द्वारा जमा कराया गया पैसा  वापस माँगा तो उन्हें लालच देकर चुप रहने को कहा गया और आश्वासन दिया की किसी कारणवश देरी हो रही है और जल्द ही बिल्डिंग बनना शुरू हो जाये गी।आश्वासन के बावजूद कर्मी जब संतुष्ट नहीं हुए तो कंपनी के निदेशकों से नोक झोंक शुरू हो गयी मामला झगड़े तक पहुंच गया जिसके बाद कम्पनी के वरिष्ठ मैनेजर रफत जमाल और उनके जूनियर शिरीष सिंह ने कोतवाली में अपना वेतन ने देने और लोगों के साथ धोखा धडी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने शिरीष की तहरीर के आधार पर कम्पनी के तीन निदेशकों ,राजीव सिंह ,नक़ी रज़ा और मोहित बाजपाई के विरुद्ध ११ जून २०१५ को धारा ४०६,४२०,५०४,५०६ और १३८ के तहत मुक़दमा लिख लिया वहीँ रफत जमाल की तहरीर पर उक्त  तीनो निदेशकों के खिलाफ धरा ४०६,४२०,५०४,और ५०६ के तहत मुक़दमा पंजीकृत कर दिया। इन दोनो एफआईआर के बाद सिविल लाइंस स्थित कार्यालय बंद कर निदेशक घर बैठ गए और लोगों के फ़ोन उठाना बंद कर दिया। cc

अब आप को बताते है मामला क्या है ‘
वर्ष २०१२ में मकानो को कमीशन पर  बिकवाने वाले नवबस्ता निवासी राजीव सिंह ने मोहित बाजपाई और नक़ी राजा के साथ मिल कर हैप्पी होम्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी की स्थापना की। कानपुर सिविल लाइंस भार्गव स्टेट में शानदार आफिस खोला और मार्केटिंग के लोगों को अपाइंट किया।प्रचार में बताया गया की लखनऊ के अंसल गोल्फ सिटी में हैप्पी स्क्वायर बिल्डिंग बन रही है जिसमे लोग बुकिंग करा कर अपना फ्लैट सुरक्षित करा लें ,इस झांसे में कानपुर उन्नाव सहित कई ज़िलों के १०० के आसपास लोगों ने ८ लाख से २९ लाख तक का भुगतान नक़द और चेक के माध्यम से कंपनी को कर दिया लेकिन जब राज़ खुला तो लोगों ने आफिस पर चढ़ाई कर दी और अपंना पैसा वापस माँगा कम्पनी ने बड़े ही शातिराना ढंग से सब को पोस्ट डेटेड चेकें थमा दीं एक दो महीने बाद की दी गयीं चेकें बैंकों से बाउंस हो गईं।इस बीच पीड़ित लोगों ने आफिस के चक्कर लगाने शुरू किये तो वहाँ ताला ही मिला। कई लोगों ने कोतवाली में शिकायत की मगर पुलिस ने मामले में कोई रूचि नहीं दिखाई जिस के चलते बहुत से लोग कोर्ट से मुक़दमा लिखाने चले गए। हद तो ये है की पैसा गंवाने वालों में कानपुर महिला थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर उज्जवला गुप्ता भी हैं जिन का बेटा मर्चेंट नेवी में है और उसने आठ लाख रूपये एडवांस दिए थे हालांकि वर्दी के रौब में उन्हें ज़्यादा तर पैसा वापस मिल गया फिर भी डेढ़ लाख अभी बाक़ी है इनके अलावा।,गिरीश कुलश्रेष्ठ ,रितेश अग्रवाल ,शिरीष सिंह ,तुषार ,मोईन लारी अंकित सिंह आदि कई लोगों के आठ लाख से २९ लाख रूपये हैप्पी होम्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी दबाये बैठी है। इन सब लोगों की रक़म का जोड़ ही चार करोड़ के आसपास है। ये वो लोग हैं जो अभी सामने आये हैं बाक़ी कितने लोग अपना पैसा गंवाए बैठे है ये धीरे धीरे सामने आये गा। हैरत की बात तो ये है की सभी को १०० रूपये के स्टाम्प पर लाखों की नोटरी का कागज़ एग्रीमेंट के नाम पर थमाया गया है।सूत्रों से पता चला है की कंपनी के कुछ लोग कथित तौर पर सत्ता धारी किसी नेता के नज़दीकी हैं जिसके बल पर शिकायत कर्ताओं को धमकिया दी जा रही हैं। रफत जमाल की माने तो एक निदेशक ने उनके बेटे को उठाने तक की धमकी दे रखी है। डरे रफत जमाल अब महामहिम राजयपाल व अन्य अधकारिओं से लखनऊ जा कर मिलने की सोच रहे हैं लेकिन उन्हें डर है की ताक़तवर लोग उनपर हमला न कर दें। इस मामले में पुलिस की चुप्पी भी चिंता का विषय है। पीड़ितों के अनुसार आरोपियों के  खिलाफ पुलिस ने कोई प्रभावी क़दम नहीं उठाया है जिस का नतीजा है की सभी निदेशक इसी शहर में दुसरे इलाक़ों में दुसरे नाम से फिर इसी धंधे में लगे हैं।सत्यम न्यूज़ ने एक एक कर सभी निदेशकों से फ़ोन पर बात की और उनका पक्ष जाना जिनमे मोहित सिंह ने खुद को कम्पनी से अलग करने की बात कही और बताया की वह कंपनी से इस्तीफा दे चुके हैं साथ ही कोतवाली में अन्य निदेशकों के खिलाफ धोखा धडी का प्रार्थना पत्र भी दे चुके हैं। ठीक यही बात दुसरे निदेशक मोहित बाजपाई ने कही जिसमे बताया गया की १८ मार्च २०१४ को कम्पनी से जुड़े  थे और १८ नवंबर २०१४ को अपना त्यागपत्र सौंप चुके हैं तीसरे निदेशक मोहम्मद नक़ी राजा का फ़ोन आफ मिला उनसे बात नहीं हो सकी। सब से हैरान करने की बात तो यह है की कंपनी के सीएमडी राजीव सिंह ने सत्यम न्यूज़ को बताया की उन्हों ने २० अप्रैल २०१५ को कंपनी छोड़ दी थी और सारी  ज़िम्मेदारी रजत आदित्य दीक्षित की बनती है ये नया नाम सामने आने पर सत्यम न्यूज़ ने रजत आदित्य से फ़ोन पर जानकारी ली तो उन्हों ने अपने को सब से बड़ा पीड़ित बताते हुए कहा की सारा किया धरा राजीव सिंह ,मोहित बाजपाई और नक़ी राजा का है जो मेरे घर आये थे जिनके कहने पर मै ने और मेरे साथियों ने एक बड़ी  रक़म(करोड़ में अनुमानित ) इस कंपनी में इन्वेस्ट की थी रजत का कहना है की वो तो केवल इन्वेस्टर हैं जब उन्हें फर्जी वाड़े  की जानकारी हुई तो उन्हों ने अपने पैसे वापस मांगे मगर निदेशक मुझे ही कम्पनी का करता धरता बता कर फंसाने की कोशिश कर रहे हैं । कुल मिला कर सारी जानकारी कानपुर के आला अधिकारियों  के संज्ञान में है ,कोतवाली से लेकर आईजी जोन तक शिकायतें की जा चुकी हैं अब देखना है की मामूली केसेस में फ़र्ज़ी गुडवर्क करने वाली पुलिस  जांच को किस स्तर से और कितनी गंभीरता से होती है। सत्यम न्यूज़ के पास इस केस से जुड़े लगभग सभी दस्तावेज़ सहित निदेशकों और पीड़ितों के ब्यान सुरक्षित हैं।आप को बता दें की कानपुर में प्रॉपर्टी के लेन देन में कई हत्याएं हो चुकी हैं इस से पहले की ये मामला खुनी रंग अख्तयार करे ज़िम्मेदार अफसरों को प्रभावी क़दम उठाना होगा।कोई बड़ी बात नही की अपना पैसा गंवा चुके निराश  लोग कोई आत्मघाती क़दम उठा लें।bb
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