Saturday , 25 September 2021
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कहाँ हैं सपा के जनता दरबार ?फरियादी मायूस

कहाँ हैं सपा के जनता दरबार ?फरियादी मायूस

abu obaida कानपुर ।समाजवादी पार्टी को प्रदेश में मिली जीत के बाद शहर में गठित हुई नगर और ग्रामीण की इकाई में आला कमान से दिये गये निर्देशानुसार जनता दरबार लगाने की क्रिया को शुरू किया गया था। प्रत्येक दिन अलग अलग पदाधिकारियों व नेताओं द्वारा इस जनता दरबार में उपस्थित होकर आम जनमानस की समस्याओं को सुना जाता था और उसका निराकरण भी कराया जाता था, लेकिन अब यही जनता दरबार दम तोड रहा है। धीरे-धीरे जनता दरबार लगना बंद हो गया। न जनता की सुनने वाला कोई बचा और न सुनाने  वाली जनता। फिलहाल एक बाद फिर रविवार को जनता दरबार लगना शुरू हुआ जिसमें एक-आध ही शिकायते आती भी है तो उनका भलि भांति निसतारण भी नही हो पा रहा है।

बताते चले कि जनता दरबार के पीछे पार्टी हाई कमान का  उददेश्य था कि फरियादियों व शिकायतकर्ता जनता दरबार में आयेंगे तो पार्टी से लोगों का सीधा जुडाव रहेगा साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान  होते ही लोगों का विश्वास पार्टी की ओर मजबूत होता जायेगा। इसी उददेश्य के साथ जनता दरबार शुरू हुआ जिसमें नगर अध्यक्ष चन्द्रेश सिंह द्वारा कुछ ठीक ठाक  कार्य हुआ। उसके उपरानत महताब  आलम को नगर अध्यक्ष बनाया गया जिसके बाद जनता दरबार महज औपचारिकता ही बन कर रह गया। दूसरी तरफ सपा ग्रामीण कार्यालय  में प्रतिदिन जनता दरबार लगता था लेकिन महेन्द्र सिंह यादव के ग्रामीण अध्यक्ष बनते ही सपा ग्रामीण की पूरी रौनक चली गयी। सपा ग्रामीण महज अपसी राजनीति का अखाडा बन कर रह गया। धीरे धीरे जनता दरबार भी गायब हो गया। सूत्रों में माने तो महेन्द्र यादव सिर्फ समाचार पत्रों में फोटो खिचाने के अलावा कोई विशेष कार्य पार्टी के प्रति नही करते नजर आते है। कुल मिला कर यह कहना सही होगा कि जिस कानपुर की जनता में सपा को नगर से भारी बहुमत दिया आज शहर के पदाधिकारियों कि आपसी उठा पटक ने जनता को भुला दिया है। आये दिन शहर के दिग्गज पदों के लिए लखनऊ में माथा टेकते नजर आते है। आगामी विधान सभा चुनाव में ज्यादा समय नही है। इस बार भाजपा के साथ बसपा भी अपनी मजबूत दावेदारी  प्रस्तुत कर सकती है ऐसे में सपा के आला कमान  को कानपुर के पदाधिकारियों पर विशेष नजर रखनी होगी और तत्काल जनता दरबार के साथ जनता के बीच नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहुंच को बनाना होगा।

 

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