Wednesday , 27 October 2021
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अज़मत ए कुरान कान्फ्रेंस में मुज़ाहिरा ए किरअत  ओ कुरआन-

अज़मत ए कुरान कान्फ्रेंस में मुज़ाहिरा ए किरअत ओ कुरआन-

अल्लाह का कलाम सुन कर झूम उठे लोग

aaaकानपुर। जामिया इस्लामिया कुली बाजार के संस्थापक आलिम ए रब्बानी मौलाना ज़फरूद्दीन अहमद अल्हाज करीम बख्श आज़ाद  मौलाना कारी एहतिशाम अली मौलाना वसीउद्दीन अहमद साहबमुरब्बी ए कबीर मौलाना मौहम्मद मुबीनुल हक़ कासमी  क़ारी मुहम्मद यूनुस साहब की याद में ऑल इंडिया अंजुमन तरतीलुल कुरान व तंज़ीम अहल ए सुन्नत वल जमाअत कानपुर द्वारा आयोजितएक दिवसीय भव्य मज़ाहिरा हुस्न किरअत व अज़मत ए कुरान कान्फ्रेंस लियाक़त दादा चैराहा, तलाक महल कानपुर में आयोजित हुआ। कुरआन की अज़मत को महाराष्ट्र मुंबई से आए मौलाना सैयदमुहम्मद हुजैफा क़ासमी व जानषीन काज़ी ए शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी ने विस्तार से वर्णन किया इसके बाद लोगों ने विभिन्न अंदाज़ में कुरान पढ़ कर लोगों को मुग्ध करदिया।

मौलाना सैयद मुहम्मद हुजैफा क़ासमी ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि कुरान कुरैश की शब्दकोष पर उतरी लेकिन अन्य जनजातियों के अपवाद करते हुए सात किरअतों, और अंदाज़ में पढ़नेलिखने की अनुमति मिली। कुरान थोड़ा थोड़ा उतरा ताकि इसमें हुई वृद्धि को समझने में आसानी हो। अल्लाह ने हजरत जिब्रईल अ0 द्वारा आप पर कुरान नाजि़ल फरमाया। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने सहाबा किराम में से कुछ लोगों को इस काम के लिए निर्धारित किया था उनमें से किसी को बुलाते और लिखवा दिया करते थे। हुजूर स0अ0व0 जब दुनिया से विदा हुए तो बड़ी संख्या मेंसहाबा हाफिज कुरान थे लेकिन जिस तरह से आज हमारे पास कुरान एक जगह लिखा है इस तरह नहीं था विभिन्न चीजों पर लिखा था युद्धों में जब हुफ्फाज़ शहीद हुए तो हजरत उमर  रजि0 को चिंताहुई  उमर रजि ने हजरत अबूबकर से कहा कि युद्ध में बड़ी संख्या में हुफ्फाज़ शहीद हुए हैं इसलिए कुरान एकत्रित कर दिया जाए तो हजरत अबूबकर ने कहा कि जिस चीज को हुजूर स0अ0व0 करके नहींगए और न उन्होंने इसका आदेश दिया इसे कैसे कर सकते हैं तो उमर रजि0 ने कहा कि इसमें फायदा आपका ही है खैर कोई नई बात नहीं तो हजरत अबूबकर रजि0 ने एकत्रित करने के लिए कह करचले गए कुछ दिनों बाद हजरत अबूबक्र रजि0 ने वही लिखने वाले और हाफिज़ों को सम्मिलित कर सहाबा रजि0 की एक टीम का गठन किया ताकि वह कुरान को एक साथ जमा कर सकें। तब तककुरान सात लहजों में पढ़ा और लिखा जाता रहा जब हजरत उस्मान गनी का दौर आया तो उन्होंने कुरैश शब्दकोष पर तहरीर फरमाया लेकिन सात लहजों में पढ़ने की अनुमति बाकी रखी गई इसीलिएआप रजि0 को जामे कुरान कहा जाता है। मौलाना ने कहा हदीस व सहाबा रजि0 के बिना न हम कुरान को सही ढंग से समझ सकते हैं और न पढ़ सकते हैं और न ही लिख सकते हैं।

कार्यवाहक क़ाज़ी ए शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी ने अपने अध्यक्षी सम्बोधन  में कहा कि कुरान अल्लाह का कलाम है अल्लाह ने अपने आखिरी नबी हज़रत मुहम्मद स0अ0व0पर उतारा और उसकी रक्षा का वादा किया। देशवासियों में यह गलत धारणा है कि कुरान मुहम्मद साहब की किताब है हालांकि हजरत मुहम्मद का एक शब्द  भी इसमें शामिल नहीं यह शुद्धरूप सेअल्लाह का कलाम है हजरत मुहम्मद के द्वारा कही गयी शब्दों व बातों को हदीस कहते हैं। अल्लाह ने कुरान की रक्षा की जिम्मेदारी ली है इस का मतलब है कुरान के साथ इसके पढ़ने और लिखने सबकी सुरक्षा के लिए अल्लाह ने कहा। कुरान के शब्दो की रक्षा हाफि़जों के द्वारा अर्थ एंव मुराद की सुरक्षा उलेमा द्वारा और पढ़ने के अंदाज़ की रक्षा क़ारियों द्वारा कराया। अल्लाह ने अपने नबी को कुरानका अर्थ और अपनी मुराद बताई उन्होंने अपने सहाबा को और सहाबा ने ताबेईन और उन्होंने तबअ ताबेईन को बताया।

मज़ाहिरा किरअत में बाहर से आये क़ारियों में अल्हाज मौलाना क़ारी शफीकुर्रहमान साहब शिक्षक दारुल उलूम देवबंद अल्हाज क़ारी इरशाद अहमद साहब दारुल उलूम देवबंद  अल्हाज क़ारी रहमतुल्लासाहब इलाहाबाद  क़ारी मुहम्मद तैय्यब साहब बिजनौर  अल्हाज क़ारी मुहम्मद जकारिया साहब मुंबई क़ारी हसीबुर्रहमान साहब बिजनौर  क़ारी बदरूदुजा साहब लखनऊ क़ारी हिदायतुल्लाहसाहब फुरकानी  शिक्षक जामिया हिदायत जयपुर क़ारी सईदुर्रहमान साहब आगरा और स्थानीय कारियों में क़ारी अब्दुल माबूद फुरकानी  क़ारी मुजीबुल्लाह इरफानी क़ारी मुहम्मद ग़ज़ाली खानने दिलकश  अंदाज़ में कुरान की तिलावत फरमाई लोग देर  रात तक  तिलावत कुरान सुनते रहे। कार्यक्रम के मौलाना अनवार अहमद जामेई और मौलाना सैय्यद मुख्तार अहसन जामेईनक्शबंदी निगरानी डॉक्टर हलीमुल्लाह खान अल्हाज शेख सलीमुद्दीन मुतवल्ली मस्जिद ने फरमाई। संचालन के कर्तव्यों को मौलाना मुहम्मद अकरम जामेई ने अंजाम दिया  और नात का गुलदस्ताहाफिज अमीनुल हक़ अब्दुल्ला ने पेश किया। इज्लास में शहर-आसपास के क्षेत्र उन्नाव, हरदोई फतेहपुर बांदा औरैया जालौन  इलाहाबाद कन्नौज और कानपुर देहात से सैकड़ों उलमा हाफिज़ कुरआनऔर हजारों लोगों ने शिरकत की। हाफिज़ मुहम्मद शोएब , मौलाना मुफ्ती सअद नूर ने आये हुए लोगों को धन्यवाद दिया।

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