Wednesday , 27 October 2021
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कुरान और सुन्नत से रिश्ता रखने वाले फ़ितनो से महफूज़ रहते हैं

कुरान और सुन्नत से रिश्ता रखने वाले फ़ितनो से महफूज़ रहते हैं

कानपुर। हजरत मुहम्मद स0अ0व0 ने फरमाया कि मैं तुम्हारे बीच दो ऐसी मजबूत बातें छोड़कर जा रहा हूँ कि अगर तुम उन पर परिपक्वता से कायम रहे तो कभी गुमराह नहीं होगे। इन बातों फेथफुल गंज में अंजुमन तहफ्फज़ ए सुन्नत के द्वारा क़ाज़ी ए शहर कानपुर मुफ्ती मन्जूर अहमद मज़ाहिरी की अध्यक्षता में आयोजित तहफ्फुज़ सुन्नत कान्फ्रेंस मंे मुम्बई से आये मुख्य अतिथी मौलाना सैय्यद मुहम्मद हुज़ैफा क़ासमी ने किया। मौलाना ने कहा कि कुरान पर अमल के लिए जिस तरह हज़रत मुहम्मद स.अ.व. की सुन्नतें आप स.अ.व. की बातों और कार्यों और आपकी सीरत का जानना ज़रूरी है ठीक उसी तरह आप की सुन्नतों में मुक़द्दम और मोअख्खर  नासिख और मन्सूख तथा समय व स्थान की नज़ाकतों और आवश्यकताओं से पूरी जानकारी तभी संभव हो सकती है जब आप स.अ.व. के निकटतम साथी चारों खलीफा और आपकी रात व दिन में साथ रहने वाली अपनी पत्नियों और आपकी बच्चियों के जीवन के हालात से हम पूरी तरह परिचित हों  और उन पर हमारा विश्वास भी स्थापित हो।  जैसा कि हज़रत मुहम्मद स.अ.व. ने खुद इरशाद फरमाया कि तुम मेरे बाद मेरे खुल्फा (उत्तराधिकारी) के जीवन को धर्म के संबंध में उनके सुझावों को अपने स्पष्टीकरण को उनके फैसलों को इसी तरह अभिन्न समझना जिस तरह मेरे फैसलों को जरूरी समझते हो (हदीस)। पैगम्बर अलैहिस्सलाम के जीवन के घटनाओं के संबंध में चारों खलीफाओं को हजरत मुहम्मद स.अ.व. की ओर से यह अधिकार दिया गया है कि अगर वह शरीयत के किसी समस्या की कोई व्याख्या करते हैं या समय की आवश्यक्तानुसार उम्मत के लिए किसी चीज को अनिवार्य बताते हैं तो उनके इस फैसले और प्रक्रिया को वही महत्व प्राप्त होगा जो पैगम्बर के फैसले और प्रक्रिया को होती है।  प्रोग्राम में लखनऊ से आए मौलाना याह्या  नोमानी ने तक़लीद और इजतिहाद पर विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग तक़लीद और इज्तेहाद को शिर्क कहते हैं वह संकीर्णता का शिकार हैं। उनका अध्ययन और विचार बहुत ही सीमित है। इसके बाद मालेगांव से आए अल्लामा हाफिज मुहम्मद इक़बाल ने तक़लीद और गैर मुक़ल्लिदियत पर विस्तार से चर्चा की। कार्यवाहक काजी ए शहर मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी ने अपने संबोधन में कहा कि कम ज्ञान की कारण से ही सारे मतभेद हुए हैं। आज गैर मुकल्लिदीन युवा चाहे उसे उर्दू भी ठीक से न आती हो जेब में हिन्दी की बुखारी लिए हुए दिखता है और लोगों में संदेह और शक पैदा करता रहता है। बात करने पर जब उसके पास जवाब नहीं होता है तो कहता है कि मैं अपने बड़े को बुलाकर लाता हूं। उनका अध्ययन बहुत सीमित जानकारी तक बहुत ही कम फहम व फिरासत वाला है जिसकी वजह से वह मतभेद और अराजकता पैदा करते हैं। मौलाना ने कुरान की आयतों को भी पढ़ा। मौलाना ने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान इस कुरान में मौजूद है। आप अगर वास्तव में अल्लाह और उसके रसूल की बातों पर अमल करना चाहते हैं तो सहाबा ताबेईन तबे ताबेईन  फुक्हा  मुहद्देसीन  अइम्मा ए मुज्तहेदीन के नक्शेकदम पर चलें। इस से पहले फेथफुल गंज के युवाओं ने काज़ी ए शहर कानपुर मुफ्ती मंजूर अहमद मज़ाहिरी साहब द्वारा मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी को अपना उत्तराधिकारी और कार्यवाहक बनाने के फैसले का समर्थन करते हुए मौलाना उसामा क़ासमी का फूलों के हार से स्वागत भी किया। जलसे का संचालन मौलाना समीउल्लाह क़ासमी, मुफ्ती उस्मान क़ासमी ने संयुक्त रूप से किया.अबुदरदा मुअव्विज़ व हाफिज मुग़ीस ने नात पढ़ी । अंत में दुआ पर जलसे का समापन हुआ।

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