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हिन्दु-मुस्लिम एकता के प्रबल विरोधी थे पं दीनदयाल

हिन्दु-मुस्लिम एकता के प्रबल विरोधी थे पं दीनदयाल

लखनऊ-snn  केंद्र की मोदी सरकार जनसंघ की संस्थापक पं दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर कई योजनाओं को लोकापर्ण कर उन्हें धरातल पर उतारने की कोशिशों में लगी है। ऐसे में पं उपाध्याय द्वारा संस्थापित राष्ट्रधर्म पत्रिका ने अपने नए विशेषांक के जरिए यह लिखकर सियासी हल्कों में एक नई हलचल पैदाकर दी है की वह हिन्दू मुस्लिम एकता के विरोधी थे । पुस्तक के प्रकाशित अंक में यह कहा गया है कि पं उपाध्याय हिन्दु-मुस्लिम एकता के कटटर विरोधी थे उनका मानना था कि जबतक डिप्लोमेट तरीके से पाक को पराजित नहीं किया जाता तब तक भारत के मुस्लमानोें के विचारों को बदल पाना संभंव नहीं है। उन्होंने कुतुबुद्दीन ऐबक , मो अलाउद्दीन खिल्जी, मो बिन तुगलक, शेरशाह सूरी, समराट अकबर और औंरगजेब का हवाला देते हुए कहा कि इनसभी लोगों को भारतीय संस्कृति से कभी कोई लगाव नहीं रहा। उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम परस्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पं उपाध्याय के विचारों से डाॅक्टर राममनोहर लोहिया भी पूरी तरह से सहमत थे। पिछले दिनों लखनऊ में इस विशेषांक का लोकापर्ण केंद्री मंत्री कलराज मिश्र ने किया था। और इसमें जिसका शीर्षक था -मुस्लिम समस्यां दीनदयान की दृष्टि में- 15 अगस्त 1947 से लगातार लगातार प्रकाशित हो रही है इस पत्रिका में  बतौर संपादक अटल बिहारी बाजपेई भी काम कर चुके है। पत्रिका के संपादक आनंद  मिश्र का कहना है कि विषेशांक को बहुत कम समय में निकाला जा रहा है। बावजूद इसके लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत, पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, पूर्व केंद्रीय मुरलीमनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी व गोवा की राज्यपाल मृदुला सिंहा के भी बधाई संदेश व विचार शामिल है। पत्रिका के मुताबिक एक मुस्लमान अच्छा हो सकता है लेकिन समुदाय तौर पर वह बुरा होता है। लेख के मुताबिक धार्मिक सहनशीलता के मामले में हिन्दु काफी बेहतर है।

 

 

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