Monday , 16 December 2019
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टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर कर्नाटक में तनाव विहिप  नेता की मौत, एक घायल

टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर कर्नाटक में तनाव विहिप नेता की मौत, एक घायल

vhp-tipu-sultan3_14471418 copyabu obaida कर्नाटक-18 वी सदी में  मैंसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर समूचे कर्नाटक के लोगों में खासा आक्रोश व्याप्त है। इसी तनाव के चलते आज कर्नाटक बंद का आवाह्न भी हिन्दु संगठन की ओर से किया गया था जिसका कही-कही आंशिक तो कही व्यापक असर दिखाई दिया। जन आक्रोश के चलते राज्य के मादीकेरी में भड़की हिंसा में एक विश्व हिन्दु परिषद के नेता की मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति पुलिस की फायरिंग से गम्भीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद समूचे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया  है। और समूचे राज्य में व्यापक तनाव की स्थिति बनी हुई है। टीपू सुल्तान की 265वीं जयंती को लेेेकर राज्य सरकार की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना था जिसकी घोषणा के बाद से ही भाजपा सहित हिन्दु संगठनों में विरोध के स्वर तीखे होने लगे थे। आज जब राज्य के मादीकेरी में कार्यक्रम को लेकर समर्थक व विरोधी आमने सामने आ गए और देखते ही देखते पूरा कार्यक्रम स्थल रणक्षेत्र में तबदील हो गया। इस दौरान कार्यक्रम विरोधियों ने पुलिस और समर्थकों पर पथराव भी किया जिसके जवाब में पुलिस ने हवाई फायरिंग व आंसू गैस के गोले भी छोड़े। जिसमें पूर्व राज्य कर्मचारी व विहिप नेता कुरूप्पा  की मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति पुलिस फायरिंग से गम्भीर रूप से घायल हो गया। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धि रमैया  ने कहा कि टीपू सुल्तान मैंसूर की शान रहे है और उन्हांेने अपने शासन काल के दौरान कई मंदिरों को हमले से बचाने का काम किया था। जिसके चलते सरकार ने उनकी जयंती पर प्रदेश स्तर पर कार्यक्रमों के आयोजन का निर्णय लिया था। जिसका भाजपा सहित सभी हिन्दु संगठन विरोध कर रहे थे। वहीं मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विहिप नेता की मौत पुलिस की गोली से नहीं बल्कि पत्थर लगने से हुई है।001 (1) वहीं विरोधी दल भाजपा का कहना है कि टीपू सुल्तान हिन्दुओं के न सिर्फ कट्टर विरोधी थे बल्कि उनके शासनकाल में व्यापक पैमाने धर्मानान्तरण हुआ ऐसे हिन्दु विरोधी शासक का सरकारी स्तर पर जन्मदिवस मनाया जाना समूचे हिन्दु समाज का अपमान है। जिसे भाजपा कतई बर्दाश्त  नहीं करेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाद जोशी का कहना है कि टीपू सुल्तान कन्नड़ विरोधी थे और उनकी मानसिकता सदैव हिन्दु विरोधी रही। सीएम ने हिन्दु संगठनों की इस कार्यवाही को अनुचित करार देते हुए कहा कि 1799 में टीपू सुल्तान ब्रिटिश फौज के हमले से श्री रंग पटनम किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गए  गए थे। इसी लिए उनकी जयंती पर यह कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे थे लेकिन भाजपा और आर एस एस के लोगों के इशारे पर राज्य का मौहाल खराब करने के लिए हिन्दु संगठन  इस कार्यक्रम का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल समूचे राज्य में स्थिति सामान्य है। और तनावपूर्ण क्षेत्रों में पुलिस की टुकडि़यां पैनी निगाह रखे हुए है। वहीं मैगलोर यूनाइटेट क्रिश्चियन एसोसिएशन  ने टीपू सुल्तान की मुखालफत करते हुए कहा कि उन्होंने कर्नाटक के तटीय इलाकों से गिरजाघरों को नेस्तनाबूत करने का काम किया था। ऐसे व्यक्ति का सरकार स्तर पर जन्म दिवस मनाया जाना कतई जायज नहीं है।

 

 

 

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