Saturday , 23 June 2018
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मस्जिद के इमाम पर अनर्गल आरोप से नमाज़ी भड़के यतीम खाना पर लगाया जाम

मस्जिद के इमाम पर अनर्गल आरोप से नमाज़ी भड़के यतीम खाना पर लगाया जाम

abu obaida 98380 33331 कानपुर। यतीमखाना चौराहा स्थित मस्जिद नानपारा के इमाम मौलाना मेराज अशरफी के  खिलाफ अनर्गल आरोप से नाराज़ नमाज़ियों ने यतीमखाना चौराहे पर जाम लगाकर पुलिस के हाथ पाँव फुला दिए। जाम की सूचना पर बेकन गंज थाने का फ़ोर्स थाना अध्यक्ष अब्दुर रहमान सिद्दीकी के नेतृत्व में पहुंचा और जाम लगाए लोगों को समझाया लेकिन भीड़ किसी तरह से शांत नहीं हुई और झूठा आरोप  लगाने वाले के खिलाफ नारेबाजी करती रही। लोगों का कहना था कि जब तक इमाम साहब पर झूठा आरोप  लगाने वाले कथित पत्रकार गुफरान नक़वी को गिरफ्तार नहीं किया जाता तब तक जाम नहीं खुलेगा। शबेबरात के अवसर को देखते हुए पुलिस के लिए मामला चुनौती बन्ने लगा ऐसे में पुलिस ने क्षेत्र के सम्भ्रान्त लोगों को मौके पर बुलवाया और उनसे अपील करवाई इसी बीच शहर क़ाज़ी आलम रज़ा खान नूरी साहब ने मस्जिद के इमाम मौलना मोहम्मद मेराज अशरफी से फोन करके स्थिति को सामान्य करने की अपील की।इस दौरान सुन्नी  उल्मा काउन्सिल के महामंत्री हाजी सलीस व अन्य लोगों ने नाराज़ भीड़ को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिलाया तब जाकर असर की नमाज़ के समय लोगों ने जाम खोला।
बतादें कि खुद को शिवसेना के मुखयपत्र सामना का यूपी ब्यूरो चीफ बताने वाले गुफरान नक़वी पुत्र अहमद ज़मां नक़वी निवासी ९५ /९४ मुरारी  लाल का हाता परेड ने कुछ माह पूर्व   यूपी के डीजीपी को एक शिकायती पत्र दिया था जिसमे मस्जिद नानपारा परेड के इमाम मौलाना मेराज अशरफी पर बच्चा पैदा कराने के नाम पर झाड़फूंक के बहाने २ लाख रूपये हड़पने  और पत्नी के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। डीजीपी ने जांच कानपुर पुलिस कप्तान को सौंपी और सही तथ्य पता करने को कहा। एसएसपी कानपुर ने सीओ से जांच कराई तो मामला फ़र्ज़ी निकला और पुलिस ने कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया। इस दौरान मस्जिद के इमाम मौलाना मेराज कानपुर शहर क़ाज़ी आलम रज़ा नूरी के साथ २८ अप्रैल २०१६ को डीजीपी से लखनऊ में  मिले और अपना पक्ष रखा। पुलिस की ओर  से मौलाना पर कोई कार्रवाई न होने पर खुद को सामना का पत्रकार बताने वाले गुफरान नक़वी ने दोबारा डीजीपी से शिकायत की पुलिस ने फिर जांच की जिस से लोग भड़क गए और और सड़कों पर  निकल आये। गौरतलब है कि गुफरान नक़वी पत्रकारिता की आड़ में वसूली और धमकी देने के आरोप में २१ नवंबर २०११ को ग्वालटोली थाने से जेल की हवा खा चुका है। उस समय यह एक बड़े चैनल की आईडी  लेकर शहर भर में कई फैक्ट्रियों और नर्सिंग होम्स से लाखों की वसूली करने की शिकायतें मिली थीं और तुलसी हॉस्पिटल में वसूली करते पकड़ा गया था जहां पत्रकारों ने इसे जम कर पीटा था और पुलिस को  सौंपा था।इसके जेल जाने की खबरें सभी अखबारों और न्यूज़ चैनलों में दिखाई गयी थी। जेल से छूटने के बाद कुछ दिन गायब रहा और फिर खुराफात में लग गया। इमाम साहब ने बताया कि उनपर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। गुफरान उनके मदरसे में अपना दखल चाहता था जिसे उन्हों ने मना कर दिया और उसने यह ड्रामा खेला।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मस्जिद से कुछ ही दूरी पर नया फ़्लैट लेकर रह रहे गुफरान से क्षेत्री जनता  वहाँ रहने से आक्रोशित है। जाम लगाए कुछ लोगों ने कहा कि हम ऐसे झूठे और मक्कार को इलाके में रहने नहीं देंगे जो पत्रकारिता पेशे के साथ साथ इमाम साहब को बदनाम करने की साज़िश कर चुका है। मामला शिया और सुन्नी होने  के चलते संवेदनशील है और खुफिया भी अपनी निगाह बनाये है। अब देखना है कि पुलिस इस चुनौती से कैसे निपटती है।

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