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उत्तर प्रदेश के पुलिसवालों के ड्यूटी के घंटे निश्चित न होने और उन्हें साप्ताहिक छुट्टी न मिलने का मुद्दा एक बार फिर उठा

उत्तर प्रदेश के पुलिसवालों के ड्यूटी के घंटे निश्चित न होने और उन्हें साप्ताहिक छुट्टी न मिलने का मुद्दा एक बार फिर उठा

IMG_8675उत्तर प्रदेश के पुलिसवालों के ड्यूटी
के घंटे निश्चित न होने और उन्हें साप्ताहिक
छुट्टी न मिलने का मुद्दा एक बार फिर उठा
है। उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस
अमिताभ ठाकुर ने सोमवार को देश के गृह
मंत्री राजनाथ सिंह औरdownload उत्तर प्रदेश के
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर
इस मामले में अनुरोध किया है।
आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने ब्यूरो ऑफ़ पुलिस
रिसर्च एंड डेवलपमेंट
(बीपीआरडी) के
रिसर्च का हवाला देते हुए लिखा है कि 90%
पुलिसवाले रोजाना आठ घंटे से अधिक काम करते हैं। और
73% को महीने में एक दिन भी
साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता है।
उन्होंने इस आधार पर गृहमंत्री राजनाथ
सिंह से सभी राज्य सरकारों को इस रिपोर्ट के
महत्वपूर्ण निष्कर्षों का पालन करने हेतु दिशानिर्देश
देने का निवेदन किया है। उन्होंने अखिलेश यादव से
भी इन प्रावधानों का उत्तर प्रदेश में पालन
कराने के लिए अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि हालांकि यह मांग लम्बे समय से
उठाई जा रही है पर अब
बीपीआरएनडी
जैसी अत्यंत जिम्मेदार सरकारी
संस्थाओं द्वारा कई हज़ार पुलिसकर्मियों पर कराए गए
रिसर्च में इन तथ्यों के आधिकारिक रूप से प्रमाणित हो
जाने से इनकी स्वीकार्यता बहुत
अधिक बढ़ जाती है। इसलिए इस रिसर्च
द्वारा केरल में आठ घंटे के शिफ्ट के प्रयोग से आई
बेहतरी के नतीजे का अन्य
स्थानों पर भी पालन किया जाना चाहिए।
यह रिसर्च 23 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के
319 जनपदों के 12,156 पुलिसकर्मी,
1,003 थानाध्यक्ष और 962 पर्यवेक्षक अधिकारियों के
सर्वे पर आधारित है जिसमें सभी नौ प्रकार
के संभावित थानों को सम्मिलित किया गया है।
इस रिसर्च में यह सामने आया है कि 90% से अधिक
पुलिसकर्मी प्रत्येक दिन आठ घंटे से अधिक
काम करते हैं। और 73% पुलिसकर्मी
महीने में एक दिन भी
साप्ताहिक अवकाश नहीं पाते। इसमें
यह बात भी आई है। कि इन कारणों से
पुलिसकर्मी न तो स्वस्थ हैं और न
ही उनका जनता के प्रति अच्छा आचरण
रहता है। इससे उन्हें अनिद्रा, तनाव,
एसिडिटी जैसी तमाम
बीमारियाँ होती हैं। यह
भी पाया गया कि इससे पुलिसिंग भी
सीधे तौर पर प्रभावित होती
है।
यहाँ उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने
भी माना था कि पुलिसकर्मियों को छुट्टियां न मिलने
की वजह से वे ज्यादा चिड़चिड़े हो रहे
हैं। और बीमार रहते हैं। प्रदेश में बढ़
रहे अपराध से निपटने के लिए पुलिस विभाग एक मॉडल
प्रोजेक्ट राजधानी लखनऊ के
गोमतीनगर थाने में एक जून से लागू होने
की बात सामने आई है।
दो वर्ष पूर्व इलाहाबाद के पुलिस लाइंस में तैनात कांस्टेबल
उदय कुमार सिंह ने पैर का ऑपरेशन कराने और
पीलिया का इलाज कराने के लिए कई बार
छुट्टी मांगी। लेकिन अफसरों ने
छुट्टी देने के बजाए उसे हर बार मना कर
दिया। तबियत ज्यादा बिगड़ने पर जब दूसरे साथियों ने उसे एक
प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया तो अफसरों
ने उसे गैरहाजिर दिखाकर भगोड़ा घोषित करने
की कार्रवाई शुरू कर दी
थी। इलाज के दौरान अस्पताल में मौत होने
पर पुलिस वाले गुस्से में उबल पड़े और दुसरे दिन सुबह
की परेड छोड़कर सड़कों पर उतर आए थे।
नाराज पुलिसवालों को समझाने में अधिकारियों को
खासी मशक्कत करनी
पड़ी थी।

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