Monday , 15 August 2022
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अधिकारियों ने झाड़ू पकड़ कर कराया फोटो सेशन

अधिकारियों ने झाड़ू पकड़ कर कराया फोटो सेशन

abu obaida कानपुर।जब से मोदी सरकार वजूद में आई है तब से स्वछता अभियान का ढिंढोरा पूरे देश में पीटा जा रहा है। कभी मोदी जी दिल्ली की चमकती सड़कों पर झाड़ू लगाते फोटो में नज़र आते हैं कभी कोई मंत्री। शुरू में यह सिलसिला खूब चला। स्वछता अभियान में अपनी भागीदारी दिखाने के लिए मंत्री से लेकर संत्री तक कूद पड़े। अखबारों को विज्ञप्तियां जारी करके सफाई अभियान की कवरेज के लिए आमंत्रित किया जाने लगा नतीजे में देश की झाड़ू इंडस्ट्री में उछाल आगया और सस्ती से लेकर लक्ज़री झाड़ुएँ बाज़ार में आगयीं। देखते ही देखते अखबारों के पन्ने सफाई अभियान की सुर्ख़ियों और तस्वीरों से रंग गए मगर देश में फैली गन्दगी साफ़ नहीं हुई।सफाई अभियान पर हज़ारों करोड़ का खर्च करने के बावजूद भी देश की सूरत मैली सी क्यों है इस पर गहन विचार और शोध की ज़रुरत है हम तो बस आज इसी संदर्भ को लेते हुए कानपुर में लगातार ६६ घंटे सफाई के रेकॉर्ड बनाने की बात बताने जा रहे हैं जिसमे कानपुर के सभी एक सौ दस वार्डों में दोपहर २ बजे से शाम आठ बजे तक स्वछता महाभियान के तहत विश्व रेकॉर्ड बनाने की तयारी है। इस अभियान की मानिटरिंग एशिया विश्व रेकॉर्ड की टीम करेगी। गुरुवार को इस अभियान की शुरुआत हो भी गयी  जिसमे जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा एसएसपी शलभ माथुर व नगर आयुक्त ने एक ही झाड़ू को पकड़ कर सफाई अभियान का फोटो सेशन करवाया।यह अभियान स्नेह संस्था की ओर से चलाया जा रहा है जिसमे संस्था के लोगों के साथ नगर निगम ने अपने सफाई कर्मियों की टीम भी लगाईं है।नगर आयुक्त ने बताया कि  सुबह की रूटीन सफाई के बाद दोपहर की पाली में १५० सफाई कर्मी दोपहर दो बजे से रात आठ बजे तक हाथ बटाएं गे।इस अभियान के पूरा होने तक इन्तिज़ार करना होगा और देखना होगा कि यह अभियान कानपुर की सफाई में कारगर होगा या फिर कागज़ों में रेकॉर्ड होकर रह जाएगा।आम लोगों ने इसे हास्यस्पद बताते हुए कहा कि शहर से करोड़ों रूपये टैक्स वसूलने वाला नगर निगम अपनी ज़िम्मेदारी निभाये तो ऐसे अभियानों की क्या ज़रुरत।इस अभियान को देख कर एक राहगीर ने कहा कि यह प्रशासन का काम है लेकिन नगर निगम का निकम्मा अमला मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी सड़कों और गलियों से कूड़ा नहीं उठाता यदि निगम ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारी को निभाए तो सड़कें चमकती हुई दिखेंगी और किसी गैर सरकारी संस्था को ऐसे अभियानों की ज़रुरत नहीं पड़े गी।

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