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माँ के इन्तिज़ार में हैं नवजात -अस्पताल का स्टाफ पाल रहा बच्चे को

माँ के इन्तिज़ार में हैं नवजात -अस्पताल का स्टाफ पाल रहा बच्चे को

कानपुर। मां मुझे अपने आँचल में छिपा ले गले से लगा ले, कि और मेरा कोई नहीं फिर न सताऊंगा कभी पास बुला ले गले से लगा ले कि और मेरा कोई नहीं माँ मुझे अपने भूल मेरी छोटी सी भूल जाओ माता ऐसे कोई अपनों से रूठ नहीं जाता कुछ इस तरह की दर्द लिए एक नवजात करीब एक सप्ताह से डफरिन अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। उसको यह आस है कि उसकी मां उसे लेने आयेगी इसलिए उसकी आज भी सांस चल रही, बेटे के इस दर्द को देखकर इलाज करने वाली डाक्टर व स्टाफ नर्सो का दिल पसीज गया पर उस मां का दिल नहीं पसीजा जिसने उसे जन्म दिया हैं। बिन मां के इस औलाद को अस्पताल की ये डाक्टर्स अपने बेटे से ज्यादा प्यार करती हैं और इलाज कर रही हैं।
जन्म के बाद फेंका बाजार में
बेटे के जन्म के बाद जहां मां-बाप खुश होते है कि उन्हे कूल का दीपक मिल गया, लेकिन एक कलियुगी मां को बेटा होने के बाद ही उसे मरने के लिए सीसामऊ स्थित पी रोड बाजार के पास एक सूनसान गली में फेंक दिया। मां का साथ छूटते ही वह मासूम चिखता चिल्लाता रहा, लेकिन मां का दिल नहीं पसीजा। बच्चे की शोर सुनकर इलाकाईयों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर पुलिस ने मासूम को गोद में लेकर डफरिन अस्पताल में भर्ती कराया। जिससे एसएनसीयू वार्ड में रखा गया हैं।
हालत है गंभीर
एसएनसीयू प्रभारी डा. कुमकुम शर्मा ने बताया कि जिस वक्त इस मासूम को पुलिस लेकर यहां आई थी उस वक्त यह बच्चा कड़ी धूप में होने के चलते नीला पड़ गया था। उसकी हालत को देखते हुए एसएनसीयू वार्ड में रखा गया हैं। उन्होंने बताया कि जब बच्चे के गोद लेने के लिए कई संस्थाओं अस्पताल आये, लेकिन बच्चे की हालत देखकर संस्थाओं को नहीं दिया जा रहा हैं। बच्चे को थोड़ा बड़ा और स्वास्थ्य हो जायेगा तो उसे एनजीओं के सुपुर्द कर दिया जायेगा।
मां की आंस में जिंदा हूं
डफरिन अस्पताल के डाक्टर्स ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड में भर्ती मासूम बच्चे की हालत अब ठीक है। लेकिन वह अपनी मां के आंचल से लिपटने के लिए बच्चा आज भी रोता है तो वहां की स्टाफ नर्से उसे गोद में लेकर चूप कराती है। यहां तक लोगों ने कहा कि दिया यह बच्चा अपनी मां की एक झलक पाने के लिए ही जिंदा हैं, वर्ना जिस हालत में यह अस्पताल आया था तो कुछ भी हो सकता था।

 

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