Tuesday , 21 September 2021
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कानपुर.हिंदुस्तान का मुसलमान किरायदार नहीं देश का मालिक है (मो.हाशिम अशरफी )

कानपुर.हिंदुस्तान का मुसलमान किरायदार नहीं देश का मालिक है (मो.हाशिम अशरफी )

abu obaida 98380 33331  chief editor  snn कानपुर. जंगे आज़ादी में उलेमाए अहले सुन्नत की कुर्बानियों की याद दिलाते हुए आल इंडिया गरीब नवाज़ काउन्सिल के महामंत्री मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी ने कहा की हमारे बुजुर्गों ने भारत की आज़ादी में अपनी जाने कुर्बान की .अंग्रेजों के दांत खट्टे करने में उलेमा ए अहले सुन्नत ने अहम रोल अदा किया मगर अफ़सोस की आज कुछ फिरका परस्त ताक़तें मुसलामानों को इस देश का किरायेदार बता कर पाकिस्तान जाने को कहती हैं .मौलाना ने कहा की हमारे पूर्वजों ने हिन्दुस्तान की आज़ादी की मुहिम में जिस तरह अपनी जाने कुर्बान की उसे इतिहास के पन्नो से गाएब कर दिया गया है .कुछ ही महापुरुषों के नाम और कारनामे बताये जाते हैं जब की हकीकत में हमारे बुजुर्गों ने जिस तरह अपना खून बहा कर देश की आज़ादी में योगदान दिया उसे आज की पीढ़ी तक पहुचने से रोका जाता है.मौलाना हाशिम अशरफी टेंडर फुट माडल स्कूल चमन गंज  में आल इंडिया गरीब नवाज़ काउन्सिल की ओर से आयोजित जलसे को संबोधित कर रहे थे .अशरफी ने फिरंगियों से लोहा लेने वाले  मौलाना सैयद काफी मुरादाबादी की फांसी का किस्सा याद दिलाते हुए कहा की जब अंग्रेजों ने उन्हें फंदे पर लटकाने की तयारी की तो उनकी ज़बान पर ये शेर था ;;;;

कोई गुल बाक़ी रहे गा न चमन रह  जाये गा 

पर रसूल अल्लाह का दीन ए हसन रह जाये गा 

मौलाना ने आगे कहा की सैयद काफी मुरादाबादी की खबर जब बरेली पहुची तो हज़रत इमाम अहमद राजा बरेलवी ने फरमाया की सैयद काफी का खूने हाशमी वतन पर कुर्बान हो गया ,इसी तरह जब अल्लामा फजले हक खैराबादी ने अंग्रेजों  के खिलाफ फत्वाए जिहाद दिया तो गोरों के पैर उखड गए और वो भागने लगे .मौलाना हाशिम अशर्फी ने कहा की देश की आज़ादी में हिन्दू मुस्लिम सहित सभी धर्मों के लोगों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया था और हम सभी देश भक्तों की इज्ज़त करते हैं .कहा की आज मुसलमानों को देश में किरायेदार समझ लिया गया है ऐसे लोगों की मानसिकता पर चोट करते हुए कहा की वे जान लें की भारत का मुसलमान इस मुल्क में ज़मींदार था है और रहे गा साथ ही मुसलमानों की वफादारी पर शक करने वालों को कहा की वो हमारी वफादारी का सर्टिफिकेट मांगने  की हिमाकत न करें मुस्लिम कौम को अपनी वफादारी किसी के सामने साबित करने की ज़रुरत नहीं .हर मुसलमान अपने दिल में देश भक्ति का जज्बा रखता है और वक़्त पड़ने पर देश के दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए हर दम तयार रहता है .हाशिम अशरफी ने बताया की स्वतंत्रता आन्दोलन में मौलाना अब्दुल जलील ,फैज़ अहमद बदायूनी ,इनायत अहमद काकोरवी ,मुफ़्ती सदरुद्दीन खान,फजले इमाम खैराबादी ,लुत्फुल्लाह अलीगढ़ी ,क़ाज़ी फैज़ुल्लाह काश्मीरी सहित सैकड़ों  उलमा ने अपनी जानो माल को वतन पर कुर्बान किया था जिसे भुलाया नहीं जा सकता और तो और आज़ादी के बाद जब हिन्दुस्तान के लीडर एक जगह बैठे तो कार्यालय के लिए एक मुसलमान ने ही अपना भवन दिया था जिस पर आज भी कांग्रेस का कार्यालय बना हुआ है .जलसे में बोलते हुए अन्य वक्ताओं ने दहशत गर्दी और फिरका परस्ती की कड़े शब्दों में निंदा की .इस से पहले कार्यक्रम की शुरुआत कारी मोहम्मद उस्मान बरकाती ने कुरान की तिलावत से की संचालन शब्बीर कानपुरी ने किया .जलसे में शाह आज़म बरकाती ,हाजी एस एम् जाहिद इरफ़ान ,एस के रिजवान ,हाफिज शहादत  हुसैन बरकाती ,पार्षद अब्दुल जब्बार ,जुबैर वारसी आदि मौजूद थे .

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