Sunday , 2 October 2022
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लखनऊ.मुख़्तार अब्बास नक़वी के ब्यान पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तीखी प्रतिक्रिया

लखनऊ.मुख़्तार अब्बास नक़वी के ब्यान पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तीखी प्रतिक्रिया

lucknow ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने योग, सूर्य नमस्कार और गीता पाठ को लेकर की जा रही  आपत्तियों पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अशोभनीय बयान को गुमराह करने वाला क़रार देते  हुए कहा कि  मज़हब ए इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी और को सजदा जाएज़ नहीं । बोर्ड के प्रवक्ता अब्दुल रहीम कुरैशी ने कहा, ‘योग के आसन ‘ॐ’ शब्द से शुरू होते हैं। हर आसन में कोई ना कोई श्लोक है। सूर्य नमस्कार में सूर्य के आगे सर झुकाया जाता है जो मुसलमान क़तई नहीं कर सकता।  उन्हों ने नक़वी से सीधा सवाल किया की क्या अल्लाह के सिवा किसी और को सजदा किया जा सकता है ?

आगे कहा  की जो लोग इस्लाम में ईमान रखते हैं, वे सिर्फ अल्लाह को  ही सजदा कर सकते हैं। अगर योग को उसकी असल रस्मों के साथ स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा, तो वह अल्लाह के साथ दूसरी चीजों को भी उसके समकक्ष करने के बराबर होगा। यह बहुत बड़ा गुनाह होगा। बोर्ड की आपत्ति केवल इसी बात पर है।’ योग को सिर्फ सेहत तक सीमित रखने और उसे धर्म से ना जोड़ने की अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री नकवी की सलाह पर कुरैशी ने कहा कि यह गुमराह करने वाली बात है, क्योंकि जब योग को स्कूलों में लागू किया जाएगा तो सरकार मुस्लिम बच्चों के परिवारों की धर्म संबंधी आपत्तियों को दरकिनार करके उसे उसके असल रूप में ही लागू करेगी। सरकार इस मुद्दे पर अपना रख क्यों नहीं स्पष्ट करती। उन्होंने कहा, ‘बच्चों के तालीमी इंतजामात को बेहतर बनाने के बजाय उन पर अपनी मजहबी रस्मों को थोपना कतई गैर-मुनासिब है।’

गौरतलब है कि योग, सूर्य नमस्कार और गीता पाठ के मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराए जाने पर नकवी ने कल कहा था कि अज्ञानतावश उठाये गए एक बिना बात के मुद्दे को लेकर मुसलमानों को उनके धार्मिक ठेकेदार ‘गुमराह कर रहे हैं। नकवी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में बोर्ड द्वारा योग का विरोध किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा था, ‘अफसोस की बात है कि बिना बात के मुद्दे के चक्रव्यूह में इस देश के अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों को उनके धार्मिक ठेकेदार फंसा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि यह गुमराह करने का चलन बहुत दिन तक नहीं चलेगा।’

 

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