Monday , 18 December 2017
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मोदी के इकोनॉमिक सर्जिकल स्ट्राइक में फसें शहरवासी

मोदी के इकोनॉमिक सर्जिकल स्ट्राइक में फसें शहरवासी

कानपुर। काले धन पर अंकुश लगाने के लिए भले ही लोग 500 व 1000 की नोट बंद करने का पीएम के कदम को सराहनीय बता रहें हो। लेकिन पहले ही दिन इस सर्जिकल स्ट्राइक से खासे आम जनमानस खासे परेशान रहे। पेट्रोल पम्प से लेकर हॉस्पिटलों तक कंपूवासी इस फैसले के बाद जूझते दिखे। मंगलवार को रात नौ बजे के बाद ज्यों ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने 500 व 1000 की नोटों को चलन से बाहर करने का बयान दिया। उसके बाद से ही इस फैसले से 72 घंटे की छूट के दायरे में पेट्रोल पंपो, हास्पिटलों, रेलवे टिकट घरों में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। आलम यह रहा कि देर रात तक पेट्रोल पंपों में लोग डीजल पेट्रोल भराने के लिए मशक्कत करते रहे और सुबह से ही दोबारा यही हालात बन गए। लोगों की भीड़ इस कदर रही कि शहर के 88 पेट्रोल पंपों में लगभग सभी में नोकझोक हुई। फूलबाग पेट्रोल पंप में तो युवकों व कर्मियों के बीच मारपीट तक हो गई। यही हालात हॉस्पिटलों में रही तीमारदार एडवांस रूपया देने के लिए गुहार लगाते देखे गये। वहीं मेडिकल स्टोरों में दवाइयों के लिए तीमारदार फुटकर न होने के चलते बकाया रूपया भी छोड़ रहे है। रीजेन्सी अस्पताल में कन्नौज के भर्ती मरीज रामकिशन के परिजन सुभाष सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन मंगलवार रात से रूपया लेना बंद कर दिया है और मरीज के इलाज में लापरवाही का भी आरोप लगाया। झकरकटी बस अड्डे में यात्री विनोद दुबे ने बताया कि परिचालक 500 व 1000 की नोट लेने से साफ मना कर रहें है। पीएम के इस फैसले से आम जनता तो खूब हलाकान रही लेकिन कोई भी बड़ा आदमी इस तरह परेशान होता नहीं दिखा।
दैनिक वस्तुओं के लिए मारामारी
सुबह से ही दैनिक वस्तुओं की खरीददारी के लिए लोग फुटकर को लेकर परेशान होते रहे। चाहे वह दूध हो, ब्रेड हो या अन्य खाद्य सामग्री। दुकानदार 500 व 1000 नोट लेने से साफ मना कर रह रहे थे। जिससे बहुत से लोग दैनिक वस्तुएं नहीं ले सके। हालांकि दूध के उत्पादों को इस फैसले से बाहर 72 घंटे के लिए बाहर रखा गया है। इसके बावजूद दूध कंपनिया दुकानदारों से यह नोट लेने से साफ मना कर दिया है।

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