Friday , 1 July 2022
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अटल नहीं  मोदी को मानती है आरएसएस अपना पूर्णकालिक चेहरा

अटल नहीं मोदी को मानती है आरएसएस अपना पूर्णकालिक चेहरा

RSS_meeting_1939ABU OBAIDA  भारत वर्ष आज तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। विघटन कारी ताक़तें  अस्थिरता निर्माण करके देश की एकता और अखंडता पर ही प्रश्न चिन्ह लगाने पर अमादा है।भारत वर्ष की सीमाओं पर प्रतिदिन होने वाली घटनाएं देश की जाती विषमताओं के पूर्व में बोये गए बीज अब वृक्ष बन कर ज़हरीला फल देने लगे हैं  जो सामाजिक ,आर्थिक एवं राजनैतिक उथल पुथल  का नया संकेत दे रहीं हैं/१२०० वर्षों की देश की पराधीनता से उपजी सामाजिक ,मानसिक विकृतियाँ तथा गुलामी की विषमताओं का हल ढूंढते ढूंढते नागपुर का एक युवा क्रांतिकारी डा.केशवराम बलिराम हेडगेवार ने जो पेशे से चिकित्सक थे उन्हों ने  समाज के इस दर्द को समझते हुए विजय दशमी के दिन   सन 1925 को  पांच युवकों की साथ राष्ट्रीय  स्वम्  सेवक संघ की स्थापना की / संघ को  इस दौरान कई बार तत्कालीन सरकारों ने संदेह के घेरे में बिना किसी उचित कारण व सबूत के आधार पर तीन बार प्रतिबन्ध भी लगाया  और इसे सांप्रदायिक संगठन की संज्ञा भी दी गयी परन्तु यह संगठन ८८ वर्षों से राष्ट्र साधना में लीन है/समग्र सोच के साथ अध्यात्म केन्द्रित विकास पूर्ण आदर्श नीति इसकी थाती है /  राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ का स्वरूप आज 2015 तक अपने इन प्रयासों में कितना खरा उतरा है इसका उदाहरण है कि आज सम्पूर्ण भारत में लगभग 55 हजार स्थानों पर लगने वाली उसकी शाखाएं। विदेशों में भी तीन हजार से अधिक शाखाए अनवरत  इस क्रिया से गुजर रही है। महिलाओं के लिए अलग से राष्ट्र सेविकाओं का संगठन स्रजित किया गया है। इस लिए आज का दिन संघ के कार्यकर्ताओं के लिए विशेष मायने रखता है। संघ अपनी स्थापना के साथ ही कांग्रेस का जबरदस्त विरोधी रहा है हालांकि जब जब गैर कांग्रेसी सरकारें सत्ता में आई है तो संघ से जुड़े नेताओं ने बहती गंगा में हाथ धोने में खुद को  कभी पीछे नहीं रखा। मामला चाहें जनता पार्टी सरकार का हो या फिर विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में बनने वाली केंद्रीय सरकार का हो। RSS_AFP_NEWसंघ की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष  रूप से इनके साथ भागीदारी रही है। अपनी इसी सक्रियता के चलते पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पहली बार संघ को केंद्र में एक ऐसी सरकार बनाने का अवसर मिला जिसका नेतृत्व कर्ता संघ का पूर्ण कालिक सदस्य जीवन भर रहा है। नरेन्द्र मोदी नाम का यह शख्स  भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आसीन है उसने संघ के उस सपने को साकार करने का काम किया है जिसकी कल्पना संघ के स्थापक डाॅ हेडगेवार ने की थी। संघ की स्थापना का मूल उदेदश्य वैसे तो बाढ़, सूखा और दैवी आपदाओं से निपटने के लिए किया गया था लेकिन इसके फैलते दायरें में इसके अंदर राजनीति की ऐसी सोच पैदा की जिसकी सच्चाई आज जनता के बीच दिखाई पड़ रही है। संघ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हिन्दू हो या मुसलमान या फिर इसाई। सभी इनकी गतिविधियों से जुड़े है। और भगवा ध्वज को गुरू मानकर गुरूदक्षिणा प्राप्त करते है। यही इनका सबसे बड़ा एक मात्र आर्थिक आधार और राष्ट्रीय पहचान है

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