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दिल्ली .अटल की विरासत को आखिर कब अपनाएं गे मोदी ?

दिल्ली .अटल की विरासत को आखिर कब अपनाएं गे मोदी ?

राजेश मिश्रा .snn दिल्ली/केंद्र में  मनमोहन सिंह की  सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपाई की अस्वस्थता के चलते वेंटिलेटर पर जा चुकी भारतीय जनता पार्टी को नरेन्द्र मोदी ने अपने करिश्माई व्यक्तित्व के चलते  न सिर्फ देश की सर्वोच सत्ता तक पहुचाने का काम किया बल्कि विरोधी दलों की हुलिया भी बैरंग कर दी/ लेकिन इस उप्लाब्धि के साथ भाजपा का चाल चरित्र व चिन्तन का नारा उसके राजनैतिक पटल से एकदम गाएब हो गया और आज संगठन में सिर्फ नमो नमो की धूम मची है/इसके पीछे संघ की भूमिका को प्रभावी माना जा रहा है हालांकि लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद दिल्ली विधान सभा चुनाव में भाजपा को जो करारी शिकस्त मिली उसने न सिर्फ मोदी बल्कि नागपुर में बैठे संघ के आला कमान के भी होश उड़ा दिए/बावजूद इसके मोदी ने हिम्मत नहीं हारी  और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भ्रमण करते हुए अपने आप को एक कुशल राजनेता के रूप में स्थापित करने का कम किया लेकिन बावजूद इसके भजपा का संगठन आज भी वो गति नहीं पकड़ पाया जिसकी लोग उम्मीद कर रहे थे / एक ज़माने में भारतीय जनता पार्टी की नाक का बाल समझे जाने वाले लाल कृष्ण अडवानी ,मुरली मनोहर जोशी ,यशवंत सिन्हा ,शत्रुघ्न सिन्हा जैसे नेताओं को हाशिये पर लाकर खड़ा दिया और इक्का दुक्का नए चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन चलाने की ज़िम्मेदारी सौंप कर मोदी खुद सत्ता के संचालन में व्यस्त हो गए /कुछ ऐसे नेता जिन्हों ने राम जन्म भूमि मुद्दे पर देश प्रदेश में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति में इजाफा करने का काम किया और वह भाजपा के चर्चित चेहरों में जाने पहचाने जाते रहे /भविष्य में ये नेता कहीं मोदी के लिए खतरे की घंटी न बन जाएँ इस बात को भांप कर उन्हे राजभवनों की शोभा बढाने के लिए भेज कर उनका जनता से सीधा संवाद खत्म करने का काम किया/फ़िलहाल बिहार चुनाव भाजपा ही नहीं सीधे  तौर पर नरेन्द्र मोदी के अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुका है/अगर बिहार का हश्र भी दिल्ली जैसा रहा तो मोदी के करिश्माई रंग को उतरते देर नहीं लगे गी और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश पंजाब व असाम के होने वाले चुनाव पर भी पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता /क्यूंकि अब न चाल की वह रफ़्तार है और न ही संगठन में सामूहिक निर्णय का चलन बचा और चिन्तन के नाम पर अगर कुछ भी सीमित है तो वो है नमो नमो का मंत्रोच्चारण/

 

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