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चिड़ियाघर में आने लगे विदेशी मेहमान, साइबेरियन पक्षी 20 नवम्बर तक आएंगे

चिड़ियाघर में आने लगे विदेशी मेहमान, साइबेरियन पक्षी 20 नवम्बर तक आएंगे

कानपुर, 03 नवम्बर । हिमालय पर्वत से उत्तर के क्षेत्र में पारा लुढ़कने से कई देशों के पक्षी भारत की ओर पलायन शुरू कर देते हैं। अब मौसम अनुकूल होते ही विदेशी पक्षियों ने कानपुर प्राणि उद्यान में डेरा जमाना शुरू कर दिया है। सबसे पहले इस बार विदेशी पक्षियों में ओपनबिल्ड स्टॉक और पेंटेड स्टॉक ने अपनी आवाज से प्राणि उद्यान की झील को गूंजायमान कर दिया है। साइबेरियन पक्षियों के 20 नवम्बर तक कानपुर प्राणि उद्यान में पहुंचने की संभावना है। नवम्बर का महीना आते ही कानपुर प्राणि उद्यान में विदेशी पक्षियों ने अपनी दस्तक दे दी है। हर साल नवम्बर के महीने में दूसरे देशों से पलायन करके विदेशी पक्षी कानपुर आते हैं।
जू निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि ज्यादातर पक्षी श्रीलंका, अफ्रीका, साउथईस्ट एशिया व अन्य देशों से प्राणि उद्यान में अपने घरौंदों और वातावरण के अनुकूलता के चलते प्रवास करने चले आते हैं। इन दिनों इन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। साइबेरियन पक्षी के लिए अभी मौसम अनुकूल नहीं है। इसलिए अभी साइबेरियन पक्षी जम्मू कश्मीर के आस-पास इन दिनों विचरण  कर रहें है। संभावना है कि मौसम अनुकूल होते ही 20 नवम्बर तक साइबेरियन पक्षी भी कानपुर प्राणि उद्यान में दस्तक दे देंगे। फिलहाल अभी विदेशी पक्षियों में ओपनबिल्ड स्टॉक और पेंटेड स्टॉक कानपुर प्राणि उद्यान की शोभा बढ़ा रहें है। बताया कि हर वर्ष इन पंक्षियों के आने से प्राणि उद्यान में दर्शकों की संख्या बढ़ जाती है।
निदेशक ने बताया कि जैसे ही कुछ गुलाबी ठंड का मौसम होता है ये पक्षी विदेशों से होते हुए भारत और फिर कानपुर आते हैं। इसमें सबसे अधिक संख्या साइबेरियन पक्षियों की होती है। जो यहां पर आकर अपनी सुविधा के अनुसार घरौंदे और खान-पान की चीजें खोजते हैं ।
कानपुर प्राणि उद्यान के डॉक्टर आरके सिंह ने बताया कि पक्षियों को अनुकूल वातावरण मिलने से हरसाल यहां पर विदेशी पंक्षियों की भरमार रहती है। जो फरवरी तक यहां पर वास करते हैं। चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा. अनिरूद्ध दुबे ने बताया कि साइबेरियन व ओपनबिल्ड स्टॉक आदि पक्षी 20 से 30 डिग्री अधिकतम तापमान में रह सकते हैं। इन दिनों हिमालय के उत्तर के सभी देशों में तापमान इससे काफी नीचे है। उन्होंने बताया कि यह पक्षी अमूमन अपने यहां से अक्टूबर माह के शुरूआती दिनों में ही भारत की ओर पलायन शुरू कर देते है। जैसे-जैसे उत्तर भारत की ओर ठंढ़ बढ़ने लगती है वैसे-वैसे यह पक्षी मैदानी क्षेत्रों की ओर रूख करने लगते हैं।

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