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गरीब नवाज़ के उर्स पर छुट्टी की मांग को लेकर उल्मा का मार्च

गरीब नवाज़ के उर्स पर छुट्टी की मांग को लेकर उल्मा का मार्च

04aabu obaida कानपुर 13 अप्रैल। गरीब नवाज ने अमन का पैगाम दिया, शहंशाहे हिन्दुस्तान जिन्दाबाद, गरीब नवाज का आस्ताना सभी की मुहब्बतों का मरकज़ है, ख्वाजा ख्वाजा कहते हैं, हिन्दुस्तान में रहते हैं, उर्से गरीब नवाज की छुट्टी का ऐलान करो ऐलान करो, गरीब नवाज का आस्ताना कौमी, यकजहती की मिसाल है, गरीब नवाज ने अहिंसा का पैगाम दिया, गरीब नवाज का पैगाम आम करो आम करो, ख्वाजा गरीब नवाज का हिन्दुस्तान जिन्दाबाद, गरीब नवाज हिन्दुस्तान की इज्जत का नाम है, गरीब नवाज भारत की शान है, गरीब नवाज पूरे एशिया का वकार है। ऐसे नारे लिखी तख्तियों के साथ आॅल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल ने 6 रजब उर्से गरीब नवाज की छुट्टी की मांग को लेकर आॅल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल के महामंत्री मौलाना मो0 हाशिम अशरफी व मो0 शाह आजम बरकाती  के नेतृत्व में बांसमण्डी से शांति मार्च निकाला।
इससे पूर्व जश्ने गरीब नवाज के जलसे को बांसमण्डी में सम्बोधित करते हुये आॅल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल के महामंत्री मौलाना मो0 हाशिम अशरफी ने कहा कि हाजा हबीबुल्लाह माता फी हुब्बिल्लाह इसका मतलब है कि यह अल्लाह का महबूब है और अल्लाह की मोहब्बत में इन्तेकाल किया है। जब हजरत ख्वाजा मोईनउद्दीन चिश्ती गरीब नवाज का विसाल हुआ तो अल्लाह के हुक्म से फरिश्तों ने आपकी पेशानी (माथे) पर यह लिख दिया था। याद रहे कि जो अल्लाह का हो जाता है तो पूरी दुनिया उसकी हो जाती है। यही वजह है कि यूरोप एशिया समेत पूरे भारत के लोग आस्ताने गरीब नवाज पर हाजिरी देकर फैज पाते हैं और हजारों लोग सुबहो शाम गरीब नवाज का लंगर खा रहे हैं ऐसे लोग जिनका न घर है न झोपड़ी है न रहने का सहारा है न उनका कोई सरपरस्त है और न कोई उनकी रखवाली करने वाला, हाथ, पैर, दिमाग, आंख हर तरह से बेकार हैं मगर ख्वाजा गरीब नवाज का फैजान है। इन बेसहारा लोगों को खाना, कपड़ा सब चीजें गरीब नवाज के सदके में मिल रही है।
श्री अशरफी ने कुराने पाक की एक आयत पढ़ी जिसका मतलब यह है कि बेशक अल्लाह के वलियों को न कोई खौफ है और न रंजोगम पूरी दुनिया से बेखौफ है इसलिये कि वलियों ने पूरी जिन्दगी अल्लाह के खौफ में गुजारी है तो अल्लाह तआला का खौफ अल्लाह की खसियत लोगों के दिलों पर उतर जाये तो उस सीने पर जहन्नम हराम है। इसलिये वलियों के पैगाम को अपनाने से दुनिया और आखिरत की भलाई है।
इससे पूर्व जलसे की शुरूआत तिलावते कुराने पाक से हाफिज कारी शौकत अली ने की और बारगाहे रिसालत में हाफिज जहीर कानपुरी, माजूर कानपुरी, हाफिज अरशद अशरफी, हाफिज नेमतउल्लाह, हाफिज  गुलाम जिलानी ने नात शरीफ का नजराना पेश किया।
जलसे का संचालन शब्बीर कानपुरी ने किया और आये हुये मेहमानों का शुक्रिया मो0 शाह आजम बरकाती ने अदा किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से मो0 शाह आजम बरकाती,  हाफिज अब्दुल रहीम बहराइची, मास्टर नौशाद मंसूरी, मौलाना मो0 मोइनउददीन अशरफी, आसिफ रईस, हाजी रईस अन्सारी, मौलाना फिरोज आलम, हाफिज खुर्शीद, कारी शम्सउद्दीन, शारिक महफूज आदि लोग उपस्थित थे।

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