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मंगल पाडे ने रोशन की थी क्रांति की मशाल…..

मंगल पाडे ने रोशन की थी क्रांति की मशाल…..

20-07-2013, मेरठ : सन 1857 मेंप्रथम स्वाधीनता संग्राम का आगाज ऐसे ही नहीं हुआ। बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे की बगावत ने आम जनमानस में बसे दासता के भाव को झकझोर कर रख दिया था।
ऐसे भड़की मेरठ में चिंगारी
मेरठ स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य नायक मंगल पांडे बैरकपुर छावनी में शहीद हुए। मेरठ स्थित देशी सेनाओं में असंतोष और जागृति उत्पन्न करने में प्रधान भूमिका मंगल पांडे की ही थी। नौ मार्च 1857 को सर्वप्रथम मातादीन ने ही चर्बी वाले कारतूसों के बारे में बैरकपुर में मंगल पांडे को बताया था। मातादीन को इसकी जानकारी उनकी पत्नी लज्जो ने दी। लज्जो अंग्रेज अफसरों के यहां काम करती थी, जहां उसे यह सुराग मिला कि अंग्रेज गाय की चर्बी वाले कारतूस इस्तेमाल करने जा रहे हैं। मंगल पांडे ने 28 मार्च 1857 को गाय और सूअर की चर्बी वाले नए कारतूस का विरोध करके अंग्रेजों से लोहा लिया। मंगल पांडे को चुनौती के बदले जब आठ अप्रैल को फांसी मिली तो 23 अप्रैल 1857 को मेरठ छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों में रोष पनप चुका था। मातादीन ने यहां के सैनिकों को मंगल पांडे की वीरगाथा के बारे में जानकारी दी तो मंगल पांडे को यहां के सैनिकों ने मुख्य नायक मानते हुए उनमें अंग्रेजों के प्रति गुस्सा भर गया। पहली बार मेरठ में सामूहिक रूप से अंग्रेजों से बदला लेने के लिए सैनिक एकजुट हुए। इसका असर हुआ कि 24 अप्रैल 1857 थर्ड लाइट कैवेलरी रेजीमेंट के 90 कारबाइनर्स पैदल सैनिकों को कमांडर कारमाइक ने कारतूस की ड्रिल करने के आदेश दिए तो सैनिकों ने कारबाइन उठाने से इनकार कर दिया। सैनिकों के रवैये से हैरान अफसरों ने उन पर दबाव बनाया, लेकिन जब गिरफ्तारी की बात आई तो 5 सैनिकों को छोड़कर अन्य गिरफ्तार हुए। 19 जुलाई 1827 को जन्मे मंगल पाडे ब्रिटिश सेना की बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (बीएनआइ) की 34वीं रेजीमेंट के सिपाही थे। सेना की बंगाल इकाई में जब राइफल में नई किस्म के कारतूसों का इस्तेमाल शुरू हुआ, तो गुस्साए मंगल पाडे ने कलकत्ता के बैरकपुर छावनी में 29 मार्च 1857 को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। उनकी ललकार से ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन में खलबली मच गई और इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी।
शहीद द्वार पर गंदगी का ढेर
शहीद मंगल पांडे की जयंती पर भी शुक्रवार को दिल्ली रोड पर शहरी स्मारक के पास गंदगी का ढेर लगा रहा। कैंट बोर्ड व नगर निगम ने सफाई व्यवस्था नहीं की।
जनप्रतिनिधि भूले शहीद की जयंती
कोई भी जनप्रतिनिधि, सामाजिक व स्वयंसेवी संगठन का कार्यकर्ता भी शहीद स्मारक परिसर में स्थित मंगल पांडे की मूर्ति पर किसी ने भी भाव सुमन अर्पित नहीं किए। वह उनकी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करना ही भूल गए। उनकी स्मृति में बनी मंगल पांडे कालोनी में लोग गंदगी आदि समस्या से जूझ रहे हैं। 15 दिन से लगातार वहां के लोग पथ प्रकाश की बदहाली को लेकर नगर आयुक्त महापौर को कह रहे हैं, लेकिन अब तक स्ट्रीट लाइट तक सही नहीं हुई है। Report:- Sanjay Thakur

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