Tuesday , 18 June 2019
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अल्लाह तक पहुंचने का रास्ता रसूल स० अ० व०  का इश्क और सुन्नत है -अशरफी

अल्लाह तक पहुंचने का रास्ता रसूल स० अ० व० का इश्क और सुन्नत है -अशरफी

कानपुर । सरकार गरीब नवाज अलैहिर्रहमा के बचपन ही में विलायत और बुजुर्गी आपकी पेशानी पर प्रतीत हो रही थी जिसे अहले नजर खूब अच्छी तरह समझते थे एक बुजुर्ग तशरीफ ला रहे थे जैसे ही उनकी निगाह ख्वाजा गरीब नवाज पर पड़ी फरमाया मोईनुद्दीन हसन तुम आ गये सलाम और बुजुर्गी के आदाब बजा लाने के बाद बड़े ही आश्चर्यजनक होकर पूछा। आप मुझे   कैसे जानते हैं तो बुजुर्ग ने फरमाया भला हिन्दुस्तान के शहंशाह को कौन नही जानता अच्छा हुआ मुलाकात हो गई कि मैं इसी इन्तिजार में आज तक जी रहा हूं वह बुजुर्ग मर्द कोई दूसरे नहीं बल्कि उन्ही के होने वाले मुर्शिद (पीर) हजरत ख्वाजा उसमान हारवनी अलैहिर्रहमा की मुबारक ज़ात थी जिनके कदमे मुबारक के चूमने ने ख्वाजा के दिल की दुनिया को पलट कर रख दिया। सिर्फ  हिन्दुस्तान के शहंशाह ही नहीं बल्कि पूरे संसार की ख्वाजगी भेंट कर दी। इन ख्यालात का इजहार कौन्सिल के जिला अध्यक्ष मौलाना अलहाज मो0 महताब आलम कादरी मिस्बाही ने आॅल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल के तत्वाधान में आयोजित गरीब नवाज हफ्ता का चैदहवां इजलास परम पुरवा कानपुर में किया।    मौलाना ने कहा कि सिलसिला चिस्तिया की नींव हज़रते अबू इस्हाक शामी अलैहिर्रहमा से पड़ी मगर हिन्दुस्तान में चिश्तिया सिलसिले का ऐसा प्रचार व प्रसार ख्वाजा गरीब नवाज ने किया कि दुनिया फना होने तक इसका नाम रौशन रहेगा और इसका फैजान का मेह बरसता रहेगा। मौलाना फाज़िले बरेलवी फरमाते हैं कि सुल्तानुल हिन्द ख्वाजा मोईनुद्दीन सरकार गरीब का मज़ारे मुबारक वह पवित्र स्थान है जहां हर अच्छी व जाइज दुआ कुबूल होती है। मौलाना ने फरमाया कि एक मोमिन बन्दा की जीवनी उद्देश्य है कि अपने खुदा की सही तौर पर पहचाने। याद रखिये खुदा की मारफत व पहचान का अकेला रास्ता रसूल का इश्क व उसकी सुन्नत है और इसकी प्राप्ति औलिया व सूफिया से दूर होकर सम्भव नहीं।
इजलास के मुख्य अतिथि गाजिए इस्लाम मौलाना मो0 हाशिम अशरफी प्रबन्धक जामिया अशरफुल मदारिस व कौन्सिल के राष्ट्रीय सचिव ने ख्वाजा गरीब नवाज की जीवनी बयान करते हुए फरमाया आपका हिन्दुस्तान में पृथ्वी  राज के शासन काल सन् 587 हिजरी में आगमन हुआ चंूकि ख्वाजा गरीब नवाज अपने पीर मुर्शिद की इजाजत से विदाई लेकर सन् 582-587 हिजरी के मध्य विभिन्न मुल्कों की सैर व सियाहत करते हुए हिन्दुस्तान आये इसके बाद फिर आप कहीं न गये। समाज विरोधी तत्वों के सामने अमन व शान्ति का पैगाम देते रहे। मौलाना ने फरमाया कि ख्वाजा गरीब नवाज कभी झूठ नहीं बोलते। झूठ ऐसा बड़ा गुनाह है जो सारे गुनाहों की मां है मगर आज समाज पर रोना आता है कि वह झूठ जैसे बड़े पाप को बुरा भी नहीं जानता एक बाप घर में रहते हुए दरवाजे पर दस्तक देने वाले को बेटे से कहला भेजता है कि बेटा जाओ कह दो कि अब्बू घर में नहीं हंै। यह खुला झूठ है खुद भी पाप करता है और न समझ बच्चे की भी भागीदार बनाता है। मौलाना ने फरमाया कि मोबाइल समाज में  एक लानत का तौक है। जब वह किसी गन्दे व जरायमपेशा के हाथ में हो।  मगर यही मोबाइल रहमत है जब किसी अच्छे और जरूरत मन्द के हाथ में हो और उसका  प्रयोग सत्य  आवश्यकता मुल्क की उन्नति और समाज के उत्थान व सुधार के लिए हो।

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