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कानपुर।रमज़ान में हाईटेक तुगरों की ज़बरदस्त मांग।

कानपुर।रमज़ान में हाईटेक तुगरों की ज़बरदस्त मांग।

20150710_010349abu obaida .snn एक दो साल पहले तक प्रिंटिंग प्रेस में छपे कागज़ के इस्लामी पोस्टर्स को फ्रेम करा के लोग तुगरो की शक्ल में अपने घरों में बड़े अदब के साथ सजाते थे अब ज़माना हाई टेक हुआ तो तुगरों की शक्ल भी बदल गयी। कागज़ पर छपे इस्लामी पोस्टरों की जगह अब अल्मुनियम ,पीतल और तांबे की चादरोंने ले ली है। मेटल से बानी शीट्स पर अल्लाह ,मोहमद ,या क़ुरआन की पवित्र आयतें डाई  के माध्यम से उकेरी गयीं हैं जो देखने में काफी आकर्षक और टिकाऊ हैं। खासबात ये है की इन्हें फ्रेम भी नहीं कराना पड़ता बस हदया (कीमत )चुकाइये और सीधे अपने घर की दीवारों पर टांग दीजिये।इनकी कीमत आकार के हिसाब से होती है आठ बाई दस के पीतल से बने तुगरे  आम तौर पर पांच सौ में मिल जाते हों और बड़े आकार में कीमत हज़ार से तीन हज़ार तक है।कई तुग़रों में बड़े क़रीने से एल ई डी लाइट्स भी लगाईं गयीं हैं जो अँधेरे में भी तुग़रों में छपी आयतों को साफ़ दर्शाती हैं इनसे निकलने वाली हल्की रौशनी आँखों में चुभती भी नहीं यही कारण है की ऐसे तुगरे लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं।रोजेदारों का कहना है आम तौर पर लोग घरों में ख़ास तौर पर ड्राइंग रूम में पूरी दीवार के आकार की पेंटिंग या सीनरी का पोस्टर लगाते हैं उस से अच्छा है की अल्लाह का नाम घरों में दिखाई दे। कुछ ऐसा ही सोच कर बड़े तुगरे  पसंद करने वाले सिविल लाइंस निवासी हाजी जावेद सिद्दीकी बताते हैं की उन्हों ने इस बार रमज़ान में कई प्रकार के तुगरे लिए हैं कुछ वो अपने घर में लगाएं गए और कुछ पास की मस्जिद में भेजें गे।ऐसे ही ख्यालात बेकनगंज निवासी रईसुद्दीन खान के हैं जो बताते हैं की उन्हों ने कई तुगरे पसंद कर लिए हैं,अपने घर में तो लगाएं गे  साथ ही क़रीबी रिश्तेदारों को भेंट करें गे।बेकनगंज में सर्राफा कारोबारी यासिर  तो इन तुगरों से इतने प्रभावित हैं की उन्हों ने कुछ ही देर में एक दर्जन तुगरे देखते ही देखते हदया कर लिए।

दुकानदार अशरफ ने बताया की यूँ तो इन विशेष तुगरों की बिक्री साल भर होती है लेकिन रमज़ान में इसमें काफी बढ़ोतरी हो जाती है ख़ास बात ये की इन्हे मुसलमानो के साथ गैर मुस्लिम भी बड़ी श्रद्दा से ले जाकर अपने घरों में सजाते हैं।20150710_005726

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