Friday , 24 September 2021
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लाल खून का काला कारोबार कब रुकेगा

लाल खून का काला कारोबार कब रुकेगा

कानपुर। हैलट अस्पताल जहां अपने इलाज के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में मशहूर है तो वहीं जीएसवीएम मेडिकल कालेज अब खून के दलालों के लिए जाना जाने लगा है। इसकी बानगी उस समय देखने को मिली  जब जेएल रोहतगी अस्पताल में एक तीमारदार ने डाक्टरों की मदद से खून के दलालों को पुलिस से पकड़वाया दिया । इनके कब्जे से दो ब्लड बैग मिले  है जिसमे  जीएसवीएम मेडिकल कालेज की हरी व नीली पर्चिया चिपकी है। इससे पहले भी पुलिस इस कालेज से कई दलालों को पकड़कर ब्लड के सौदागारों का भंडाफोड़ कर जेल भेज चुकी है लेकिन फिर भी कालेज  प्रशासन  इन दलालों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाता है। सूत्रों की माने तो इस खून के गोरखधंधे में कालेज के कई अधिकारी व डाक्टर भी शामिल है जिनके चलते कालेज प्रशासन कोई सख्त कारवाई नही कर पाता है।
कालेज के नाम से छपती है डूप्लीकेट रसीदे 
बुधवार को डाक्टरों की  सक्रियता व तीमारदार की बुद्धिमता से जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पर्ची समेत  दो ब्लड बैग पुलिस ने दलालों के पास से बरामद किये  है। पुलिस द्वारा दलालों से सख्ती से पूछतांछ पर दलालों ने खुद की सुरक्षा की बात कहते हुए खून के कई बड़े सौदागारों के  नाम बताए  है  लेकिन पुलिस  कोई सबूत नहीं होने पर उनके खिलाफ  एक्शन नहीं ले पा रही है। वहीं दलालों ने बताया कि खून के इस गोरखधंधे में कालेज के अधिकारी व डाक्टर्स शामिल है। यहा लोग अपने जुगाड़ से ब्लड की एक पर्ची छपवाते है तथा उसी की डुप्लीकेट बनवां लेते है और दलालों को सेटिंग करके इस  ब्लड को बाजार में पांच से छह हजार रुपये में बेचने का काम किया जाता है।
इस गोरखधंधे में है शामिल
दलालों के कब्जे से बरामद किया गए  मोबाइल में पुलिस को  कई अस्पताल व प्राइवेट नर्सिंग होम के डाक्टरों व कर्मचारियों के नंबर मिले है। पुलिस ने जब इनसे पूछां तो उन्होंने बताया कि उन लोगों से इनका कोई लेना देना नहीं है बल्कि ऐसे ही डाक्टरों व कर्मचारियों के नंबर रखे हुए है। पुलिस के माने तो दलालों के पास से डाक्टरों व कर्मचारियों के नंबर मिले है  डिटेल निकलवाई जायेगी।
क्यों नकाराता है कालेज
मेडिकल कालेज में एक बार नहीं बल्कि कई बार खून के सौदागारों को पुलिस व डाक्टरों की टीम ने पकड़ा है। इनके कब्जे से कालेज के नाम की पर्ची व  ब्लड पुलिस ने बरामद किया था  । पुलिस द्वारा कई बार साक्ष्य देने के बाद भी मेडिकल कालेज प्रशासन इसे झूठ बता  देता है जिसके चलते प्रबंधन भी शक के घेरे मंे आ रहा है।

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