Wednesday , 8 December 2021
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कानपुर/हिन्दू धर्मग्रन्थ मांसाहार की अनुमति देते हैं —आल इंडिया सुन्नी उलमा काउन्सिल

कानपुर/हिन्दू धर्मग्रन्थ मांसाहार की अनुमति देते हैं —आल इंडिया सुन्नी उलमा काउन्सिल

dadri-5610f504d07b5_exlstabu obaida कानपुर/ आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउन्सिल ने दादरी में हुई अखलाक की ह्त्या की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा की मांस खाने के नाम पर फैलाई जा रही नफरत की आग शोले में तब्दील होने से पहले उस पर देश के बुद्धिजीवियों को काबू करना होगा/ तलाक मोहाल स्थित मोहम्मदी मस्जिस के इमाम मौलाना अब्दुर्रहीम कादरी की  अध्यक्षता में आज हुई एक बैठक में बोलते हुए आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउन्सिल के महामंत्री हाजी सलीस ने कहा की जिन लोगों ने दादरी में गौमांस खाने की अफवाह उड़ा कर एक मुसलमान को शहीद कर दिया वे ज़रा अपने धर्म ग्रंथों का अध्यन कर लें तो उन्हें पता चल जाये गा की हिन्दू धार्मिक पुस्तकों में भी मांस खाने का वर्णन है/सलीस ने आगे कहा की ठेक है भारत के एक बड़े हिस्से में गौ ह्त्या पर पाबंदी है जिसका सम्मान करते हुए लगभग सभी मुसलमान गाय  को नहीं खाते जब की वो उनके लिए हलाल है /सलीस ने देश भर की सभी मुस्लिम तंजीमों की दादरी मामले में ख़ामोशी पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा की ,मुस्लिम मजलिस मशवरत ,जमीयतुल उलमा या जमाते इस्लामी व पर्सनल लॉ बोर्ड सहित सबकी मुजरिमाना खामोशी मुसलमानों के खिलाफ हिंसक वारदातों को अंजाम देने वालों को बल प्रदान कर रहे हैं ,हाजी ने कहा की देश भर से सियासी संगठनों के दर्जनों लोग दादरी जा कर पीड़ित परिवार से मिले लेकिन अफ़सोस की कोई मुस्लिम तंजीम वहां नहीं गयी /अपने संबोधन में सलीस  ने कहा की जो हिन्दू भाई मांसाहार के नाम पर मासूम इंसानों को मार चुके या मारने  का इरादा रखते हैं  वो ;;मनुस्मृति के अध्याय ५ सूत्र ३० में पढ़ें ;;; ‘’वह जो मांस खाते हैं जो खाने योग्य है कोई अपराध नहीं ‘’’क्यूंकि स्वम् ईश्वर ने कुछ को खाने और कुछ को खाए जाने के लिए पैदा किया है /आगे सूत्र  ३२ में वर्णन है की ‘’’मांस खाना बलिदान के लिए उचित है ,इसे देवी प्रथा के अनुसार देवताओं का नियम कहा जाता है /AKHLAQ

इसी प्रकार   महाभारत के अनुशासन पर्व अध्याय ८८ में धर्मराज युधिष्ठिर और भीष्म पितामह के मध्य वार्तालाप का उल्लेख किया गया की कौन सा भोजन पूर्वजों को शान्ति पहुचाने हेतु उनके श्राद्ध के समय दान करना करना चाहिय ‘’उसमे सीसम बीज,चावल ,बाजरा ,मांस ,पानी ,जड़,और फल भेंट किया जाये और गौमांस से पूर्वजों को पूरे एक वर्ष तक शान्ति रहती है जब की  एक बड़े बैल के मांस से बारह वर्ष तक शांति रहती है ;;;;

उपरोक्त हवाले हाजी सलीस के अनुसार हिन्दू  पवित्र धर्म ग्रंथों से लिए गए है जिन में मांसाहार का ज़िक्र है और इसी को आधार बना कर सुन्नी उलेमा काउन्सिल ने हिदू भाइयों से सवाल किया की क्या दादरी की घटना को अंजाम देने वालों ने धर्म के अनुसार काम  किया ?

सलीस अहमद ने कहा की वह बड़े अदब के साथ सभी हिन्दू मुसलमानों से अपील करते है की वह अपनी धार्मिक पुस्तकों में लिखी बातों को ध्यान से पढ़ें और उस पर अमल करें तो कभी कहीं फसाद नहीं होगा/ उन्हों ने कहा की मौत का यह घिनौना खेल सियासत दान खेल रहे हैं जिनकी  हाथों का खिलौना कम पढे लिखे या धर्मांध आसानी से बन जाते हैं /सलीस ने शान्ति और त्याग की भावना रखने वाले हिन्दू भाइयों से आगे आकर इस गंभीर मुद्दे को नफरत में बदलने से रोकने की अपील भी की /सलीस ने कहा की आज लीडर शिप की कमी से मुसलमानों का देश में बुरा हाल है/ सलीस कहते है की धार्मिक ग्रंथों का हवाला देने का मकसद समाज को जागरूक करना है न की किसी की भावनाओं को आहत करना/कहा की जिस भाई को मेरे बयान पर आपत्ति हो वह पहले ठंडे दिल से अपने उन ग्रंथों  का अध्यन कर ले जिनके हवाले से उन्हों ने मांस खाने की बात कही/

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