Saturday , 25 September 2021
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शहीदे आज़म हज़रत उमर की याद में जलसा  

शहीदे आज़म हज़रत उमर की याद में जलसा  

कानपुर/ आज पहली मुहर्रम को कर्नल गंज स्थित बरगद वाला मैदान में शहीदे आज़म सैयदना हज़रत उमर फारूक (रजी) की शहादत के मौके पर अल्फलाह एजुकेशनल सोसाइटी के बैनर तले एक जलसे का आयोजन किया गया /जलसे का आगाज़ कारी इकबाल अहमद ने कुरान की तिलावत के साथ किया /इस अवसर पर मुख्य अतिथि शहर काजी आलम रज़ा खान नूरी ने दुसरे खलीफा हज़रात उमर की ज़िन्दगी पर रौशनी डालते हुए कहा की ,उमर का रूतबा इतना बुलंद है की प्यारे नबी हजरत मोहम्मद साहब ने कहा था की मेरे बाद अगर कोई नबी होता तो वह उमर होते /काजी साहब ने कहा की अपने दौरे खिलाफत में हज़रत उमर रजी अल्लाहोतालाअंहो मदीने की गलियों में रात को छुप छुप कर  गश्त करते थे और अपनी जनता के दुःख दर्द को सुन कर सवेरे उसका निदान करते थे /उन्हों ने कहा की खलीफा उमर इंसाफ ,इमानदारी ,बहादुरी और अपने कुशल शासन के लिए जाने जाते हैं उनके दौर में इस्लाम का परचम दुनिया के कोने कोने में पहराया /आलम राजा नूरी ने बताया की हजरते उमर ने फ़ौज की ट्रेनिंग ,बैंकिंग कार्य प्रणाली (उस दौर के अनुसार) पर विशेष ध्यान दिया जिस से तत्कालीन फौजी सिस्टम में सुधार आया और अनुशासन कायम हुआ/ हजरत उमर ने दस साल ६ माह और ४ दिन खिलाफत (राज) किया और इस बीच इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए दिन रात मेहनत की / शहर काजी ने आगे कहा की उमर खौफे खुदा के चलते हर समय अल्लाह से दुआ करते थे की उनसे कभी कोई  गलती न हो और जब मोहम्मद साहब ने उन्हें जन्नती होने की बशारत दी तो इतना रोये की आँखों के नीचे निशान बन गए /जलसे में शाह आज़म बरकाती आदि मौजूद थे /

 

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