Thursday , 28 October 2021
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रेल कर्मी ने मासूम बच्ची को मौत के मुंह से बचाया -माता पिता फ़ेंक गए थे नाले में

रेल कर्मी ने मासूम बच्ची को मौत के मुंह से बचाया -माता पिता फ़ेंक गए थे नाले में

कानपुर। हुकूमतें लाख कोशिशें करें लेकिन 21वीं सदी में आज भी बेटियों हमारे देश में बोझ मानी जाती  है। कलयुगी मां-बाप अपनी बेटियों को कोख में मार रहे हैं या बच्चियों को मरने के लिए लावारिस छोड़ देते हैं। ऐसा ही मामला रविवार को कानपुर के रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। नौ साल की एक बच्ची को उसके मां-बाप मरने के लिए गंदे नाले में फेंक गए। वहां से गुजर रहे प्राइवेट लाइनमैनकी गड्ढे में नजर पड़़ी तो उसका कलेजा कांप गया। उसने तुरंत बच्ची को नाले  से निकालकर एम्बुलेंस व पुलिस को सूचना दी। दहशतज़दा बच्ची सिर्फ इतना ही बता पायी कि  उसके माँ बाप उसे नाले में फ़ेंक कर चले गए।
प्राइवेट लाइनमैन सुखराम रोज की तरह रविवार को भी किसी काम से रेलवे स्टेशन के पास से गुजर रहे थे कि उनको अचानक एक गंदे गड्ढे जहां सुअरों का डेरा रहता है वहां से एक आवाज सुनाई दी। पास जाकर उन्होंने देखा तो एक नौ साल की बच्ची उसमें डूब रही थी। उन्होंने तुरंत बच्ची को गड्ढे से निकाला और पुलिस को मामले की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को तुरंत एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया। बच्ची के होश में आने पर वह अपने बारे में कुछ बता नहीं पा रही है बस इतना कहती है अम्मा बाबू गड्ढे में फेंक गए हैं। बच्ची की इस हालात को देखकर वहां मौजूद सभी की आंखें भर आई। लोग उसके मां बाप को कोस रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर सुखराम की प्रशंसा भी कर रहे हैं। वहीं जीआरपी का कहना है कि बच्ची के माता पिता की तलाश की जा रही है। हो सकता है बच्ची आसपास की रहने वाली हो और खेलते खेलते गड्ढे में गिर गई हो। परिवार के मिलने पर ही सही जानकारी हो पायेगी, सभी बिंदुओं पर पड़ताल की जा रही है।
बेटी को दूंगा अपना नाम
सुखराम ने बड़ा दिल दिखाते हुए उस बच्ची को अपनाने की बात कही है। सुखराम के पहले से ही पांच बेटी व पांच बेटे हैं। वे कहते हैं कि उनकी इतनी इनकम नहीं है फिर भी वह उस बच्ची को अपनी पांचों बेटियों की तरह प्यार देना चाहते हैं। उसकी पत्नी ने भी सुखराम के इस फैसले पर खुशी जताई है। उसका कहना है कि बेटियों को बोझ नहीं भगवान की इबादत समझना चाहिए। सुखराम बच्ची के साथ ही अस्पताल आए और पिता की तरह जब तक बच्ची होश में नहीं आ गई वह बेचैन होकर इधर उधर टहलते रहे। सुखराम व उसकी पत्नी बच्ची की देखभाल कर रहे हैं।
सबने दिखाई मानवता
बच्ची की नाजुक हालत देखकर वहां मौजूद डॉक्टरों व स्टाफ नर्सों ने उसके इलाज में कोई कोस कसर नहीं छोड़ी। हर किसी ने उसे अपनी बच्ची की तरह प्यार किया। नर्सों ने उसे अपने हाथ से फल व दूध पिलाया तो वहीं डॉक्टरों ने भी थोड़ी थोड़ी देर में उसका हालचाल पूछा। बच्ची को साथ लाए पुलिस वाले भी होश में आने के बाद बच्ची को लाड़-प्यार करते रहे।

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