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औलिया व सूफिया की तालीमात को आम करना वक्त की अहम जरूरत- मौलाना हाशिम अशरफी

औलिया व सूफिया की तालीमात को आम करना वक्त की अहम जरूरत- मौलाना हाशिम अशरफी

01aabu obaida 98380 33331 कानपुर । शहंशाहे हिन्दुस्तान सरकार ख्वाजा गरीब नवाज हजरत सय्यदना ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती हसन सनजरी रजिअल्लाहो तआला अनहो की बुलन्द पाया जात से दुनिया को पहचान करानाचिराग दिखाने जैसा है। सरकार गरीब नवाज की पैदाईश सन् 530 हिजरी स्थान सनजर, सीसतान के इलाके में एक विलायत और नूर के खानदान में हुई। हमारे प्यारे ख्वाजा अलैहे रहमा के वालिदेमोहतरम हजरत ख्वाजा सैयद गयासुद्दीन अपने दौर के निहायत नेक, परहेजगार और उस जमाने के वली थे। हमारे ख्वाजा की उम्र शरीफ लगभग चौदह साल की थी कि आपका देहान्त हो गया। आपकीवालदा हजरत सैयदा माहेनूर रजिअल्लाहो अनहा इबादत गुजार थीं। आप फरमाती हैं कि जब मोईनुद्दीन हसन मेरे पेट में थे तो बड़े अजीबो गरीब और अच्छे सपने देखा करती थीं मेरे घर में बड़ी बरकतथी। मेरे दुश्मन भी दोस्त बन गये थे। पैदाईश के वक्त मेरा सारा घर खुदा के नूर से रोशन हो चुका था। सरकार गरीब नवाज हसनी-हुसैनी सैयद और गौसे आजम अब्दुल कादिर जीलानी रजिअल्लाहोअनहो के खाला जात भाई हैं। इन ख्यालात का इजहार जश्ने गरीब नवाज ऑल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल के तत्वाधान में जश्ने गरीब नवाज हफ्ता के आयोजित शानदार जलसे में मस्जिद बशीरस्टेट रोड चीना पार्क के पास हजरत मौलाना महताब आलम कादरी मिस्बाही सदर ऑल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल में किया। मौलाना ने कहा कि इस जमाने में अल्लाह के वलियों के पैगामात औरउनकी तालीमात को आम करने की सख्त जरूरत है।

जश्ने गरीब नवाज के खुसूसी मेहमान गाजी इस्लाम हजरत मौलाना मो0 हाशिम अशरफी साहब राष्ट्रीय जनरल सेक्रेट्री ऑल इण्डिया गरीब नवाज कौन्सिल ने सुल्तानुल हिन्द सरकार गरीबनवाज हजरत मोईनुद्दीन चिश्ती हसन सनजरी अलैहिर्रहमा के फजायल और बुजुर्गी पर तफसीली गुफतुगू करते हए फरमाया कि दुनियावी राजाओं का हाल यह है कि वह सिर्फ मुल्क में बसने वालेअपनी रिआयों पर हुकूमत करते हैं मगर हिन्दुस्तान के राजा हम गुलामों के ख्वाजा न सिर्फ जाहिरी इन्सानों पर हुकूमत फरमाते है बल्कि जिस्मों से ज्यादा लोगों के दिलों पर उनकी हुकूमत है। यहीनहीं बल्कि देव, परी, जिन, जिन्नात पर भी हुकूमत करते हैं। पेड़, पौधे जान और बेजान चीजों पर भी आपकी हुक्मरानी है। जमाना जानता है कि अना सागर झील जो किस कदर लम्बा और चौड़ा है वहभी अपनी गुलामी का सूबूत देता है। सरकारे ख्वाजा का हुक्म पाते ही मचल उठता है। और खुद को एक छोटे से प्याले में खुद को समो लेता है और हाजि होकर कदम बोस हो जाता है। मै पूछता हूं किअना सागर झील का पानी जान वाला है नही वह एक बेजान चीज है उसमें सुनने की कुव्वत नही है। इसके बावजूद उस पानी पर भी हमारे ख्वाजा गरीब नवाज की हुकूमत है।

मौलाना अशरफी ने कहा कि सरकार गरीब नवाज अलैहिर्रहमा की पाकीजा जिन्दगी और उनकी तालीमात बेशक इन्सानों के लिए एक नमूना है। जरूरत है कि उन्हें इस्तेमाल किया जाये नजाने कितने रास्ते से भटके हुए लोग आपकी सूरत और सीरत से हिदायत पा गये। माना कि सरकार गरीब नवाज जाहिरी सूरत में हमारे दरमियान नही मगर आज भी अजमेर शरीफ में आपकी मजारेमुबारक से फैज पहुंचने का सिलसिला जारी है और कयामत तक यह सिलसिला खत्म न होगा।

बज्म का प्रारम्भ कुरआन पाक की तिलावत से मौलाना मकसूद आलम ने किया और बारगाह रिसालत मआब सल्लललाहो अलैहे वसल्लम में हजरत हाफिजो कारी इकबाल बेग कादरी, मो0आजम नूरी, कारी तैयब रजवी, मौलाना अब्दुल कादिर अशरफी ने अकीदत का नजराना पेश किया। जबकि बज्म की सदारत मुफ्ती नजमुद्दीन कादरी साहब ने की और जलसे का संचालन मोहम्मदशब्बीर कानपुरी ने अंजाम दिया। जलसे का समापन मुफ्ती साहब की दुआ सलातो सलाम और मिष्ठान के वितरण पर हुआ। इस मौके पर शहर के दूसरे उलमा मौलाना सैयद मोहम्मद अकमलअशरफी  मौलाना गुलाम हसन चिश्ती  मौलाना सना उल्ला हनफी मौलाना मोईनुद्दीन अशरफी  हाफिज मोहम्मद मिनहाज कादरी  हाफिज मोहम्मद नियाज अशरफी, सैयद शफात अली, मोहम्मदशाह आजम बरकाती  मास्टर इकबाल नूरी  मोहम्मद वसीम   मोहम्मद हशमत अली नूरी आदि मौजूद थे।

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