Saturday , 25 September 2021
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क्या कानपुर का गोधरा है परेड ग्राउंड की आग

क्या कानपुर का गोधरा है परेड ग्राउंड की आग

abu obaida कानपुर।शनिवार तड़के चार बजे परेड ग्राउंड में लगी भीषण आग का रहस्य क्या कभी खुल पायेगा क्या कभी यह पता चल सके गा कि परेड ग्राउंड स्थित नवीन मार्केट साइड की दुकानों में ही आग क्यों लगती है।पिछले १२ साल में ६ बार मार्केट में लगी आग की जगह तरीका और समय एक ही क्यों रहता है यह सवाल अब लोगों में मन में अंदर ही अंदर आक्रोश का कारण बनता जारहा है लोग खुले आम  प्रशासन और एक दुसरे से सवाल पूछ रहे है कि आग हमेशा नवीन मार्केट साइड की दुकानों में ही क्यों लगती है और परेड ग्राउंड के दुसरे छोर यानी  नारायणी धर्मशाला की ओर क्यों नहीं लगती क्या इसलिए कि  नारायणी धर्मशाला की तरफ अल्पसंख्यक समुदाय की दुकाने नहीं हैं।सवाल उठ रहे हैं कि हमेशा ही मार्केट एक साथ क्यों धधकती है जब की आम तौर पर आग किसी एक जगह से शुरू होती है और आगे बढ़ते बढ़ते विकराल रूप  धारण करती है लेकिन यहाँ ऐसा नहीं होता ।प्रत्यक्ष दर्शी बताते हैं कि जब भी आग दिखती है तो शोले एक सिरे से दुसरे सिरे तक बराबर दिखते हैं कभी किसी ने यह नहीं कहा कि आग एक  सिरे से शुरू हुई और दुसरे सिरे तक फैलती चली गयी यानि आग पूरी मार्केट में एक साथ लगती है ।जिला प्रशासन भी हर अग्निकांड के बाद जाँच तो करवाता है लेकिन आग लगने का सही कारण कभी नहीं बता सका। मामला गरीब दुकानदारों का है इसलिए भी शायद कोई फारेंसिक जांच  नहीं होती जिस से पता चल सके कि आग पेट्रोल से लगी या किसी केमिकल से लगी खुद लगी या किसी साज़िश के तहत लगाई गयी।
   हर बार परेड ग्राउंड में  आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड ज़िम्मेदारी से आकर आग बुझाती है जिला प्रशासन आकर मुआयना करता है नेता बुझी हुई राख में अपना वोट भविष्य देखते हैं और कथित समाजिक संगठन घड़ियाली आंसू बहाते हुए अधिकारियों के बगल में खड़े होकर अखबारों को अपने पोज़ देते दिखते हैं।अखबारों को फोटोसेशन देने के बाद यह नेता और सामाजिक संगठन अगली घटना तक दिखाई भी नहीं देते। नतीजे में आग की लपटों में अपना सब कुछ गंवा चुका बेबस लाचार और ग़मज़दा दुकानदार तिनका तिनका जोड़ कर फिर किसी तरह अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश करता है। ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाता और फिर जल या जला दिया जाता है।
इस से पहले हुए अग्निकांड में भी साज़िश की बात उठी थी लेकिन वह आवाज़  इस बार हुए अग्नि काण्ड तक किसी को सुनाई नहीं दी लेकिन इस बार शायद ऐसा न हो क्योंकि अब कई सियासी दल खुल कर  दुकानदारों के पक्ष में सामने आचुके हैं और जिलाप्रशासन से घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।जांच सही ढंग से न होने पर आंदोलन तक की चेतावनी दे चुके हैं। कानपुर के लोग अब इस अग्निकांड को गोधरा से जोड़ कर देख रहे हैं और इसे कानपुर का गोधरा कहने लगे हैं।दुकानदारों की माने तो यह आग किसी बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े से नहीं लगती बल्कि बड़े पैमाने पर साज़िश के तहत पेट्रोल या किसी अन्य केमिकल को पूरी मार्केट में छिड़क कर एक साथ लगाई जाती है। तभी तो एक सिरे से दुसरे सिरे तक एक साथ शोले भड़कते हैं और किसी को अपना सामान निकालने के लिए एक मिंट का समय भी नहीं मिलता।दुकानदार कहते हैं कि मार्केट के ठीक सामने पुलिस चौकी है जिसमे दिन रात सिपाही ड्यूटी पर रहते हैं और दमकल को सोचना दे सकते हैं।  मार्केट से कुछ ही दूरी पर कर्नल गंज और लाटूश रोड फायर स्टेशन है जहाँ से दमकल की गाड़ियां दो से तीन मिंट में पहुँच सकती हैं। गाड़ियां पहुँचती भी हैं लेकिन उनके पास बचाने के लिए कुछ नहीं होता सिवा बुझाने के

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