Wednesday , 27 October 2021
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हिंदी  जानने वालों के लिए हिन्दुस्तानी फेसबुक -संचालन  कानपुर आईआईटी से

हिंदी जानने वालों के लिए हिन्दुस्तानी फेसबुक -संचालन कानपुर आईआईटी से

कानपुर। आईआईटी कानपुर में सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक का भारतीय वर्जन तैयार किया जा चुका  है।  शब्द नगरी  नामक इस साइट को आईआईटी  मुम्बई के एक पूर्व छात्र ने अपने साथियों की मदद से तैयार किया है और अब इसे आईआईटी कानपुर से संचालित किया जा रहा है। भले ही यह साइट फेसबुक से प्रेरित हो  लेकिन उसकी हूबहू नकल बिल्कुल नहीं।
फेसबुक का इस्तेमाल करने वाले हिन्दी भाषियों को अक्सर असहज होना पड़ता है। इसकी वजह है कि इस सोशल साइट की अधिकृत भाषा अंग्रेजी है। हिन्दी लिखना बेहद मुश्किल होने के कारण अधिकांश हिन्दी वाक्य रोमन लिपि में  लिखे जाते हैं। इस मुश्किल से निजात दिलाने  के  लिये आईआईटी के पूर्व छात्रों ने फेसबुक जैसी सोशल साईट बनायी है जहां हिन्दी में अपने विचार व्यक्त करना और  अपना ब्लाग बनाना या लेख लिखना बेहद आसान है। इस साईट का नाम रखा गया है ‘शब्द नगरी‘। ‘शब्द नगरी‘ के जनक अमितेश मिश्रा ने बताया कि इसके इस्तेमाल से हिंदी भाषियों को एक दुसरे से जुड़ना बेहद आसान हो जाएगा।
सन् 2007 में आईआईटी  मुम्बई से बीटेक करने वाले अमितेश मिश्रा ने अपने कैरियर की शुरूआत नौकरी से की लेकिन मन में कुछ अलग करने का जज़्बा था इसलिए  उन्होंने आईआईटी  कानपुर के सिडबी इनोवेशन सेंटर में अपनी कम्पनी खोली। सिडबी ने उन्हें 25 लाख रूपये की आर्थिक सहायता  की तो उन्होंने ‘शब्द नगरी‘ साईट को कड़ी मेहनत के बाद इजाद किया। आज यह एक ऐसी इंटरनेट सेवा बन चुकी है जो हिन्दी में मौलिक विचारों को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने बताया कि फेसबुक की तरह  शब्द नगरी  में कोई भी  व्यक्ति अपना एकाउण्ट बना सकता है और अपने साथ अपनी अभिरूचि के लोगों को जोड़कर उनसे अपने विचार व लेख आदि साझा कर सकता है। यही नहीं  शब्द नगरी  मित्रों और प्रसिद्ध रचनाकारों से जुड़ने और उन तक अपनी रचनाएँ पहुॅचाने का सशक्त जरिया बन रही है। इस पर प्रसिद्ध रचनाकारों को लाइक करने और उनके नेटवर्क से जुड़ कर उनकी रचनाओं से लाभान्वित होने के अवसर भी मिलते हैं। इसके अतिरिक्त शब्द नगरी के यूजर्स लेखकों के आयामों पर लिखने की अनुमति भी मांग सकते हैं।
बिजनेस विश्लेषक प्रियंका के अनुसार भारत में लगभग 65 करोड़ हिन्दी भाषी रहते हंै और इनमें से 15 करोड़ किसी न किसी इण्टरनेट सोशल साइट का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब आईआईटी के ये पूर्व छात्र  शब्द नगरी  को उन तक पहुॅचाना चाहते हैं ताकि उन्हें अंग्रेजी के जंजाल से मुक्ति  मिल सके। इस बेवसाइट पर सभी सेवाऐं पूरी तरह निःशुल्क हैं। हिन्दी का आॅन स्क्रीन की बोर्ड उन लोगों को और भी सुविधा देता है जिन्हें अंग्रेजी वर्णमाला का जरा भी ज्ञान नहीं है। हिन्दी की-बोर्ड के कारण इस साइट का इस्तेमाल ग्रामीण अंचलों में अधिक होने की उम्मीद की जा रही है।

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