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मुस्लिम क्षेत्रों में कभी भी हो सकता है दंगा

मुस्लिम क्षेत्रों में कभी भी हो सकता है दंगा

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पटाखों से घायल अपने जले हुए कपड़े दिखाते हुए

abu obaida कानपुर। बेकन गंज चमनगंज बांसमंडी परेड व नाला  रोड रजबी रोड आदि क्षेत्रों में बने शादी हाल कभी भी किसी बड़े दंगे का कारण बन सकते हैं। वजह होगी यहां होने वाली अन्धाधुन्द हर्ष फायरिंग और तेज़ आवाज़ वाली ज़मीनी व आसमानी आतिशबाजी। ऊपर जिन मोहल्लों का ज़िक्र किया गया है वहाँ घनी बस्ती है और इन बस्तियों में एक दर्जन से अधिक शादी हाल हैं जिनमे रोज़ बारातें आती हैं। बरातों में आये बाराती बैंड की धुन और शराब के खुमार में डूब कर सरेआम लाइसेंसी व गैर लाइसेंसी असलहों से फायरिंग करते हैं जिस से इलाकों में दहशत फैल जाती है। फायरिंग के साथ अधिकतर बरातों में आतिशबाज एक एक घंटे तक आतिशबाजी का प्रदर्शन करते हैं। इनमे ज़मीन पर फोड़े जाने वाले तेज़ आवाज़ वाले सुतली बम कानो के परदे पहाड़ देते हैं साथ ही हज़ारों पटाखों की चटाई बिछा कर जब आग लगती है तो पूरा इलाका युद्ध का मैदान दिखने लगता है।और यह सब रूपम चौराहा स्थित रूपम मैरिज हाल एहसान मैरिज हाल चमन गंज स्थित गुलशन मैरिज हाल व हलीम कालेज ग्राउंड के बाहर वाली संकरी रोडों पर होता है। जिन जगहों पर उपरोक्त हाल स्थित हैं वहाँ अगल बगल रिहाइशी मकान हैं जिनमे रहने वाले शादी वाले दिन सहमे रहते हैं।आज कल बारातें  देर से उठाने का चलन शुरू होगया है जिसमे अधिकतर बरतें रात ग्यारह बजे के बाद समारोह स्थल पर पहुँचती है और यह समय आम लोगों के सोने का होता है लेकिन बारात  के साथ आए बैंड के शोर व आतिशबाजी के तेज़ धमाके लोगों की नींद हराम कर देते हैं।जिस से इन शादी हालों के आसपास रहने वाले न सिर्फ बीमार रहनेलगे हैं बल्कि उनकी सुनने की शक्ति पर असर पड़ने लगा है और लोग अक्सर ज़रुरत से ज़्यादा तेज़ आवाज़ में बोलने के आदि होगये हैं। बारात में आये लोगों को यह भी ख्याल नहीं रहता कि किसी घर में दिल के मरीज़ आराम कर रहे होंगे या उन्हें इन धमाकों से तकलीफ होगी।

मुस्लिम क्षेत्रों में पुलिस नहीं करती कोई कार्रवाई
आम तौर पर रात ११ बजे के बाद तेज़ आवाज़ में बैंड बाज या डीजे बजाने  की इजाज़त नहीं माल रोड सिविल लाइंस व अन्य पाश इलाकों में शादी हाल वाले लाउडस्पीकर नहीं बजने देते साथ ही वहां पुलिस भी अपनी निगाह रखती है लेकिन कानपूर के मुस्लिम क्षेत्रों में पुलिस की उदासीनता या लापरवाही के चलते कोई क़ानून नहीं चलता और रात हो या दिन जिसको जितनी आतिश बाज़ी करनी है वो करता है जिसे जितने फायर करने हैं करता है और पुलिस किसी भी बारात  में बज रहे बैंड या आतिशबाजी को न तो देखती है न रोकती है नतीजे में बाराती खुल कर अरमान निकलते हैं।इस अरमान निकालने  के चक्कर में अक्सर लोग हर्ष फायरिंग का शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं।एक ज़माना था कि लोग बारात देखने के लिए अपने घरों की खिड़कियों से झांकते थे और डांस का  मज़ा लेते थे अब हालात यह हैं कि दूर से ही बैंड की आवाज़ सुन कर लोग अपने घरों की खिड़कियाँ बंद कर बच्चों को पीछे के कमरे में ले जाते हैं और जंगली बारातियों के गुज़र जाने के बाद ही राहत की सांस लेते हैं।
संडे की रात चली जाती कई जानें 
ताज़ा मामला रविवार रात २ बजकर 45 का है जब कर्नल गंज निवासी करीमुल्लाह की बेटी की विदाई रूपम मैरिज हाल से हो रही थी तभी बारात को विदा करा रहे दूल्हा पक्ष ने कई राउंड हवा में फायर किये फिर एक युवक ने ताबड़तोड़ सुतली बम वाले पटाके फोड़े। इस बीच दूल्हा दुल्हन कार में बैठे आतिशबाजी का मज़ा लेते रहे। इतने से दिल नहीं भरा तो एक सज्जन हवा में फटने वाले मल्टी रॉकेट का डब्बा ले आये और उसमे आग लगा दी जिस से दनादन रॉकेट आवाज़ के सात रौशनी की खूबसूरत छटा बिखेरते रहे।एक डब्बा फोड़ने के बाद शादी का अरमान निकाल रहे युवक ने दुसरे डब्बे के पलीते में जैसे ही आग लगाई रॉकेट का डब्बा ज़मीन पर औंध गया और उसमे से रॉकेट निकल कर दनादन लोगों के शरीर पर आकर फटने  लगे जिस से क्षेत्र में भगदड़ मच गयी और कई लोग घायल होगये। गनीमत यह रही कि कोई रॉकेट किसी के चेहरे पर नहीं लगा वर्ना किसी को कोई गम्भीर चोट आ सकती थी यहां तक कि लोगों की आँखें  तक फूट सकती थीं।आनन फानन हुए इस हादसे से लोग आक्रोशित होगये और देखते ही देखते वहाँ सैकड़ों की भीड़ जमा होगयी।  बेकन गंज थाने से पुलिस पहुंची और लोगों के जले हुए कपडे देखे।लोगों ने पुलिस को वह कुर्सी भी दिखाई जिसमे रॉकेट से छेद हुआ था।आक्रोशित लोग तुरंत शादी हाल को बंद करने और वहाँ तोड़फोड़ करने पर उतर आये जिसे पुलिस ने बड़ी मशक्कत से समझा कर शांत कराया। घटना  में कांग्रेसी नेता इरफ़ान जाहिदी चमड़ा व्यवसायी साहेब ए आलम उर्दू अखबार के मालिक राशिद इल्मी कपड़ा व्यापारी मन्नू सहित एक दर्जन लोग रॉकेट से जलने व भगदड़ में गिरने से घायल होगये।घायलों के साथ अन्य लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन घनी बस्तियों में रात ११ बजे के बाद बैंड बाजे पर रोक लगाई जाए और आतिशबाजी को पूरी तरह प्रतिबंधित कि

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