Tuesday , 21 September 2021
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दारोगा के तांडव से बुज़ुर्ग सहमे.

दारोगा के तांडव से बुज़ुर्ग सहमे.

IMG-20150920-WA0003snn लखनऊ.ब्रिटिश हुक्मरानों द्वारा पैदा की गयी पुलिस आज भी अंग्रेजो से मिले प्रशिक्षण से खुद को मुक्त नहीं कर पाई है .शायद यही कारण है कि उसकी बर्बरता की कहानियां लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बनी रहती हैं और एक के बाद एक उसके कारनामे जनता के बेच जब आते है अधिकारीयों के साथ सरकारें भी उनकी करतूतों पर पर्दा डालने का काम करती हैं जिसके चलते उनके हौसले इतने बुलंद रहते है की वह वर्दी की छत्रछाया में उन सीमाओं को भी पर कर जाते है जिन सीमाओं को लांघने की हिम्मत शायद अंग्रेजों ने भी अपनी सल्तनत के दौरान न की हो .प्रदेश पुलिस का एक ऐसा ही अमानवीय कारनामा विधान भवन के चंद वाद्मो दूर लोगों को जब देखने लो मिला तो वे दांतों तले ऊँगली दबा बैठे. द्रश्य था हजरतगंज कोतवाली में तैनात दारोगा द्वारा जी .पी .ओ के मुख्यद्वार पर टाइप राइटिंग कर अपने परिवार का गुज़र  बसर करने वाले 70 वर्षीय बुज़ुर्ग की अपराधियों की तरह न सिर्फ पिटाई की जारही थी बल्कि रोज़ी रोटी का एकमात्र साधन टाइप राइटर को भी अपने बूटों से रौंद कर उसके वजूद को खत्म करने का कम लकर रहा था .राजधानी में यह घटना देखते ही देखते मीडिया की सुर्खी बनी और देखते ही देखते समूचा प्रशासनिक अमला हरकत में आगया और जब तक वर्दी के रौब में मंदांध दारोगा को अपनी हरकत का एहसास हुआ और लोगों का जमावड़ा लग्न शुरू हुआ तो वह घटनास्थल से ऐसे गायब हुआ जैसे गढ़े के सर से सींग.घटनास्थल पर पहुचे पुलिस कप्तान ने जब वहाँ का नज़ारा देखा और पीड़ित बुज़ुर्ग से बात की तो उन्हें भी अपने अधीनस्थ की करतूत पर काफी शर्मिंदगी का एहसास हुआ और उन्हों ने तत्काल प्रभाव से उसे निलम्बित करने का आदेश दे दिया इसी दौरान जब यह घटना प्रदेश मुखिया तक पहुची तो उन्हों ने तत्काल प्रभाव से एसएसपी और जिलाधिकारी को नया टाइप राइटर लेकर बुज़ुर्ग के घर पहुच कर माफ़ी मांगते हुए खेद प्रकट करने के निर्देश दिए .बुजुर्गों के साथ पुलिस के इस तरह के व्यवहार की यह कोई पहली घटना नहीं है इस से पहले भी बनारस ,शामली ,सहारनपुर ,कानपुर,सुल्तानपुर सहित अनेक जनपदों में ऐसी घटनाएं पुलिस द्वारा अंजाम दी जा चुकी हैं लेकिन चूँकि यह घटना सत्ता के गलियारे के इर्द गिर्द हुई इस लिय सरकार से लेकर प्रशासनिक अमला उलटे पैर खड़ा हो गया ताकि जनता के बेच होने वाली किरकिरी से खुद को बचाया जासके .बुजुर्गों का सम्मान हमारी संस्कृति का एक हिस्सा है पता नहीं वर्दी के रौब में इस  गुस्ताखी को अंजाम देने वाले इस दरोगा के घर में शायद कोई बुज़ुर्ग नहीं इसी लिए वह इन संस्कारों से महरूम रहा है और यह हरकत कर बैठा .सरकार और प्रशासन की यह पहल उस पीड़ित बुज़ुर्ग के ज़ख्मों पर शयेद मरहम लगाने का काम करे लेकिन प्रदेश भर के बुजुर्गों को पुलिस का यह रवैया रास नहीं आया इस संदर्भ में हमारे संवाददाता ने सीनिअर सिटीजन आर्गेनाईजेशन से जुड़े लोगों से बात की तो उन्हों ने प्रदेश के माथे पर एक बहुत बड़ा कलंक बताते हुए कहा की दारोगा के निलम्बन मात्र से बुज़ुर्ग के अपमान की भरपाई स्म्भ्क नहीं है .उसे तत्काल प्रभाव से जेल के सीखचों में डाला जाना चाहिए ताकि प्रदेश की पुलिस भविष्य में ऐसी ग़लती करने का साहस भी न जुटा  पाए.उनका कहना है की सत्ता में काबिज़ होने के बाद से ही बुजुर्गों के प्रति आदर भाव रखने वाले युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कम से कम इस पर मामले पर कडा रुख अपनाना चाहिए जो एक पुलिस विभाग के लिए नजीर बन सके वरना यह कार्यवाही  भी उसी श्रंखला में जुड़ जाए गी जो इसके पहले भी पुलिस के द्वारा बुजुर्गों के साथ की जा चुकी हैं.

 

 

 

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