Saturday , 14 December 2019
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बच्चों में भावात्मक चेतना ही सामाजिकता का आधार: डॉ. पवन विजय

बच्चों में भावात्मक चेतना ही सामाजिकता का आधार: डॉ. पवन विजय

दिल्ली/बच्चों में एक दूसरे के प्रति भावात्मकता की कमी से सामाजिकता का ह्रास हो रहा है। तकनीकी विकास ने बच्चों के संवेदनशील तंतुओं पर प्रहार किया है। विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बच्चों का समाजीकरण करने की बजाय उनका डीइमोशनलाइजेशन कर रहे हैं । बाहर के परिवेश, हवा, पानी, मिट्टी, संस्कृति और समस्याओं के प्रति बच्चे असंवेदनशील हो रहे हैं जिसकी वजह से सामाजिक ताना बाना गंभीर रूप से खतरे में पड़ रहा है। संयुक्त परिवारों के टूटने से सांस्कृतिक प्रवाह टूट गया है जिससे अगली पीढ़ी पिछले के तौर तरीकों से अनभिज्ञ होती जा रही। तकनीकी विकास के अनियंत्रित विकास को नही रोका गया तो आने वाले समय मे बच्चों को रोबोट बनने से रोका नही जा सकेगा। ये विचार समाजशास्त्री और लेखक डॉ.पवन विजय ने दिल्ली के डीआईआरडी( Delhi Institute of Rural Development) के एक सेमीनार में व्यक्त किये।

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