Friday , 24 September 2021
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कानपुर का लाल देवांश अग्रवाल; बैडमिंटन में रचा इतिहास 

कानपुर का लाल देवांश अग्रवाल; बैडमिंटन में रचा इतिहास 

IMG-20150824-WA0111 copyabu obaida chief editor snn खेल खेल में पिता खिलाड़ी से पत्रकार बन बैठा तो बेटा खेल खेल में इतिहास रच कर कानपुर का लाल बन गया.पिता ने अपने जिस अज़ीज़ खेल को छोड़ कर पत्रकारिता को अपने जीवन का मकसद बनाया होनहार बेटे ने उसी खेल में अपना नाम रौशन कर न सिर्फ अपने घर में खुशियों का उजाला भरा बल्कि कानपुर जैसे शहर को राष्ट्रिय स्तर पर पहचान दिलाने की स्वर्णिम शुरुआत दे दी .आज खिलाड़ी से पत्रकार बने पिता की आँखें ख़ुशी में नम है तो उसका कारण है उनका लाल देवांश अग्रवाल .

उत्तर प्रदेश के गौरव ग्रीन पार्क स्टेडियम के पीछे बने छोटे से आशियाने में रहने वाले यूनाइटेड पब्लिक स्कूल में ग्यारहवीं के छात्र देवांश अग्रवाल को नेशनल स्कूल बैडमिंटन चैम्पियनशिप टूर्नामेंट के लिए यू पी स्टेट टीम में चुना गया है.ये कानपुर के इतिहास में पहला मौक़ा है जब कानपुर नार्थ ज़ोन से कानपुर के किसी खिलाडी का चयन हुआ है.ये मुकाम देवांश ने २१ से २२ अगस्त २०१५ को गोरखपुर में हुई नाक आउट बैडमिंटन प्रतियोगिता के सेमी फाइनल तक पहुच कर हासिल किया जहाँ वो राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से मात्र एक अंक से हारा.देवांश के खेल को  देख कर चयनकर्ता काफी प्रभावित हुए और उसे २६ से २७ अक्टूबर २०१५ को बेगलूरु में होने वाली नेशनल स्कूल बैडमिंटन चैम्पियनशिप के लिए यूपी स्टेट टीम में चुन लिया.इस चयन से देवांश के घर से लेकर स्कूल और पूरे मोहल्ले में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी.देवांश को बधाई देने वालों का तांता घर पर लग गया.यही नहीं कल तक जिस बच्चे को लोग साधारण समझते थे आज उसे स्टार की तरह हाथों हाथ ले रहे है उसके साथ फोटो खिचवाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा,खबर मिलने के बाद ढोल नगाड़े पटाखे लिए सहपाठी ख़ुशी से झोम रहे हैं.

अब आप को बताते हैं की देवांश कानपुर के वरिष्ठ पत्रकार आलोक अगरवाल के सुपुत्र हैं जो किसी ज़माने में घर के पास स्थित ग्रीन पार्क स्टेडियम में बने बैडमिंटन कोर्ट में इसी खेल की प्रेक्टिस करते थे देवांश उनका रेकेट पकड़ कर साथ जाता था और पिता अलोक अग्रवाल को बैडमिंटन खेलते देखता था बस यहीं से उसने खेल खेल में बैडमिंटन रेकेट हाथ में पकड़ा और फिर रोज़ अभ्यास करने लगा कुछ ही महीनो में देवांश की प्रतिभा खुल कर सामने आ गयी और समय के साथ उसके खेल में निखार आता गया यहाँ .देवांश ने सत्यम न्यूज़ को बताया की जब वह पांचवीं कक्षा में था तो पापा के साथ ग्रीन पार्क जाना शुरू किया पापा अपने मैचों के प्रेस नोट बना कर अखबारों के दफ्तर जाने लगे और फिर वो खेल को भूल कर पत्रकारिता में जुट गए ,स्थानीय दैनिक पत्रों में ख़बरें लिखते लिखते सहारा समय न्यूज़ चैनेल से एनडी टीवी तक का सफ़र बहैसियत रिपोर्टर तय किया और मै पापा की विरासत को आगे बढाने में लग गया.देवांश आगे बताते है की बैडमिंटन के खेल में मेरा बाकायदा कोई कोच नहीं बस अपने सीनियर्स को खेलते देख कर मै अभ्यास करता हूँ और ये मेरे माता पिता और बुजुर्गों का आशीर्वाद है की आज मुझे यूपी स्टेट टीम में स्थान मिला और अब आगे कोशिश है की मै अपने शहर का नाम अपने खेल से रोशन करू और पिता जिस खेल को दिलो जान से चाहते हैं उस खेल को अपनी प्रतिभा और लगन से राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाऊं.

देवांश के पिता अलोक अग्रवाल बताते हैं की देवांश बिना किसी कोच के इस स्थान तक पहुचा ये भगवन की देन है उसकी अपनी लगन भी है.अब ये खिलाड़ी देश को समर्पित है आगे खेल निदेशालय कैसे इस प्रतिभावान खिलाड़ी को तराशता है ये उसे देखना है.आलोक अपने अतीत को याद करते हुए कहते हैं की हलीम मुस्लिम डिग्री कालेज की टीम से वो खुद यूनवर्सिटी लेवल का बैडमिंटन खेल चुके हैं और उनका बेटा इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करे गा ये उन्हों ने सपने में भी नहीं सोचा था.

कानपुर में गंगा जी के आँचल में पले बढे देवांश अग्रवाल दुनिया के नम्बर एक मलेशियाई बैडमिंटन खिलाड़ी ली चोंग वी से प्रभावित हैं.

 

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