Tuesday , 18 June 2019
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दिल्ली दुष्कर्म : चारों दोषियों को मृत्युदंड, फैसला सुन रो पड़े दरिंदे

दिल्ली दुष्कर्म : चारों दोषियों को मृत्युदंड, फैसला सुन रो पड़े दरिंदे

13-09-2013, नई दिल्ली। पिछले साल 16 दिसंबर की रात चलती बस में पैरा-मेडिकल स्टूडेंट से हैवानियत की हदें पार करने वाले चारों दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई गई है। साकेत के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चारों दोषियों विनय शर्मा, पवन कुमार उर्फ कालू, अक्षय कुमार सिंह और मुकेश के अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी का मानते हुए उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई। जज ने सजा सुनाते हुए कहा कि यह ऐसा अपराध है, जिसने समाज को हिलाकर रख दिया। 

फास्ट ट्रैक कोर्ट के अडिशनल सेशन जज योगेश खन्ना ने दोपहर ढाई बजे सजा का ऐलान करते हुए कहा कि एक असहाय लड़की के साथ जघन्य अपराध किया गया है। इन्होंने उस लड़की की हत्या की, जिसके पास बचने का कोई उपाय नहीं था। जज ने कहा कि क्रूरता की सीमाएं तोड़ी गई हैं। उसके साथ अमानवीय बर्ताव किया गया। ऐसे अपराध के लिए मृत्युदंड से कम कोई सभी सजा नहीं दी जा सकती है। इसके बाद सभी को एक-एक कर सजा सुनाई गई।

वहीं बचाव पक्ष के वकील ने फैसले के बाद कहा कि यह सरकार के इशारे पर किया गया है। जज ने बिना कुछ सोचे-समझे राजनीतिक दवाब में यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि उनके पास अपील करने के लिए 2-3 महीने का वक्त है। अगर इन दो-तीन महीनों में किसी के साथ रेप नहीं होता है तो वह आगे अपील नहीं करेंगे। गौरतलब है कि 10 सितंबर को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को हत्या और गैंग रेप समेत आईपीसी की 11 धाराओं के तहत दोषी करार दिया था।

फैसले से ठीक पहले साकेत कोर्ट के बाहर हलचल तेज हो गई थी। मीडिया बड़ी तादाद में वहां जमा था। पुलिस ने भी सुरक्षा बढ़ा दी थी। सवा दो बजे के करीब चारों दोषियों को कोर्ट में लाया गया।

गैंगरेप की शिकार ‘निर्भया’ के माता-पिता ने दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। सजा पर फैसले से पहले एक टीवी चैनल से बात करते हुए मां ने कहा था, ‘हमें आज इंसाफ की उम्मीद है। उन्होंने जघन्य अपराध किया है। उनका बर्ताव जानवरों की तरह था। उन्हें फांसी पर लटकाया जाना चाहिए।’ वहीं निर्भया के पिता का कहना था, ‘मैं आज इस उम्मीद के साथ घर से निकल रहा हूं कि मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा। और इस केस में इंसाफ बस फांसी की सजा है। फांसी से कुछ भी कम इंसाफ नहीं होगा।’

वहीं इस मामले में दोषी सबसे कम उम्र के विनय शर्मा की मां ने उसकी जान बख्शने की गुहार लगाई थी। साउथ दिल्ली के स्लम में रहने वाली विनय की मां चंपा देवी के मुताबिक, ‘जज को उन्हें सुधरने का दूसरा मौका देना चाहिए। भगवान तक हर इंसान को दूसरा मौका देता है।’ चंपा के मुताबिक उसका बेटा विनय और दूसरा आरोपी पवन गुप्ता ‘अच्छे लड़के’ हैं। दोनों मेहनती लड़के रहे हैं और उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं आई। उनके मुताबिक राम सिंह ने उन्हें इस मुश्किल में फंसाया है।

काम नहीं आई गांधी-बुद्ध की दलीलः गौरतलब है कि बुधवार को चारों दोषियों की सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने जज के सामने एक से बढ़कर एक दलीलें दी थीं। मुकेश के वकील वीके आनंद ने तो दया की गुहार लगाते हुए महात्मा गांधी और बुद्ध तक के दर्शन का जिक्र कर डाला था। आनंद ने कहा था, ‘भारत ऐसा देश है जो महात्मा गांधी और बुद्ध के दर्शन में यकीन रखता है। गांधी जी ने कहा था कि वह किसी को भी प्राणदंड देने में विश्वास नहीं रखते।’अभियोजन पक्ष ने इस अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की कैटिगरी में रखने की दलील दी थी।

16 दिसंबर 2012 को मुनिरका इलाके में 23 साल की पैरा-मेडिकल छात्रा के साथ छह लोगों ने चलती बस में बर्बर गैंगरेप किया था। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार को दोषी करार दिया। एक आरोपी राम सिंह की मौत के बाद उसके खिलाफ ट्रायल खत्म कर दिया गया था। उसने 11 मार्च को तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर कथित रूप से खुदकुशी कर ली थी। जबकि एक आरोपी के घटना के वक्त नाबालिग होने की वजह से जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे हत्या और गैंग रेप समेत आईपीसी की तमाम धाराओं के तहत दोषी मानते हुए अधिकतम तीन साल के लिए सुधार गृह भेज दिया है।

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