Sunday , 24 October 2021
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दारूल उलूम देवबन्द पूर्वी यू0पी0 ज़ोन 1 का इज्लास

दारूल उलूम देवबन्द पूर्वी यू0पी0 ज़ोन 1 का इज्लास

कानपुर:- राबिता मदारिस इस्लामिय अरबिया दारूल उलूम देवबन्द पूर्वी यू0पी0 ज़ोन 1 का इज्लास जामिया महमूदिया अशरफुल उलूम जामा मस्जिद अशरफाबाद जाजमऊ कानपुर में आयोजित हुआ जिसमें पूर्वी ज़ोन 1 में शामिल 27 जि़लों में चलने वाले मदरसों के संचालक व प्रबन्धक एवं उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इज्लास से राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया दारूल उलूम देवबन्द के प्रबन्धक व दारूल उलूम देवबन्द के शिक्षक मौलाना मुहम्मद शौकत साहब क़ासमी बस्तवी व दारूल उलूम देवबन्द के उस्ताद ए हदीस मुफ्ती राशिद आज़मी और ज़ोन 1 अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी ने संबोधित किया।
मौलाना मुहम्मद शौकत साहब क़ासमी ने राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया दारूल उलूम देवबन्द की स्थापना का लक्ष्य, महत्व और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाजपा की हुकुमत के दौर में जब अडवानी उप प्रधानमंत्री थे एक मंत्रीमण्डल बनायी गयी थी जिस ने रिपोर्ट तैयार की कि मदरसों विशेषकर नेपाल से जुड़े मदरसे आतंकी गतिविधियों से जुड़े हैं इस बे सिर व पैर की रिपोर्ट और मदरसों के विरूद्ध साजि़शें और मदरसों में शैक्षिक कमियों को दूर करने के लिए राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया दारूल उलूम देवबन्द की स्थापना की गयी। इस्लामी मदरसांे के बाहरी व अन्दरूनी समस्याओं के हल के लिए दारूल उलूम देवबन्द में जलसा किया गया। मदरसों के आचार्य संहिता बनाई गयी। शैक्षिक कोर्स में शामिल प्रत्येक किताब का लक्ष्या है। शिक्षकों को यह समझने और छात्रों को यह समझने की आवश्यकता है इसी तरह कोर्स पूरा करने में संतुलन रखा जाये, तरबियत का विशेष ख्याल रखा जाये।
दारूल उलूम देवबन्द के उस्ताद ए हदीस मौलाना मुफ्ती मुहम्मद राशिद आज़मी ने कहा कि हज़ारों साजि़शों के बावजूद मदरसे तरक्क़ी कर रहे हैं और करते रहेंगे। इस्लाम विरोधी मदरसों के विरूद्ध सभाएं करके मदरसों को बन्द करने की सुझाव देते हैं इधर अल्लाह के फज़्ल से दो चार मदरसों में वृद्धि हो जाती है। ये अल्लाह का करम है अल्लाह ने लोगों के दिलों में मदरसों की मुहब्बत डाल दी है। मदरसे दीन की मदद कर रहे हैं इसलिए अल्लाह मदरसों की मदद कर रहा है। मदरसों की स्थापना के लिए हमारे पूर्वजों (बुजुर्गाें, औलिया अल्लाह) ने बहुत मेहनत की इसलिए आज पूरे देश में मदरसों का जाल बिछा हुआ है और विरोधी साजि़शों के बावजूद तरक्क़ी कर रहा है। मौलाना ने कहा कि दारूल उलूम देवबन्द को बन्द कराने के बहुत प्रयास किये गये और लगातार किये जा रहे हैं, एक वर्ग इसके लिए लगातार सक्रिय है लेकिन अल्लाह इसकी हिफाज़त फरमा रहे हैं अभी कुछ समय पहले ही एक प्रयास किया गया जो अल्लाह के करम से विफल हो गया और साजि़श रचने वाले खुद आपस में ही भिड़ गये।
राब्ता मदारिस के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद मतीनुल हक़ उसामा क़ासमी ने कहा कि दारूल उलूम देवबन्द ने राब्ता मदारिस इस्लामिया अरबिया से जोड़ने के लिए इस बात का ख्याल रखा है कि जि़म्मेदारों के सम्मान पर कोई आंच ना आये। मदरसों को जोड़ करके छात्रों की शि़क्षा को मानक व उच्च स्तरिय बनाया जाये और उनकी तरबियत अच्छे अंदाज़ से की जाये ताकि क़ौम को बेहतर रहबर (ज्ञान देने वाला) मिले। मदरसों के विरू़द्ध साजि़शों से एकजुट हो कर निपटा जाये। एकजुटता से बल मिलता है। दूसरे चरण में कार्यकारिणी के सदस्यों व पदाधिकारियों का चयन किया गया। मौलाना मतीउल हक़ अन्ज़र संचालक इदारह महमूदिया मुहम्मदी लखीमपुर, मौलाना मुहम्मद इब्राहीम क़ासमी शिक्षका मदरसा फुकऱ्ानिया गोंडा, मुफ्ती अब्दुर्रहीम साहब मदरसा बैतुल उलूम बहराइच, मौलाना अब्दुल मन्नान मदरसा बैतुल उलूम बन्के गंाव सिद्धार्थनगर, मुफ्ती इक़बाल अहमद क़ासमी सदर मदरसा मज़हरूल उलूम निखट्टू शाह बेकन गंज आदि ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति की। उपस्थित लोगों ने लिखित रूप में भी अपने विचारों को सबके सामने पेश किया। जलसे का शुभारम्भ क़ारी अब्दुल माबूद फुकऱ्ानी की तिलावत से हुआ और नात व मन्क़बत का नज़राना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह और हाफिज़ मुहम्मद शुएब ने पेश किया। जलसे का अन्त मौलाना मुफ्ती नेमतुल्लाह संचालक मदरसा फुकऱ्ानिया गोण्डा की दुआ से हुआ। जामिया महमूदिया के संचालक मौलाना अनवार अहमद जामई ने सभी उपस्थितजनों को धन्यवाद दिया।

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