Monday , 20 May 2019
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 हुस्न की नगरी में फिर से अपनी अदाओं का जलवा बिखेरें गी चांदनी और चमेली

 हुस्न की नगरी में फिर से अपनी अदाओं का जलवा बिखेरें गी चांदनी और चमेली

article-2366212-1AD7E689000005DC-298_634x434राजेश मिश्रा . मुंबई/    यहाँ हर चीज़ बिकती है , बोलो जी तुम क्या क्या खरीदोगे–

साधना फिल्म के इस गाने ने बम्बई के एक सिन्धी व्यवसायी परमानन्द झिमानी के मन में पता नहीं क्या जूनून पैदा किया की उसने साठ के दशक में नरीमन पाइंट में पहला डांस बार खोलने का साहस किया और उसका यह साहस का जादू देखते ही देखते महाराष्ट्र के लोगों के सर इस क़दर हावी हुआ की २००५ तक मंबई में डांस बारों की संख्या बढ़ कर एक हज़ार सभी अधिक पहुँच गयी और इस पेशे से सीधे तौर पर जुड़ गयीं ७५ हज़ार से अधिक वह लडकियां जो फिल्म की माया नगरी की चकाचौंध से प्रभावित होकर देश के विभिन्न हिस्सों से भाग कर हेरोइन बनने की तमन्ना लिए बम्बई पहुचीं और वहां पर जब कुछ हाथ न लगा तो उन्हे दलालों ने इस नगरी में धकेल कर अपनी तिजोरियों में भारी दौलत समेटने का काम किया/ बम्बई की इ बार बालों को हालाँकि मह्बूरी में ही सही लेकिन यह कारोबार धीरे धीरे ऐसा रास आया की वह उसी दलदल में समाती चली गयीं /इनके चाहने वालों की संख्या भी इस हद तक बढ़ी की सैकड़ों लोग न सिर्फ करोड़ पति से कंगाल हो गए और जाने अनजाने उनको मौत को गले लगाने के लिए मजबूर भी होना पड़ा /सामाजिक संगठनों ने इन डांस बारों पर रोक लगाने की माग जब उठाई तो सत्ता के गलियारे में भी इस बात को लेकर राजनैतिक दलों में खासी खलबली मच गयी और २००५ में सरकार को इस पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा/हालांकि सरकार को इन बारो से प्रति वर्ष लगभग ३००० करोड़ रूपये की आमदनी होती थी बावजूद इसके सरकार ने यह क़दम उठाया तो महाराष्ट्र के आम जनमानस ने  इसका दिल से स्वागत भी किया लेकिन सरकार के इस निर्णय के बाद बार बालों को ऐसे मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया जहां उन्हे दो वक़्त की रोटी जुटाने के लिए या तो वैश्यावृत्ति का सहारा लेना पडा या फिर कुछ बार बालाएं दलालों के चुंगल में फँस कर ,सिंगापुर ,शारजाह,दुबई सहित अनेक देशों की ओर पलायन कर गयीं /हालांकि जो बार बालें विदेशों में पहुच चुकी हैं वह आर्थिक रूप से बम्बई की तुलना में काफी मज़बूत हो चुकी हैं और उनके दिलों से बम्बई वापसी की ख्वाहिश भी कोसों दूर जा चुकी है/ सुप्रीम कोर्ट के आज आये फैसले ने होटल एवं डांस बार संचालकों सहित स्थानीय बार बालों में काफी उत्साह नज़र आरहा है लेकिन बार संचालक इस बात को लेकर खासे चिंतित नज़र आरहे हैं कि आखिर डांस बारों को दुबारा बार बालों के यौवन से कैसे गुलज़ार किया जाये क्यूंकि इस वक्फे में अधिकतर बालाए काम छोड़ कर अन्य कामों में लग चुकी है या उम्र के उस पड़ाव पर पहुँच चुकी हैं जहाँ उनका ग्लैमर फीका पड़ चूका है  अब ऐसे में डांस  बार संचालकों के सामने एक नई  चुनौती है जिस में उन्हें फिर से कमसिन बार डांसरों की फ़ौज तैयार करने के लिए दलालों को सक्रीय करना पड़े गा/ सरकार का यह  तर्क भी सामजिक दृष्टिकोर्ण से काफी रोचक रहा है की प्रतिबन्ध के बावजूद प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ने जब बार बालों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया तो एक भी बार बाला ने सरकार की इस पहल में अपनी हिस्सेदारी नहीं निभाई/महाराष्ट्र में कुल पांच फाइव स्टार होटल हैं जहाँ पहले से ही प्रबंधकों ने ऐसे अश्लील डांस प्रदर्शनों पर प्रतिबन्ध लगा रखा है /मुंबई के कई उपनगरों ,गोर गाँव ,मनमाड ,मीरा रोड ,कुर्ला सहित आस पास के हाउसिंग सोसाइटी के फ्लेटों में बार गर्ल्स का बोल बाला एकबार फिर से यहाँ की रौनक  में चार चाँद लगाए गा/ बार संचालकों को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद एक तरफ जहाँ बार बालों की उपलब्धता की चिंता सता रही है वहीँ अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों द्वारा की जाँव वाली वसूली को लेकर भी खासे चिंतित नज़र आ रहे हैं /अदालत के फैसले के बाद राज्य सरकार अब इस दिशा में क्या क़दम उठाती है यह तो भविष्य के गर्त में है लेकिन हुस्न परस्तों  के लिए दीपावली के पहले यह खबर किसी बड़े उपहार से कम नहीं /कला की अनेक विधाएं होती हैं और यह प्राचीन काल से राज दरबारों की शोभा बन कर न्रित्यांग्नाओं के नाम से जानी जाती रही हैं और समय के साथ बदले परिवेश में इनकी कला के प्रदर्शन का तरीका तो लगभग वैसा ही रहा लेकिन इनके नाम के आगे नृत्यांगना शब्द हटा कर तवायफ के रूप में जाना जाने लगा /समय ने कुछ ऐसी गति बदली की यही तवायफें कोठों से निकल कर इन डांस बारों की शोभा बन बैठीं लेकिन इनकी बढती संख्या ने ही समाज में इनके खिलाफ बगावती स्वरों को कुछ इतना बुलंद किया की हालत यहाँ तक पहुँच गए की इस मामले में देश की सर्वोच न्याय पालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा /

 

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