Thursday , 12 December 2019
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बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, दी मुखाग्नि

बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, दी मुखाग्नि

कानपुर। कौन कहता है कि बेटे ही माता-पिता की बुढ़ापे की लाठी होती है। मौजूदा समय में बेटियां भी किसी से कम नहीं होती है। यह बात कानपुर के जूही क्षेत्र में उस वक्त देखने को मिली जब दो बेटियों ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर समाज से अपनी सोच बदलने की मिसाल पेश की। दोनों बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा लेकर निकली तो देखने वालों की भीड़ लग गई। सभी यह नजारा देख अपनी आंखों के आंसू रोक नहीं सके। बेटियों ने हिन्दू रीति-रिवाज से मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया।
जूही क्षेत्र में रहने वाले महेश प्रताप वाजपाई (80) रिटायर्ड जेलर थे। बुधवार को उनका निधन हो गया था। महेश प्रताप की दोनों शादीशुदा बेटियों अल्का मिश्रा और पूनम त्रिपाठी ने उनकी अर्थी का कंधा दिया और चिता मुखाग्नि दी।
रिटायर्ड जेलर की बेटी अल्का के मुताबिक, समाज में भी महिलाओं को सामान अधिकार मिलना चाहिए। जब महिलाएं युद्ध भूमि से लेकर शिक्षा के क्षेत्र तक पुरुषों से कंधा मिलकर चल रही हैं तो अपने पिता की अर्थी को कंधा और चिता को मुखाग्नि क्यों नहीं दे सकती है? उन्होंने कहा कि समाज तेजी से बदल रहा है और बदलते समाज के साथ लोगों को अपनी सोच बदलने की भी जरूरत है।
वहीं पूनम बताया कि जब मेरे पिता अपनी जॉब में थे तब हम उनके साथ रहने का बहुत मौका मिलता था। लेकिन वो रिश्तेदारों से कहते थे यह मेरी बेटियां नही बल्कि मेरे दो शेर है और मुझे इन पर नाज हैं। उन्होंने जॉब के समय कई कैदियों को सुधारा था उनकी मदद कर एक अच्छा इंसान बनने में उनकी मदद की थी।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, बेटियों को समाज में बराबर का दर्जा मिला है तो उनको मुखाग्नि देने का भी दर्जा दिलाना एक सार्थक कदम होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दोनों बेटियों ने भैरव घाट में अपने पिता को मुखाग्नि देकर समाज को अच्छा उदहारण दिया है।

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