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CBI की चार्जशीट से खुलासा,  इशरत जहां का एनकाउंटर फर्जी था, पुलिस और IB की मिलीभगत से हुई थी मुठभेड़

CBI की चार्जशीट से खुलासा, इशरत जहां का एनकाउंटर फर्जी था, पुलिस और IB की मिलीभगत से हुई थी मुठभेड़

 03-07-2013, अहमदाबाद की स्‍पेशल कोर्ट में सीबीआई ने बुधवार को इशरत जहां एनकाउंटर केस में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है. चार्जशीट में इशरत जहां के एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी बताया गया है.चार्ज शीट में गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का नाम नहीं है, लेकिन सब्सिडियरी इंटेलीजेंस ब्यूरो (एसआईबी) और गुजरात पुलिस के अफसरों पर जांच एजेंसी की गाज गिरी है. सीबीआई ने पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा समेत 7 लोगों को आरोपी बनाया है.

आखिरकार 9 साल बाद इशरत जहां एनकाउंटर का सच बाहर आ ही गया. सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दावा किया कि 15 जून, 2004 का एनकाउंटर, जिसमें गुजरात पुलिस और आईबी ने इशरत जहां समेत चार लोगों को आतंकवादी बताकर मारने का दावा किया था, फर्जी था. सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक इशरत जहां आतंकवादी नहीं थी. चार्जशीट में पूर्व आईपीएस जीएल सिंघल, इशरत एनकाउंटर का नेतृत्व करने वाले डीआईजी डीजी वंजारा, नरेंद्र अमीन, पीपी पांडेय, तरुण बरोट, अनाजू चौधरी और जेजी परमार को आरोपी बनाया गया है. मोहन कलासवा का भी नाम है, जिनकी मौत हो चुकी है. इन सभी पर अपहरण, आर्म्‍स एक्‍ट, हत्‍या और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं. सीबीआई ने कोर्ट से कहा है कि पूरी साजिश गुजरात पुलिस और आईबी की मिलीभगत से हुई है.

चार्जशीट में कहा गया है कि सीबीआई जांच में इस बात का पता चला है कि इशरत आतंकवादी नहीं बल्कि बेकसूर थी,मगर उसके तीन साथियों अमजद अली, जावेद और जौशीन की गतिविधियां संदिग्‍ध थीं. जिसके चलते सीबीआई ने इस मामले में और जांच की जरूरत बताई है.

सीबीआई ने चार्जशीट में कहा है कि मुठभेड़ गुजरात पुलिस और सब्सिडियरी इंटेलीजेंस ब्यूरो (एसआईबी) का संयुक्त अभियान था और डीजी वंजारा ने पूरे एनकाउंटर की साजिश रची थी. सीबीआई के मुताबिक आईबी के विशेष निदेशक राजिंदर कुमार और एजेंसी के चार अधिकारियों के खिलाफ जांच जारी है. अब सवाल यह है कि अगर मुठभेड़ फर्जी थी तो किसको फायदा पहुंचाने के लिए इतनी बड़ी साजिश रची गई.

चार्जशीट में नरेंद्र मोदी और उनके करीबी अमित शाह का नाम नहीं है. लेकिन कहा जा रहा है कि सीबीआई बाद में इस मामले में सप्‍लीमेंट्री चार्जशीट दायर कर सकती है, जिसमें मोदी और शाह का नाम हो सकता है.

चार्जशीट के मुताबिक गुजरात पुलिस और आईबी ने जीशान अली को अप्रैल में और अमजद अली को मई में अगवाकर अलग-अलग फॉर्म हाउस में रखा था. इसके बाद 11 जून 2004 को इशरत और जावेद शेख को अगवा कर दूसरी जगह रखा गया. सीबीआई के मुताबिक 12 और 13 जून को डीजी बंझारा, पीपी पांडेय और राजेंद्र कुमार के बीच मीटिंग हुई थी.

बताते हैं कि इसी बैठक में एनकाउंटर पर फैसला हुआ. सीबीआई का दावा है कि 14 जून को वंजारा के निर्देश पर जीएल सिंघल सब्सिडियरी आईबी दफ्तर गए और एक बैग में हथियार इकट्ठा किए.

हालांकि बैठक में इशरत को लेकर अलग-अलग राय उभरी थी. एनकाउंटर के दिन जावेद, इशरत और जीशान को जावेद की कार से मौके पर लाया गया. कार एक पुलिस वाला चला रहा था. सीबीआई के मुताबिक गुजरात पुलिस ने एनकाउंटर को मैनेज किया.

सीबीआई के मुताबिक एनकाउंटर से पहले ही पुलिस ने एफआईआर भी ड्राफ्ट कर ली थी. सीबीआई का दावा है कि पूरी चार्जशीट जांच और सबूत पर आधारित है और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए उसके पास पुख्ता सबूत हैं. उनके पास 20 से 25 गवाह भी हैं.

फिलहाल यह शुरुआती चार्जशीट है. सीबीआई ने अदालत से सबूत जुटाने के लिए और वक्त देने की मांग की है. दो-तीन बाद फाइनल चार्जशीट दाखिल की जाएगी.

याद रहे कि 15 जून 2004 को अहमदाबाद के नरोडा इलाके में इशरत और उसके तीन दोस्तों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था. गुजरात पुलिस का दावा था कि ये चारों मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से आए थे और वो मुठभेड़ में मारे गए थे. मगर अब सीबीआई ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताया है.

 

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