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हरियाणा। फरीदाबाद । बल्लभगढ़ दंगा पीड़ितों ने  मुआवज़ा राशि लेने से इंकार किया

हरियाणा। फरीदाबाद । बल्लभगढ़ दंगा पीड़ितों ने मुआवज़ा राशि लेने से इंकार किया

downloadहरियाणा। फरीदाबाद ज़िले के बल्लभगढ़ के अटाली गांव में दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवारों ने जिला प्रशासन द्वारा आवंटित की गई सहायता राशि  लेने से इनकार कर दिया है। इन परिवारों का आरोप है कि जिला प्रशासन द्वारा पेशकश की गई राशि उस मुआवजे की रकम से काफी कम है जो कि प्रशासन द्वारा पूर्व में उन्हें मुहैया कराने का भरोसा दिया गया था। बतादें  कि गांव के दंगा प्रभावित 28 परिवारों के लिए जिला  प्रशासन ने 27,46,000 का मुआवजा आवंटित किया है। यह राशि इन सभी परिवारों के बीच वितरित की जानी है।गाँव के दंगा पीड़ितों ने आरोप लगाया है की उन्हें हिन्दू समुदाय के दुकानदार सामन नहीं दे रहे जिस से परेशानी है और कई किलोमीटर के बाद ज़रूरी सामन खरीद कर लाना पद रहा है इतना ही नहीं गांव में चलने वाले यातायात के साधनों ,जैसे टेम्पू आदि में भी जगह नही दी जा रही।   एक अंग्रेजी दैनिक  में छपी एक खबर के हवाले से बल्लभगढ़ के राजस्व विभाग के अधिकारी कपिल पटवाड़ी ने बताया कि प्रशासन की ओर से अटाली गांव के दंगा पीड़ितों को मुआवजा राशि मुहैया कराने की कवायद शुरू की जा चुकी है। पिछले दिनों हुए सांप्रदायिक हिंसा में जो 28 मुस्लिम परिवार प्रभावित हुए हैं, उनके लिए प्रशासन की ओर से 27,46,000 की मदद जारी की गई है। दंगों में हुए नुकसान के आधार पर यह राशि इन सभी परिवारों के बीच बांटी जाएगी।राजस्व विभाग के इस दावे को दंगा प्रभावित सिरे से खारिज कर रहे हैं।download (2)

दंगे के १५ से अधिक दिन गुज़र जाने के बाद भी ये मुस्लिम परिवार अपने को सुरक्षुत नहीं महसूस कर रहे हैं।अधिकतर किसानो की खेती तबाह हो चुकी है और जिनके कारोबार थे वो सब आग में जला दिए गए
एक ओर जहां राजस्व विभाग यह दावा कर रहा है कि गांव के मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया गया मुआवजा स्वीकार कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ दंगा पीड़ित इस बात से साफ इनकार कर रहे हैं। दंगों में घर और सामान को हुआ नुकसान तो एक तरफ है, लेकिन फिलहाल इन परिवारों के लिए परेशानी का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि दंगे के इतने समय बाद भी ये लोग लौटकर अपने घरों में नहीं जा पा रहे हैं। 15 दिन से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी हालात इतने सुरक्षित नहीं हो पाए हैं कि गांव के मुस्लिम परिवार वापस अपने घर लौट सकें। ज्यादातर लोगों की खेती लगभग बर्बाद हो चुकी है। जिन परिवारों के पास दुकानें थीं उनका भी सबकुछ या तो जलकर बर्बाद हो गया है या फिर लूट लिया गया है।गांव के निज़ाम का कहना है की पहले प्रशासन ने एक करोड़ रूपये वितरित करने की बात कही थी अब घटा कर चौथाई कर दिया।अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य फरीदा अब्दुल्लाह ने माना की जिला प्रशासन द्वारा दिया जा रहा मुआवज़ा पर्याप्त नहीं। उन्हों ने गांव का दौरा करने के बाद काम से कम एक करोड़ रूपये प्रभावित परिवारों को बांटने की सिफारिश की थी हालांकि ये राशि नुकसान से कहीं कम है।

अंग्रेजी दैनिक  में छपी एक खबर के हवाले से बल्लभगढ़ के राजस्व विभाग के अधिकारी कपिल पटवाड़ी ने बताया कि प्रशासन की ओर से अटाली गांव के दंगा पीड़ितों को मुआवजा राशि मुहैया कराने की कवायद शुरू की जा चुकी है। पिछले दिनों हुए सांप्रदायिक हिंसा में जो 28 मुस्लिम परिवार प्रभावित हुए हैं, उनके लिए प्रशासन की ओर से 27,46,000 की मदद जारी की गई है। दंगों में हुए नुकसान के आधार पर यह राशि इन सभी परिवारों के बीच बांटी जाएगी।राजस्व विभाग के इस दावे को दंगा प्रभावित सिरे से खारिज कर रहे हैं।

दंगे के १५ से अधिक दिन गुज़र जाने के बाद भी ये मुस्लिम परिवार अपने को सुरक्षुत नहीं महसूस कर रहे हैं।अधिकतर किसानो की खेती तबाह हो चुकी है और जिनके कारोबार थे वो सब आग में जला दिए गएएक ओर जहां राजस्व विभाग यह दावा कर रहा है कि गांव के मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया गया मुआवजा स्वीकार कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ दंगा पीड़ित इस बात से साफ इनकार कर रहे हैं। दंगों में घर और सामान को हुआ नुकसान तो एक तरफ है, लेकिन फिलहाल इन परिवारों के लिए परेशानी का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि दंगे के इतने समय बाद भी ये लोग लौटकर अपने घरों में नहीं जा पा रहे हैं। 15 दिन से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी हालात इतने सुरक्षित नहीं हो पाए हैं कि गांव के मुस्लिम परिवार वापस अपने घर लौट सकें। ज्यादातर लोगों की खेती लगभग बर्बाद हो चुकी है। जिन परिवारों के पास दुकानें थीं उनका भी सबकुछ या तो जलकर बर्बाद हो गया है या फिर लूट लिया गया है।गांव के निज़ाम का कहना है की पहले प्रशासन ने एक करोड़ रूपये वितरित करने की बात कही थी अब घटा कर चौथाई कर दिया।अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य फरीदा अब्दुल्लाह ने माना की जिला प्रशासन द्वारा दिया जा रहा मुआवज़ा पर्याप्त नहीं। उन्हों ने गांव का दौरा करने के बाद काम से कम एक करोड़ रूपये प्रभावित परिवारों को बांटने की सिफारिश की थी हालांकि ये राशि नुकसान से कहीं कम है।  गांव के मुस्लिम समुदाय का आरोप है कि दंगे के इतने समय बाद भी हालात सामान्य होने की जगह बदतर होते जा रहे हैं। गांव के एक निवासी मुहम्मद एहसान का कहना है कि गांव के हिंदुओं द्वारा चलाए जाने वाले ऑटोरिक्शा मुस्लिमों को नहीं बैठने देते हैं। हिंदू दुकानदार उन्हें राशन का जरूरी सामान तक नहीं बेचते हैं। इन्हीं कारणों से कई मुस्लिम परिवार गांव छोड़कर बाहर जा रहे हैं। मुस्लिम परिवार शहर जाकर काम भी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि ट्रांसपोर्ट जैसे साधनों में भी हिंदुओं द्वारा मुस्लिमों का बहिष्कार किया जा रहा है। गांव के धनी मुस्लिम परिवार समुदाय के गरीब परिवारों की मदद कर रहे हैं।

 

 

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