Saturday , 1 October 2022
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लखनऊ को दादरी बनाने की कोशिश-गौमांस परोसे जाने की अफवाह पर चर्च में आगज़नी

लखनऊ को दादरी बनाने की कोशिश-गौमांस परोसे जाने की अफवाह पर चर्च में आगज़नी

bbabu obaida 98380 33331 लखनऊ/ दादरी में गौह्त्या का आरोप लगा कर एयरफोर्स कर्मी के पिता अखलाक की हत्या से उठा सियासी बवंडर अभी थमा भी नहीं की शनिवार की सुबह लखनऊ के निगोहा थाना क्षेत्र के रामदेई  खेडा को दादरी बनाने की कोशिश की गयी/सांप्रदायिक शक्तियों ने यहाँ भी एक इसाई प्रार्थना स्थल में गौमास परोसे जाने की अफवाह उड़ा कर पूजास्थल के मुख्यद्वार को तोड़ दिया और अन्दर के कमरों में लगी खिडकियों के शीशे भी चकनाचूर कर दिए/ किसी ने १०० नम्बर पर पुलिस को सूचना दी तो मौके पर पहुंची पुलिस को लोगों ने मांस के लोथड़े और खून दिखाया जिसे एसएसआई ने सील कर  परिक्षण के लिए लैब भेज दिया और ग्रामीणों की भीड़ को शांत करा कर लौट गए  /पुलिस के जाने के बाद अराजक तत्वों ने मसीही समाज की इबादतगाह में दिन भर आराम से वहां रखा फर्नीचर तोड़ा और शाम को उसमे आग लगा दी /मामला बढ़ता देख गाँव के प्रधानपति जगरूप ने फिर पुलिस को सूचित किया लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया/ मामले की जानकारी जब मसीही समाज के लोगों को हुई तो लोगों में आक्रोश पैदा होगया/मौके की नजाकत को देखते हुए निगोहा  थाने के कार्यवाहक अध्यक्ष शिव नारायण सिंह ने गाँव के प्रधानपति जगरूप की तरफ से अज्ञात बलवाइयों के खिलाफ धारा १४७ और ४२७ के तहत कार्रवाई की बात सत्यम न्यूज़ से कही/ कार्यवाहक थाना अध्यक्ष ने सत्यम न्यूज़ को बताया की इसाई समाज के प्रार्थना स्थल पर गौमांस परोसे जाने की सूचना मिली थी ,मौके पर पुलिस को कुछ मांस के टुकड़े और खून मिला था जिसे टेस्टिंग के लिए भेज दिया है /lko-gokashi3_1446880145

शनिवार को हुई इस घटना को न तो क्षेत्रीय पुलिस ने गंभीरता से लिया और न ही उच्चाधिकारियों ने ,नतीजे में साम्प्रदायिक शक्तियों को सर उठाने का मौक़ा मिला और विश्व हिन्दू परिषद् के ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला अपने साथियों के साथं पहुँच गए और वहां मौजूद लोगों को भड़काया जिस पर आक्रोशित भीड़ ने चर्च भवन की चारदीवारी गिरा दी/ग़नीमत यह रहा की वहां मसीही समाज के लोगों की आबादी नहीं है जिसके चलते दादरी जैसी घटना की पुनरावृत्ति होते बची /जानकारी के अनुसार रामादेयी खेडा से पांच किलोमीटर दूर मेज़ोरेम के कुछ इसाई परिवार रहते हैं जो घटना के बाद डर के चलते वहाँ से कहीं चले गए ,पता चला है की यही लोग कभी कभी इस प्रार्थना सभा में आकर धार्मिक कार्यों को अंजाम देते हैं और ज्यादा किसी से मिलते जुलते नहीं/ गाँव वालों की माने तो कभी कभी होने वाली इस प्रार्थना में कुछ ही लोग शरीक होते हैं ऐसे में सवाल यह पैदा होता है की बाहर से आये  मुठ्ठी भर लोग पूरी गाए कैसे खा गए ?पुलिस और ग्रामीणों ने वहाँ मांस के लोथड़े ,गोबर ,खून और पशु के बाल मिलने की बात स्वीकारी है लेकिन फिर सवाल पैदा होता है की पशु को काट कर क्या वह लोग उसे कच्चा चबा गए ?इतना तो किसी की अकल में आसकता है की गाय या किसी भी जानवर को इंसान कच्चा नहीं खा सकता तो फिर क्या उसे पका कर खाया गया ?अगर पका कर खाया गया तो पूजास्थल पर खाने के बर्तन और बड़ा चूल्हा या लकड़ी क्यूँ नहीं मिली ?ज़ाहिर है की एक गाय गाय में औसतन ४० से ५० किलो गोश्त होता है जिसे पकाने के लिए बड़े भगोने या देग की ज़रुरत पड़ती है जो की वहां नहीं मिली/मान भी लिया जाए की वहां गाय काटी गयी और उसका मांस परोसा गया तो उसे पकाने में घंटों लगते हैं और उसके लिए रसोइये की ज़रुरत पड़ती है ,ढेरों मसाला ,प्याज़ ,आदि की ज़रुरत पड़ती है ,कई घंटे पकाने में ज़मीन पर लकड़ी से जलने के निशान बनते हैं लेकिन वहां से सिर्फ खून और मांस के लोथड़े मिले और इसी आधार पर दादरी जैसी घटना को अंजाम देने की साज़िश रची गयी/ सब से हैरत की बात तो यह है की इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी एल आई यू  या लोकल पुलिस ने प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी जिसका फायदा उठाते हुए आज विश्व हिन्दू परिषद् के लोगों ने वहाँ साम्प्रदायिकता की आग भड़काने की कोशिश की/church1_1446910985

इस साजिश के बाद सत्यम न्यूज़ ने अखिल भारतीय अल्पसंख्यक बोर्ड के चीफ कन्वीनर चौधरी जिया उल इस्लाम से बात की तो उन्हों ने घटना की निंदा करते हुए कहा की राजधानी में ऐसी घटना शर्मनाक है और साजिश के पीछे कौन है इसकी त्वरित जाँच कर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए /

आप को जानकर हैरत होगी कि इस मामले की जानकारी अल्पसंख्यक आयोग को भी नहीं है जब सत्यम न्यूज़ ने अल्प संख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद से बात की तो कहा की उन्हे मामले की जानकारी ही नहीं क्यूंकि आयोग का  कार्यालय शनिवार को बंद रहता है और आज  रविवार है लिहाज़ा वह सोमवार को स्थानीय पुलिस से जानकारी लेकर ज़रूरी क़दम उठायें गे/लखनऊ की इस ताज़ी घटना  ने एकबार फिर साबित कर दिया है कि प्रदेश में अल्पसंख्यकों की जानोमाल की रक्षा के प्रति शासन से लेकर स्थानीय पुलिस तक सीरियस नहीं तभी तो निगोहा में हुई घटना के बाद वहाँ हिन्दू संगठन माहौल को ख़राब करने में हिचक नहीं रहे / अब देखना है की लखनऊ के निगोहा क्षेत्र को दादरी बनाने की साज़िश करने वाले कब पकडे जाते हैं ?cc

 

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