Tuesday , 21 September 2021
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कानपुर.अलविदा की नमाज़ के लिए उमड़ा जनसैलाब

कानपुर.अलविदा की नमाज़ के लिए उमड़ा जनसैलाब

DSCF9979abu obaida 98380 33331 snn .रमजान के आखरी जुमे की नमाज़ अदा कर लाखों रोजेदारों ने नम आँखों से पाक महीने को अलविदा कहा.नमाज़ के बाद सभी ने अल्लाह से दुआ मांगी की उन्हें अगले साल तक ज़िन्दगी दे ताकि तेरी रहमतों और बरकतों का एक महीना और इबादत के लिए मिल जाये.लोगों ने हाथ उठा कर अपने रोज़े कुबूल करने  के साथ दुनिया और देश में अमन चैन की दुआएं मांगी .इस से पहले रोजेदारों ने सुबह से ही अलविदा की नमाज़ के लिए त्यारियां शुरू कर दीं थी.ज्यादातर लोगों  ने नए कुरते पैजामे पहने बच्चों को महिलाओं ने सजा संवार कर टोपी पहनाई और बड़ों के साथ मस्जिदों को भेजा.नमाज़ का सिलसिला दोपहर १२;३० से शुरू हो कर तीन बजे तक चला इस बीच पुलिस ने कड़े बंदोबस्त के साथ शहर के ट्राफिक को डाइवर्ट किया .यतीम खाना ,बांस मंडी मूल गंज दादा मियाँ चौराहों पर स्थित मस्जिदों के बाहर नमाजियों की सुविधा के लिए टेंट लगाये गए थे.वहीँ नगर निगम की ओर से सभी मस्जिदों के आस पास सफाई के बाद चूना डाला गया .क्षेत्रवार पुलिस के जवानो ने मस्जिदों के बाहर ट्राफिक को डाइवर्ट किया.शहर की लगभग सभी मस्जिदों में समय से पहले ही नमाजियों का आना शुरू हो गया था ,मस्जिद में जगह भरने के बाद लोगों ने सड़क पर जमात बनाई .लोगों की कोशिश थी अव्वल समय में नामाज़ से फारिग हो जाएँ जगह न मिलने पर दूसरी मस्जिदों की ओर रुख किया .सब से ज्यादा भीड़ यतीम खाना चौराहे पर स्थित नान पारा मस्जिद में देखने को मिली जिसमे नमाजियों की सफें परेड चौराहे तक पहुच गयीं.यहाँ नमाज़ को कवर करने के लिए कानपुर का सारा मीडिया मौजूद रहा .मीडिया के कैमरों ने नमाज़ के एक एक पल की रेकार्डिंग की .ख़ास तौर पर छोटे बच्चों के दुआ मांगते पोज़ की तलाश में कैमरा  मैनो ने धुप में मशक्क़त की.नमाज़ के बाद रोजेदारों से इंटरव्यू का सिलसिला शुरू हुआ लगभग सभी रोजेदारों ने कहा की नमाज़ के बाद अपने रोजों और इबादतों को कुबूल करने के साथ सारी दुनिया और ख़ास कर अपने देश में अमन कायम रहने की अल्लह से दुआ मांगी.दादा मियाँ मस्जिद में नायब सज्जादा नशीन अबुल बरकात नजमी ने ज़कात पर जोर देते हुए कहा की इस रकम को अदा करने के लिए रमजान का इंतज़ार न किया करें इस काम को तो शाबान के महीने में ही पूरा कर लिया करें ताकि गरीबों के घर में भी रमजान भर इफ्तारी बनती रहे ,उसके कपडे ईद से पहले मिल जाएँ .कहा की ज़कात को सही लोगों तक ढून्ढ कर पहुचाओ वो लोग जो समाज में किसी के सामने अपना हाथ नहीं फैलाते उन्हें खोजो और उन तक ज़कात का पैसा पहुचाओ .यही ज़कात अदा करने का असली मकसद है .बरकात नजमी ने नमाज़ से पहले अपनी तक़रीर में कहा की किसी इफ्तार पार्टी में जाने से पहले तस्दीक कर लो की दावत देने वाले का माल जायज़ है या नहीं उन्हों ने कहा की हराम की कमाई वालों का रोज़ा इफ्तार नाजायज़ है .नजमी ने जिला प्रशासन के रोजा इफ्तार में शिरकत करने वालों धर्म गुरुओं  पर निशाना साधते हुए कहा की इफ्तार पार्टी में मौजूद खाने की मेज़ पर तो सब एक होते हैं मगर मगरिब की नमाज़ में  अलग अलग जमात बना कर अपनी मानसिकता का परिचय  दे देते हैं जिस से दिलों की नफरतें जग ज़ाहिर हो जाती हैं अबुल बरकात ने कहा की उलेमा को जल्द ही एक राय होना पड़े गा नहीं तो कौम ऐसे ही गुमराह रहे गी .

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